कानपुर में चीनी के रेट गिरे, फिर भी जेब पर पड़ सकता है असर! जाजमऊ पुल बंद से बढ़ा ट्रांसपोर्ट खर्च

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चीनी के दाम गिरे

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UP News: कानपुर में चीनी के दाम भले ही कम हुए हों, लेकिन जाजमऊ गंगा पुल बंद होने के कारण ट्रांसपोर्टरों की मुसीबतें बढ़ गई हैं. 122 किलोमीटर अतिरिक्त सफर के कारण डीजल और अन्य लागतें आसमान छू रही हैं, जिसका असर माल ढुलाई पर पड़ रहा है.

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UP News: कानपुर में चीनी के दाम में अब गिरावट का असर साफ दिखने लगा है। फुटकर बाजार में चीनी का भाव 55 रुपये प्रति किलो तक आ गया है, जबकि थोक बाजार में नंबर वन चीनी 49 रुपये और सादा चीनी 47 रुपये प्रति किलो बिक रही है। हालांकि, कुछ इलाकों में फुटकर भाव 57 रुपये किलो तक भी पहुंचा हुआ है।

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मिल गेट पर रेट गिरने से थोक कारोबार सुस्त

चीनी के भाव में लगातार नरमी के चलते सोमवार को शकरपट्टी के थोक बाजार में कारोबार धीमा रहा। फुटकर दुकानदार भी ज्यादा माल लेने के बजाय जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करते नजर आए। थोक कारोबारियों के मुताबिक, मिल गेट पर चीनी के रेट लगातार नीचे आ रहे हैं। बलरामपुर समेत प्रमुख मिलों से रिफाइंड चीनी के सौदे करीब 4,600 रुपये प्रति क्विंटल और सादा चीनी की बिक्री लगभग 4,450 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास हो रही है।

GST और दूसरे खर्च जुड़ने के बाद बढ़ जाता है भाव

चीनी पर पांच प्रतिशत जीएसटी जुड़ने के बाद प्रति क्विंटल कीमत में करीब 230 से 250 रुपये तक का इजाफा हो जाता है। इसके बाद भाड़ा, पल्लेदारी और मिल से जुड़े दूसरे खर्च जोड़ने पर थोक बाजार में नंबर वन चीनी का भाव करीब 49 से 50 रुपये प्रति किलो के बीच पहुंच रहा है। वहीं, फुटकर कारोबारियों का कहना है कि थोक भाव ही 50 रुपये किलो से ऊपर पड़ रहा है। ऐसे में फुटकर में चीनी 55 रुपये से कम में बेचना मुश्किल है।

पैकिंग और छीजत का खर्च भी जुड़ता है

फुटकर व्यापारियों के मुताबिक, चीनी को बोरी से निकालकर बेचने के दौरान प्रति बोरी करीब 1.5 से 2 किलो की छीजत हो जाती है। इसके अलावा पैकिंग और मजदूरी का खर्च भी कारोबारियों को उठाना पड़ता है। यही वजह है कि थोक और फुटकर भाव में अंतर बना हुआ है।

जाजमऊ गंगा पुल बंद होने से ट्रांसपोर्टरों की बढ़ी परेशानी

जाजमऊ का पुराना गंगा पुल बंद होने का असर अब सिर्फ राहगीरों के सफर पर नहीं, बल्कि माल ढुलाई पर भी पड़ रहा है। भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजे जाने के कारण ट्रकों को कानपुर पहुंचने के लिए करीब 122 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

एक ट्रक पर करीब 5 हजार रुपये अतिरिक्त डीजल खर्च

लंबा रूट होने से एक ट्रक का डीजल खर्च करीब 5,000 रुपये तक बढ़ गया है। इतना ही नहीं, सफर में करीब 24 घंटे तक का अतिरिक्त समय भी लग रहा है। पुल बंद रहने की अवधि बढ़ने के साथ ट्रांसपोर्टर और कारोबारी दोनों परेशान हैं।

122 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर ऐसे बढ़ा

उत्तर प्रदेश युवा ट्रांसपोर्ट यूनियन के संरक्षक श्याम शुक्ल के अनुसार, डायवर्जन के कारण उन्नाव के गदनखेड़ा से बक्सर घाट तक करीब 54 किलोमीटर, बक्सर घाट से चौडगरा-प्रयागराज हाईवे तक करीब 23 किलोमीटर और चौडगरा से कानपुर शहर तक करीब 45 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इन सभी हिस्सों को जोड़ने पर सामान्य रास्ते के मुकाबले करीब 122 किलोमीटर अतिरिक्त सफर हो रहा है।

सिर्फ डीजल ही नहीं, बढ़ रही दूसरी लागत भी

ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक, अतिरिक्त दूरी से केवल डीजल का खर्च नहीं बढ़ रहा है। चालक का समय, वाहन का रखरखाव और पूरे परिचालन की लागत भी बढ़ रही है। ट्रांसपोर्टर आदित्य तिवारी का कहना है कि अगर करीब तीन महीने तक यही व्यवस्था बनी रही तो इसका असर माल ढुलाई के कारोबार पर पड़ सकता है। आगे चलकर बढ़ा हुआ परिवहन खर्च सामान की कीमतों में भी शामिल हो सकता है।

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