प्रयागराज में घुलेगा वृंदावन का रंग: इस्कॉन मंदिर में सजेंगी 7 प्रमुख झांकियां, जानिए मध्यरात्रि में क्यों बंद हो जाएंगी मंदिर की लाइटें?
प्रयागराज में घुलेगा वृंदावन का रंग
Prayagraj Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रयागराज में इस बार ब्रज की संस्कृति का अनुभव होगा. इस्कॉन मंदिर में विशेष आयोजन, कृष्ण लीलाओं की झांकियां और 1 लाख श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं.
Prayagraj Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर संगम नगरी प्रयागराज में तैयारियां तेज हो गई हैं. इस बार शहर में जन्मोत्सव केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ब्रज की संस्कृति, कृष्ण लीला, भजन, कीर्तन, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए भक्तों को ब्रजधाम जैसा अनुभव कराने की तैयारी है. इस्कॉन मंदिर में विशेष आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है. करीब एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पंडाल, पार्किंग, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाओं पर भी काम शुरू कर दिया गया है. भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर रात 12 बजे विशेष अभिषेक होगा, जिसमें श्रद्धालुओं को भी सहभागिता का अवसर मिलेगा.
तीन दिन पहले से शुरू होगा कान्हा का विशेष श्रृंगार
जन्माष्टमी से करीब तीन दिन पहले भगवान श्रीकृष्ण के विशेष श्रृंगार की शुरुआत होगी. तीनों दिन अलग-अलग स्वरूप में भगवान का श्रृंगार किया जाएगा. मंदिर परिसर में वृंदावन के सात प्रमुख मंदिरों की झांकियां तैयार की जाएंगी. इसके साथ ही ब्रज शैली की विशेष उत्सव पोशाक तैयार कराई जा रही है. मंदिर की फूलों से विशेष सजावट होगी, जिसमें 21 प्रकार के फूलों का इस्तेमाल किया जाएगा. भगवान को 108 प्रकार के भोग अर्पित करने की भी तैयारी है.
कृष्ण लीलाओं की झांकियों के बीच होगा सांस्कृतिक आयोजन
इस बार झांकियों के माध्यम से सात प्रमुख मंदिरों की प्राचीन परंपरा और उनके स्वरूप को दर्शाया जाएगा. इनके बीच भगवान कृष्ण से जुड़ी विभिन्न लीलाओं का मंचन होगा. कथा आधारित नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे. ब्यौमासुर वध जैसे प्रसंगों को नाटक के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा. बच्चों के लिए आध्यात्मिक क्विज, महाप्रसाद और एकादशी से जुड़े स्टॉल भी लगाए जाएंगे. श्रद्धालुओं के लिए सामान्य दर्शन के साथ वीआईपी दर्शन की अलग व्यवस्था भी रहेगी.
एक लाख श्रद्धालुओं के लिए वाटरप्रूफ पंडाल और अलग-अलग टीमें
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए इस्कॉन मंदिर में वाटरप्रूफ पंडाल लगाया जाएगा. बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की टीम तैयार की जा रही है. पंडाल व्यवस्था, वॉलंटियरिंग, पार्किंग, प्रवेश-निकास और सुरक्षा की जिम्मेदारी अलग-अलग टीमों को सौंपी जाएगी. अशोक नगर स्थित गौरव धाम में भी कथा, कीर्तन, आरती और प्रसाद का आयोजन होगा. इससे जन्माष्टमी पर प्रयागराज के मंदिरों के साथ सांस्कृतिक मंचों पर भी कृष्ण भक्ति और ब्रज संस्कृति की छटा देखने को मिलेगी.
महिलाओं और युवाओं के लिए होगा विशेष ब्रज उत्सव
आयोजन के दौरान आचार्य जन्मदिवस के अवसर पर व्यास पूजा उत्सव भी मनाया जाएगा. इस्कॉन मंदिर के श्रील प्रभुपाद की व्यास पूजा के बाद भंडारे में पूरी-सब्जी, कढ़ी-चावल और मिठाई का प्रसाद वितरित किया जाएगा. महिलाओं और पुरुषों के लिए विशेष ब्रज उत्सव का आयोजन होगा, जिसमें गोपी वेशभूषा, भजन, नृत्य, ड्रामा और कीर्तन होंगे. इसके लिए निःशुल्क पंजीकरण की व्यवस्था रहेगी. लड़कियों के लिए पांच सितंबर और लड़कों के लिए छह सितंबर को भजन क्लोथिंग होगा. इसमें धोती-कुर्ता समेत ब्रज शैली की वेशभूषा रखी जाएगी.
चार सितंबर को एक साथ मनेगी जन्माष्टमी
इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषीय योग के संयोग में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा. वैष्णव, स्मार्त और रोहिणी नक्षत्र को मानने वाले श्रद्धालु चार सितंबर को एक साथ जन्माष्टमी मनाएंगे. ज्योतिषविद् आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार अष्टमी तिथि तीन सितंबर की रात 1:33 बजे शुरू होगी, जबकि रोहिणी नक्षत्र इससे पहले रात 12:45 बजे लग जाएगा. रोहिणी नक्षत्र चार सितंबर की रात 11:12 बजे तक और अष्टमी तिथि रात 11:13 बजे तक रहेगी. ऐसे में चार सितंबर को दोनों का संयोग रहेगा. इसी दिन उदयव्यापिनी रोहिणी नक्षत्र भी प्राप्त होगा. इसी कारण स्मार्त, वैष्णव और औदधिक भक्त चार सितंबर को जन्माष्टमी मनाएंगे. इस दिन शुक्र राशि में सूर्य, बुध और केतु के संचरण से त्रिग्रही योग का संयोग भी बन रहा है.
एक हजार एकादशी के समान फलदायी माना गया है व्रत
पराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत एक हजार एकादशी के फल के समान माना गया है. इस दिन पूरी रात जागरण और भगवान के ध्यान का विशेष महत्व बताया गया है. भविष्य पुराण में जन्माष्टमी व्रत को अकाल मृत्यु से बचाने वाला बताया गया है. व्रत के दौरान उपवास रखते हुए आत्मीय अमृत पान और अहंकार का त्याग करने की बात कही गई है.
विष्णु नाम का जप और श्रीमद्भागवत का पाठ करें
ज्योतिषाचार्य डॉ. अमिताभ गौड़ के अनुसार जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान कर सभी देवी-देवताओं को प्रणाम करने के बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए. दिनभर भगवान श्रीकृष्ण और विष्णु नाम का जप करने के साथ यथासंभव श्रीमद्भागवत का पाठ करना चाहिए. सूर्यास्त के बाद पूजा घर में भगवान श्रीकृष्ण की सोने, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी की यथाशक्ति मूर्ति अथवा चित्र को नए वस्त्र पहनाकर पालने में स्थापित कर पूजा करनी चाहिए. पूजन के दौरान माता देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद बाबा, यशोदा मैया और लक्ष्मी माता आदि का नाम लेकर प्रणाम करने के बाद मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाना चाहिए.
Must Read- 11 मौतों के बाद कौशांबी में एनकाउंटर, ब्लास्ट के मुख्य आरोपी नौशाद को लगी गोली, अब खुलेंगे कई राज
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए