"6 साल की नौकरी बचेगी या जाएगी?" सुप्रीम कोर्ट के एक रुख से हिला उत्तर प्रदेश, 69000 भर्ती का अंतिम दौर शुरू
UP शिक्षक भर्ती विवाद
उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम बहस छिड़ गई है. करीब छह साल से नौकरी कर रहे चयनित शिक्षकों के भविष्य पर फैसला होना है. जानिए इस मामले से जुड़ी हर बात.
UP 69K Teacher Recruitment: उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अंतिम बहस शुरू हो गई. जस्टिस एमएम भट्टी और जस्टिस एनवी अंज़ारिया की पीठ के सामने चयनित शिक्षकों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने कहा कि ये शिक्षक करीब छह साल से नौकरी कर रहे हैं. भर्ती में अगर कोई गलती हुई भी है तो इसमें इन शिक्षकों की कोई भूमिका नहीं है. इसलिए उन्हें नौकरी से नहीं हटाया जाना चाहिए.
सरकार ने कहा- चयनित शिक्षकों को हटाने के पक्ष में नहीं
राज्य सरकार की ओर से वकील अंकित गोयल ने भी कोर्ट में कहा कि सरकार किसी भी चयनित शिक्षक को नौकरी से हटाने के पक्ष में नहीं है. इस पर पीठ ने सवाल किया कि अगर सरकार ऐसे चयनित शिक्षकों को हटाना नहीं चाहती, जिनका चयन नियमों के खिलाफ हुआ है, तो उन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय कैसे मिलेगा, जो छह साल से अदालत में अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं.
सुनवाई में EWS आरक्षण का मुद्दा भी उठा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस आरक्षण का मुद्दा भी उठा. राज्य सरकार ने कहा कि इस भर्ती में ईडब्ल्यूएस को लेकर कोई विवाद नहीं है. हाईकोर्ट इस मुद्दे को खारिज कर चुका है. इस मामले की सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी.
पिछली पीठ के विशेष अधिकार पर भी हुई चर्चा
सरकार की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि पिछली पीठ इस मामले में अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही थी. हालांकि जस्टिस भट्टी ने कहा कि मौजूदा पीठ सभी पक्षों को सुनने के बाद ही इस मामले में फैसला करेगी. इस तरह 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम बहस का दौर शुरू हो गया है.
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