धान काटने से पहले UP के किसान अभी कर लें ये 5 काम, MSP पर फसल बेचते समय नहीं होगी इन समस्याओं का सामना

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धान काटने से पहले UP के किसान कर लें ये 5 का

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UP Paddy Registration: उत्तर प्रदेश में धान खरीद की तैयारी शुरू. MSP पर फसल बेचने के लिए किसान अभी कराएं पंजीकरण, जांचें बैंक खाता, खतौनी और मोबाइल नंबर. जानें पूरी प्रक्रिया.

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UP Paddy Registration: उत्तर प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान धान की सरकारी खरीद की तैयारी शुरू हो गई है. इस बार केंद्र सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. दोनों श्रेणियों के MSP में पिछले साल के मुकाबले 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में किसान अगर अपनी फसल सरकारी क्रय केंद्र पर बेचने की तैयारी कर रहे हैं तो समय रहते जरूरी दस्तावेज और बैंक संबंधी जानकारी दुरुस्त कर लेना उनके लिए फायदेमंद रहेगा.

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1. किसान पंजीकरण और नवीनीकरण जरूर जांचें

सरकारी खरीद व्यवस्था में धान बेचने से पहले किसान पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. जिन किसानों ने पहले पंजीकरण कराया है, उन्हें नए खरीद सत्र के लिए अपनी जानकारी और पंजीकरण की स्थिति भी जांच लेनी चाहिए. उत्तर प्रदेश की सरकारी ई-मंडी वेबसाइट पर 2026-27 सीजन के लिए Paddy eProcurement विकल्प उपलब्ध है.

2. बैंक खाता और आधार लिंकिंग की जांच करें

धान की सरकारी खरीद का भुगतान किसान के बैंक खाते में किया जाता है. इसलिए किसान यह सुनिश्चित कर लें कि जिस बैंक खाते में भुगतान लेना है, वह आधार से लिंक और DBT के लिए सक्रिय है. UIDAI के मुताबिक बैंक सीडिंग स्टेटस MyAadhaar के जरिए देखा जा सकता है और इसकी जानकारी NPCI सर्वर से प्राप्त होती है.

3. खतौनी में नाम, रकबा और गाटा संख्या जरूर मिलाएं

किसान अपनी जमीन की खतौनी, गाटा संख्या, रकबा और खातेदार के नाम की जानकारी पहले ही जांच लें. उत्तर प्रदेश में धान खरीद के दौरान किसानों की जमीन और बोए गए रकबे का सत्यापन राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर किया जाता है. इसलिए खतौनी में किसी तरह की गलती होने पर उसे समय रहते ठीक कराना जरूरी है.

UP Bhulekh पोर्टल पर रियल टाइम खतौनी और भूमि की रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी देख सकते है. पोर्टल पर खतौनी में नाम, संरक्षक, पता और अंश से जुड़ी त्रुटि सुधार की सुविधा भी उपलब्ध है.

4. आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर सक्रिय रखें

पंजीकरण और सत्यापन से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया में मोबाइल नंबर की भूमिका महत्वपूर्ण है. इसलिए किसान यह जांच लें कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर सक्रिय है और उस पर OTP प्राप्त हो रहा है. पंजीकरण के दौरान नाम, आधार और जमीन से जुड़ी जानकारी भरते समय दस्तावेजों से मिलान जरूर कर लें.

5. धान की गुणवत्ता और नमी का रखें ध्यान

सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचने से पहले किसान यह सुनिश्चित करें कि फसल खरीद के निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो. कटाई के बाद धान को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके ही क्रय केंद्र पर ले जाना चाहिए. नमी या गुणवत्ता मानक से जुड़ी वर्तमान खरीद शर्तों की जानकारी किसान संबंधित क्रय केंद्र से जरूर प्राप्त कर लें.

MSP में 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों के लिए 2026-27 सीजन का MSP घोषित किया है. इसके तहत सामान्य धान का MSP 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल है. पिछले सीजन में सामान्य धान का MSP 2,369 रुपये और ग्रेड-ए धान का 2,389 रुपये प्रति क्विंटल था. यानी दोनों श्रेणियों में 72 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है.

किसानों के लिए काम के आधिकारिक लिंक

धान की सरकारी खरीद से जुड़े काम के लिए किसान केवल सरकारी वेबसाइटों का ही इस्तेमाल करें. फर्जी वेबसाइट या अनधिकृत लिंक पर आधार, बैंक या जमीन से जुड़ी जानकारी साझा करने से बचें.

  • धान खरीद और ई-प्रोक्योरमेंट: उत्तर प्रदेश ई-मंडी पोर्टल- यहां 2026-27 सीजन के लिए Paddy eProcurement का विकल्प उपलब्ध है.
  • कृषि विभाग की जानकारी और किसान सेवाएं: उत्तर प्रदेश कृषि विभाग पोर्टल- यहां कृषक पंजीकरण, किसान रजिस्ट्री और अन्य कृषि सेवाएं उपलब्ध हैं.
  • आधार-बैंक सीडिंग स्टेटस: UIDAI MyAadhaar- यहां आधार और बैंक खाते की लिंकिंग/सीडिंग स्थिति देखी जा सकती है.
  • जमीन और खतौनी की जानकारी: UP Bhulekh Portal- यहां रियल टाइम खतौनी और भूमि रिकॉर्ड देखे जा सकते हैं.
  • खतौनी में गलती सुधार: UP Bhulekh त्रुटि सुधार पोर्टल- नाम, संरक्षक, पता और अंश से जुड़ी त्रुटि सुधार की सुविधा यहां उपलब्ध है.

ध्यान दें: किसी भी फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करने से पहले आधार, बैंक खाते और खतौनी में दर्ज नाम, गाटा संख्या तथा रकबे की जानकारी अच्छी तरह मिला लें. जानकारी में अंतर होने पर सरकारी खरीद के समय सत्यापन में परेशानी हो सकती है.

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