UP Flood: यूपी में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ा, गंगा-यमुना से लेकर घाघरा-गंडक तक उफान, इन जिलों में अलर्ट, गांवों पर मंडरा रहा संकट

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गंगा-यमुना से लेकर घाघरा-गंडक तक उफान

UP Flood News: उत्तर प्रदेश में बारिश के साथ नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की चिंता फिर बढ़ गई है. गंगा, यमुना, घाघरा और गंडक जैसी प्रमुख नदियों में उफान के चलते प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है. तटवर्ती इलाकों और निचले गांवों पर संकट मंडरा रहा है.

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UP Flood News: उत्तर प्रदेश में बारिश के साथ नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है. गंगा-यमुना से लेकर घाघरा और गंडक नदी तंत्र तक जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच तटवर्ती इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. निचले इलाकों और नदी किनारे बसे गांवों में लोगों की चिंता बढ़ गई है. प्रदेश के आधिकारिक Flood Management Information System पर भी 1 सितंबर 2026 को नदियों के जलस्तर और बाढ़ पूर्वानुमान की निगरानी जारी है. सिस्टम पर घाघरा के अयोध्या और एल्गिन ब्रिज समेत प्रमुख निगरानी बिंदुओं का जलस्तर दर्ज किया जा रहा है.

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गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने से प्रयागराज में चिंता

प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर फिलहाल पहले की तुलना में कुछ धीमा हुआ है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है. स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नदियों की रफ्तार धीमी होने के बावजूद बाढ़ का खतरा बना हुआ है. नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की नजर लगातार जलस्तर पर बनी हुई है. गंगा-यमुना के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सीधा असर तटीय इलाकों और ग्रामीण बस्तियों पर पड़ता है. जलस्तर बढ़ने की स्थिति में खेतों, संपर्क मार्गों और निचले इलाकों में पानी पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है.

घाघरा ने बढ़ाई पूर्वांचल की चिंता

पूर्वी उत्तर प्रदेश में घाघरा नदी को लेकर भी चिंता बढ़ी है. आजमगढ़ क्षेत्र में घाघरा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों के लोगों की परेशानी बढ़ाई है. घाघरा का असर अयोध्या, बाराबंकी, गोंडा और पूर्वांचल के कई तटवर्ती क्षेत्रों तक दिखाई दे सकता है. यही वजह है कि नदी के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी को भी प्रशासन गंभीरता से ले रहा है.

गंडक नदी को लेकर भी निगरानी तेज

नेपाल और उत्तर बिहार के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का असर नदी तंत्र पर पड़ता है. गंडक नदी के जलस्तर और बैराज से पानी के प्रवाह पर भी निगरानी रखी जा रही है. उपलब्ध रिपोर्टों में नेपाल में बाढ़ की स्थिति के बाद गंडक नदी तंत्र को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश में सतर्कता का उल्लेख है. पूर्वी यूपी के सीमावर्ती और नदी प्रभावित क्षेत्रों में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को तैयार रखा जा रहा है.

गांवों पर सबसे ज्यादा संकट

नदियों का जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले नदी के किनारे बसे गांव और निचले इलाके प्रभावित होते हैं. खेतों में पानी भरने के साथ ग्रामीण संपर्क मार्ग टूटने और आवागमन प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में ग्रामीणों को नदी और बाढ़ प्रभावित इलाकों के पास जाने से बचने की सलाह दी जा रही है. प्रशासन की ओर से जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.

बारिश ने बढ़ाई मुश्किल

उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच कई जिलों में बारिश का दौर जारी है. बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर का एक साथ असर पड़ने पर पहले से जलभराव वाले क्षेत्रों में स्थिति गंभीर हो सकती है. फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यही है कि गंगा-यमुना, घाघरा और अन्य नदियों का जलस्तर किस दिशा में जाता है. अगर जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होती है तो तटवर्ती गांवों में बाढ़ का संकट और गहरा सकता है.

प्रशासन अलर्ट, लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की जरूरत है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों को नदी के किनारे जाने से रोकना जरूरी है.

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