बाजार में सस्ते मिल रहे फलों से शुरू करें ये कारोबार, सरकार देगी 35% तक सब्सिडी.... जानें पूरा तरीका

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ताजे फलों से तैयार स्वादिष्ट जूस और शेक

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Fruit Business Scheme: फलों को वेस्ट होने से बचाएं और शुरू करें अपना जूस का कारोबार. केंद्र सरकार की योजना के तहत 35% तक की सब्सिडी पाएं और अपना बिज़नेस बढ़ाएं. पूरी जानकारी और आवेदन की प्रक्रिया जानें.

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Fruit Business Scheme: लकी कुमारी/उत्तर प्रदेश: कहते हैं कि कमाई का रास्ता वहीं से निकलता है, जहां लोग सिर्फ खर्च देखते हैं. अगर आपके पास कारोबार शुरू करने का प्लान है और आप फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं तो फलों से जूस तैयार करने का कारोबार आपके लिए अच्छा विकल्प बन सकता है. खास बात यह है कि इस कारोबार को शुरू करने या पहले से चल रही यूनिट को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से आर्थिक मदद भी दी जा रही है. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत पात्र लोगों को जूस यूनिट या जूस शॉप लगाने के लिए प्रोजेक्ट लागत की 35 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकती है. इसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये तक है.

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फलों की बर्बादी रोककर तैयार कर सकते हैं नया प्रोडक्ट

फलों का सीजन आते ही कई बार बाजार में किसी खास फल की आवक काफी बढ़ जाती है. ज्यादा आवक होने पर फल की कीमत कम हो सकती है और समय पर बिक्री नहीं होने पर फल खराब भी हो जाते हैं. ऐसे में फलों को सीधे बेचने के बजाय उनका पल्प निकालकर जूस तैयार करने का कारोबार किया जा सकता है. इससे फल को एक वैल्यू एडेड प्रोडक्ट में बदला जा सकता है और कारोबार के लिए कमाई का नया रास्ता तैयार हो सकता है.

जूस यूनिट लगाने पर 35 प्रतिशत तक सब्सिडी

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी यूनिट लगाने वालों को वित्तीय सहायता का प्रावधान है. फ्रूट जूस यूनिट के लिए भी इस योजना के तहत लाभ लिया जा सकता है. पात्र लाभार्थी को प्रोजेक्ट की कुल लागत का 35 प्रतिशत तक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी मिल सकती है. हालांकि यह राशि अधिकतम 10 लाख रुपये तक ही हो सकती है. उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति का प्रोजेक्ट 20 लाख रुपये का है तो पात्रता के अनुसार 35 प्रतिशत के हिसाब से 7 लाख रुपये तक की सब्सिडी बन सकती है.

कारोबार शुरू करने से पहले मशीनरी और प्रोजेक्ट तैयार करना होगा

जूस का कारोबार शुरू करने के लिए सबसे पहले यह तय करना होगा कि किस स्तर पर यूनिट लगानी है. इसके बाद मशीनरी, जगह, कच्चा माल, पैकेजिंग और उत्पादन क्षमता के हिसाब से प्रोजेक्ट तैयार किया जा सकता है. मशीनरी खरीदने के लिए संबंधित विक्रेता से कोटेशन भी लिया जाता है. इसी आधार पर प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत तैयार की जाती है.

आवेदन के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत

इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली का बिल और पिछले 6 महीने का बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेजों की जरूरत होती है. इसके अलावा जिस कंपनी या विक्रेता से मशीनरी खरीदी जानी है, उसका कोटेशन भी आवेदन प्रक्रिया में लगाया जाता है. आवेदन से पहले सभी दस्तावेजों को सही तरीके से तैयार रखना जरूरी है.

ऑनलाइन आवेदन के साथ विभाग से भी ले सकते हैं जानकारी

योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन है. इच्छुक व्यक्ति ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके साथ ही अपने जिले के उद्यान विभाग के कार्यालय में संपर्क करके योजना की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली जा सकती है. आवेदन करने से पहले योजना की मौजूदा शर्तों और पात्रता को विभाग से जरूर समझ लेना चाहिए.

मुरादाबाद में पहले से चल रही हैं दो फ्रूट जूस यूनिट

मुरादाबाद जिले में इस योजना के तहत दो फ्रूट जूस यूनिट संचालित होने की जानकारी सामने आई है. इससे पता चलता है कि जिले में इस तरह की फूड प्रोसेसिंग यूनिट पर काम किया जा रहा है. कारोबार से होने वाली कमाई एक जैसी नहीं होती और यह फल की कीमत, उत्पादन, बिक्री, पैकेजिंग, बिजली, मजदूरी और दूसरे खर्चों पर निर्भर करती है. विभागीय स्तर पर बताया गया है कि इस कारोबार में खर्च निकालने के बाद अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना रहती है.

कमाई के लिए बाजार और फल की मांग समझना जरूरी

जूस यूनिट लगाने से पहले सिर्फ सब्सिडी पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है. कारोबारी को यह भी देखना होगा कि उसके इलाके में किस तरह के जूस की मांग ज्यादा है. मौसम के हिसाब से फलों की कीमत और उपलब्धता को समझना होगा. इसके साथ ही जूस की पैकेजिंग, साफ सफाई, गुणवत्ता, बिक्री और बाजार तक पहुंच बनाने की योजना भी जरूरी है. सही फल का चयन और उसकी बेहतर प्रोसेसिंग कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है.

छोटे स्तर से शुरू करके कारोबार को बढ़ाया जा सकता है.

जो लोग फूड प्रोसेसिंग में अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं उनके लिए फ्रूट जूस यूनिट एक विकल्प हो सकती है. सरकारी योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी शुरुआती निवेश का बोझ कम करने में मदद कर सकती है. हालांकि किसी भी कारोबार में पैसा लगाने से पहले बाजार की मांग, कुल लागत, बैंक लोन, सब्सिडी की पात्रता और संभावित बिक्री का पूरा हिसाब तैयार करना जरूरी है. अगर योजना बनाकर काम किया जाए तो फलों को जूस में बदलकर वैल्यू बढ़ाने वाला यह कारोबार कमाई का जरिया बन सकता है.

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