सहारनपुर मस्जिद में राज या नया सवाल? ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाते ही मिला 15 फीट गहरा कुआं, प्राचीनता की जांच करेगी ASI
ध्वस्तीकरण के बाद मिला 15 फीट गहरा कुआं
Saharanpur Mosque Demolition: सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की ध्वस्त मस्जिद के मलबे के नीचे एक 15 फीट गहरा कुआं मिला है. इस खोज ने नई जिज्ञासाएं पैदा कर दी हैं, जिससे इसकी प्राचीनता और उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं.
Saharanpur Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की ध्वस्त की गई मस्जिद के मलबे के नीचे रविवार को एक कुआं मिला है. मलबा हटाते समय सामने आए इस कुएं की गहराई करीब 15 फीट और चौड़ाई लगभग डेढ़ मीटर बताई जा रही है. कुएं के ऊपर भारी स्लैब पड़ा था, जिसे पोकलेन मशीन से नहीं हटाया जा सका. बाद में कटर से स्लैब काटकर हटाया गया तो नीचे कुआं दिखाई दिया. वहीं, SDM सदर सुबोध कुमार के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह कुआं ही दिखाई दे रहा है और इसकी गहराई करीब 20 फीट के आसपास है. इसकी प्राचीनता, निर्माणकाल और इस्तेमाल को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है.
मलबा हटाते समय सामने आया कुआं
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद ध्वस्त किए जाने के करीब 24 घंटे बाद रविवार सुबह मलबा हटाने का काम चल रहा था. इसी दौरान टीम को जमीन के नीचे यह ढांचा मिला. ऊपर भारी स्लैब डाला हुआ था. पोकलेन मशीन से स्लैब नहीं टूटने पर उसे कटर से काटकर हटाया गया, जिसके बाद नीचे कुआं दिखाई दिया. कुएं की चौड़ाई करीब डेढ़ मीटर बताई गई है.
SDM बोले- प्रथम दृष्टया कुआं ही लग रहा
SDM सदर सुबोध कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद की गई कार्रवाई के दौरान यह ढांचा सामने आया है. उनके मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह कुआं ही दिखाई दे रहा है और इसकी गहराई करीब 20 फीट के आसपास है. हालांकि, यह कितना पुराना है, कब बनाया गया था और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता था, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा.
अब ASI करेगी जांच
प्रशासन के मुताबिक, मामले की जांच के लिए ASI की टीम मौके पर आएगी. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिला यह कुआं कितना पुराना है और इसका कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है या नहीं. फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद मलबे के नीचे मिला यह कुआं चर्चा का विषय बना हुआ है.
शनिवार को बुलडोजर से ध्वस्त हुई थी मस्जिद
कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बनी दो मंजिला मस्जिद को पुलिस-प्रशासन ने शनिवार सुबह बुलडोजर से ध्वस्त किया था. दो सितंबर को जिला जज न्यायालय के आदेश के बाद सात बुलडोजर लगाकर यह कार्रवाई की गई थी. इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई के आदेश में मस्जिद के निर्माण को अवैध माना था. मस्जिद पक्ष ने इस आदेश के खिलाफ जिला जज न्यायालय में अपील दाखिल की थी. दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जिला जज ने दो सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी थी.
शिकायत के बाद शुरू हुई थी कानूनी प्रक्रिया
बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजी थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर कब्जा करके मस्जिद का निर्माण किया गया है. जांच के बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्यासियों की बेदखली) अधिनियम-1972 के तहत वाद दाखिल किया गया था.
315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन का मामला
सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई 2026 के आदेश में कहा गया था कि प्रदेश सरकार की 315 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा करके मस्जिद का निर्माण किया गया. न्यायालय ने फसली वर्ष 1324 और 1359 में संबंधित जमीन को कचहरी-कलेक्ट्रेट के रूप में दर्ज पाया. आदेश में मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए बेदखली के साथ कब्जाधारी से 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 500 रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश दिया गया था. मस्जिद पक्ष ने 20 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला जज न्यायालय में चुनौती दी थी. करीब डेढ़ महीने तक दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जिला जज न्यायालय ने दो सितंबर को अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को यथावत रखा. इसके बाद पुलिस-प्रशासन ने शुक्रवार रात ही कलेक्ट्रेट परिसर की घेराबंदी कर पुलिस बल तैनात कर दिया था.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए