UP में बदल गया गाड़ियों का नियम, 7 से 9 सीटर वाहनों का अब नहीं बनवाना होगा फिटनेस, रद्द हुआ 2005 का नियम
7 से 9 सीटर निजी गाड़ियों को फिटनेस सर्टिफिकेट से राहत (AI)
उत्तर प्रदेश में 7 से 9 सीटर निजी वाहन मालिकों के लिए अच्छी खबर है. परिवहन विभाग ने 2005 के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है, जिससे इन वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाना अब केवल सीट क्षमता के आधार पर अनिवार्य नहीं होगा. यह बदलाव वाहन मालिकों को समय और पैसे दोनों बचाएगा.
UP Vehicle Fitness Certificate : उत्तर प्रदेश में 7 से 9 सीटर निजी वाहन मालिकों के लिए खुशखबरी है. अब स्कॉर्पियो, इनोवा, अर्टिगा और सफारी जैसी निजी गाड़ियों के लिए केवल सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य नहीं होगा. परिवहन विभाग ने वर्ष 2005 में लागू किए गए पुराने आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है.
2005 में लागू हुआ था नियम
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने वर्ष 2005 में छह से अधिक सीटों वाली निजी गाड़ियों के लिए हर साल फिटनेस प्रमाण पत्र बनाना अनिवार्य किया था. इस नियम के तहत 7 से 9 सीटर निजी गाड़ियों के मालिकों को भी नियमित रूप से फिटनेस करानी पड़ती थी. अब परिवहन विभाग के नए आदेश के बाद इस श्रेणी के निजी वाहनों को सिर्फ सीट क्षमता के आधार पर हर साल फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत नहीं होगी. इससे वाहन मालिकों को फिटनेस प्रक्रिया में लगने वाले समय और खर्च से राहत मिलेगी.
परिवहन आयुक्त ने जारी किया आदेश
उत्तर प्रदेश परिवहन आयुक्त की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत केवल सीट क्षमता के आधार पर निजी वाहनों पर फिटनेस की शर्त लागू नहीं की जा सकती. विभाग के मुताबिक इस संबंध में नियम तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है. इसी आधार पर परिवहन विभाग ने 12 दिसंबर 2005 को जारी पुराने आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है.
स्कॉर्पियो, इनोवा समेत इन गाड़ियों को राहत
नए बदलाव का असर 7 से 9 सीटर निजी वाहनों पर पड़ेगा. इनमें स्कॉर्पियो, इनोवा, अर्टिगा और सफारी जैसी गाड़ियां शामिल हैं. ऐसे निजी वाहन मालिकों को अब सिर्फ सीट क्षमता के आधार पर हर साल फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने की जरूरत नहीं होगी.
फिटनेस व्यवस्था हटने से उठ रहे सवाल
नए नियम से वाहन मालिकों को राहत तो मिली है, लेकिन इसके दूसरे पहलू को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. गाजियाबाद के आरटीओ प्रमोद कुमार सिंह के मुताबिक पहले 7 से 9 सीटर निजी वाहनों को हर साल फिटनेस करानी पड़ती थी. फिटनेस जांच की व्यवस्था खत्म होने के बाद खराब या पुरानी गाड़ियों के सड़क पर चलने की आशंका को लेकर चिंता जताई जा रही है. पहले नियमित फिटनेस जांच के कारण वाहनों की स्थिति की जांच होती थी और जरूरत पड़ने पर समय पर मरम्मत करानी पड़ती थी.
वाहन मालिकों के समय और खर्च में होगी बचत
पुराना आदेश रद्द होने के बाद 7 से 9 सीटर निजी वाहन मालिकों को हर साल फिटनेस प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी. इससे उन्हें फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने में लगने वाले समय और खर्च से राहत मिलेगी. हालांकि, वाहन की सुरक्षित स्थिति बनाए रखना वाहन मालिक की जिम्मेदारी बनी रहेगी.
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