सड़कें गायब, गांव जलमग्न! शाहजहांपुर पर मंडराया कुदरत का कहर, नाव पर जिंदगी लादकर भाग रहे लोग
बाढ़ प्रभावित गांव
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में बाढ़ का संकट गहरा गया है. रामगंगा और बहगुल नदियों के जलस्तर बढ़ने से एक दर्जन से ज्यादा गांव डूब गए हैं. सड़कें जलमग्न होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. हजारों हेक्टेयर फसल भी बाढ़ की चपेट में आ गई है.
Shahjahanpur Flood: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है. रामगंगा और बहगुल नदी का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास पहुंचने के बाद एक दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. कई इलाकों में सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है. हालात ऐसे हैं कि लोग अपनी बाइक तक नाव पर रखकर पानी पार करने को मजबूर हैं. वहीं, हजारों हेक्टेयर फसल पानी में डूबने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है.
रामगंगा उफान पर, गंगा भी करीब
जिला प्रशासन के मुताबिक फिलहाल रामगंगा नदी खतरे के निशान से 19 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जबकि गंगा 25 सेंटीमीटर नीचे है. वहीं गर्रा नदी खतरे के निशान से 1.05 मीटर नीचे और खन्नौत नदी 40 सेंटीमीटर नीचे बह रही है, लेकिन परशुरामपुरी तहसील के करीब एक दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं. गांवों को जोड़ने वाली सड़कें पानी में डूबने से आवागमन पूरी तरह ठप है.
300 मीटर तक सड़क पर ही नदी, तिकोला से थाथरमई तक संपर्क कटा
सबसे बुरा हाल परशुरामपुरी क्षेत्र के तिकोला तालुका दुलरामई में है. यहां बाढ़ का पानी सीधे सड़क पर बह रहा है. यहां से करीब 300 मीटर दूर थाथरमई समेत दूसरे गांवों को जोड़ने वाली सड़क भी पूरी तरह जलमग्न है. थाथरमई जाने वाले लोगों के लिए सड़क से निकलना मुश्किल हो गया था, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों को पार कराने के लिए नाव की व्यवस्था की है. ग्रामीण बाइक समेत नाव पर सवार होकर सड़क पार कर रहे हैं. उनका कहना है कि पानी गांवों के अंदर तक पहुंच गया है, घरों और खेतों तक जाना भी मुश्किल हो रहा है.
हजारों हेक्टेयर फसल डूबी, किसानों की चिंता बढ़ी
बाढ़ के पानी ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है. खेतों में पानी भरने से हजारों हेक्टेयर फसल खराब हो गई है. ग्रामीणों के मुताबिक कई हजार हेक्टेयर में खड़ी फसल बर्बाद हो चुकी है. गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़कें पानी में डूबी हैं, जिससे रोजमर्रा के काम के लिए निकलना भी मुश्किल हो गया है. परशुरामपुरी के अलावा कलान तहसील के कुछ गांव भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.
72 घंटे और भारी, दियूनी बैराज से 22 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया
प्रशासन की चिंता अभी और बढ़ने वाली है. गर्रा नदी में दियूनी बैराज से करीब 22 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. जिलाधिकारी के अनुसार, 7 सितंबर को छोड़ा गया यह पानी अगले 72 घंटे में जिले के संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना है. इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति और बिगड़ सकती है. प्रशासन के मुताबिक, मंगलवार सुबह से खन्नौत नदी के जलस्तर में कमी आने की उम्मीद है.
एसडीएम ने किया प्रभावित गांवों का दौरा
सोमवार शाम परशुरामपुरी एसडीएम ने अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने जलभराव और आवागमन की स्थिति का जायजा लिया. प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नाव और दूसरी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. कुछ ग्रामीणों ने व्यवस्थाओं को नाकाफी बताया है, जबकि कुछ गांवों में नाव पहुंचने से लोगों को राहत मिली है.
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