थप्पड़ कांड के बाद SSP अविनाश पांडेय पर गिरी गाज, मेरठ से हटाकर योगी सरकार ने दिया बड़ा सियासी संदेश

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प्रदर्शन के दौरान थप्पड़ मारने का वीडियो हुआ वायरल

UP News: मेरठ में दलित छात्रा की हत्या के बाद हुए प्रदर्शन के दौरान एसएसपी अविनाश पांडेय का वकील को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल हुआ था इस घटना के बाद योगी सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए नौ आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं

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UP News: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने गुरुवार देर रात नौ आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए. इस फेरबदल में मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडेय को भी हटा दिया गया है. उन्हें मेरठ से स्थानांतरित कर डीजीपी मुख्यालय, लखनऊ में पुलिस अधीक्षक पद पर संबद्ध किया गया है. वहीं संभल के चर्चित आईपीएस अधिकारी केके बिश्नोई को संभल से हटाकर बिजनौर का नया कप्तान बनाया गया है. सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक बदलाव के साथ राजनीतिक संदेश से जोड़कर भी देखा जा रहा है.

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प्रदर्शन के दौरान थप्पड़ मारने का वीडियो हुआ वायरल

अविनाश पांडेय मेरठ में दलित छात्रा की हत्या के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आए थे. प्रदर्शनकारी छात्रा को इंसाफ दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया. कार्रवाई के बीच एसएसपी एक पुलिस वैन के भीतर पहुंचे और वहां मौजूद वकील रवि गौतम को थप्पड़ मारते दिखाई दिए. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद और राजनीतिक विरोध तेज हो गया.

दलित छात्रा की हत्या के बाद बढ़ा था आक्रोश

मेरठ में 20 वर्षीय दलित छात्रा ललिता गौतम की पांच जुलाई को हत्या कर दी गई थी. घटना के विरोध में आठ जुलाई को दलित समुदाय के लोगों ने मेरठ कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि छात्रा के हत्यारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और परिवार को न्याय मिले. प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और एसएसपी के कथित थप्पड़ कांड ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया. इसके बाद राजनीतिक दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए.

विपक्ष ने एसएसपी पर कार्रवाई की मांग उठाई

घटना के बाद बहुजन समाज पार्टी से लेकर आजाद समाज पार्टी तक ने एसएसपी अविनाश पांडेय के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई. आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद समेत कई नेताओं ने प्रदर्शन किया और मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग रखी. प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार को अल्टीमेटम भी दिया गया था. इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के डीजीपी और गृह सचिव से जवाब मांगा था. इससे विवाद और गहरा गया.

दलित समाज की नाराजगी बनी राजनीतिक चिंता

थप्पड़ कांड के बाद मामला केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी बन गया. विपक्षी दलों ने इसे दलित समाज के सम्मान से जोड़ते हुए सरकार को घेरना शुरू किया. उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है और चुनावी समीकरणों में उनका प्रभाव काफी बड़ा माना जाता है. ऐसे में सरकार किसी भी ऐसे विवाद को लंबा खिंचने देना नहीं चाहेगी, जिससे दलित समुदाय में नाराजगी बढ़े और विपक्ष को चुनावी मुद्दा मिल जाए.

शंटिंग से सरकार ने दिया प्रशासनिक संदेश

अविनाश पांडेय को मेरठ से हटाकर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध किए जाने को सरकार की ओर से स्पष्ट प्रशासनिक संदेश माना जा रहा है. इस फैसले के जरिए यह संकेत देने की कोशिश दिखाई देती है कि कानून-व्यवस्था संभालने के दौरान पुलिस अधिकारियों से संयम और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है. खासतौर पर दलित समुदाय से जुड़े संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई का तरीका सरकार के लिए महत्वपूर्ण है. हालांकि सरकार की ओर से तबादले का आधिकारिक कारण अलग से राजनीतिक रूप में नहीं बताया गया है.

यूपी चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश की चर्चा

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह फेरबदल राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राज्य में बड़ी संख्या में दलित मतदाता हैं और कई विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव चुनावी परिणामों को प्रभावित करता है. ऐसे में अविनाश पांडेय की शंटिंग को दलित समाज की नाराजगी कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. सरकार की रणनीति प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए यह संदेश देने की हो सकती है कि किसी भी समुदाय के साथ कथित दुर्व्यवहार को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा.

नौ आईपीएस अधिकारियों के तबादले से प्रशासनिक बदलाव

योगी सरकार के ताजा फेरबदल में कुल नौ आईपीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं. इनमें अविनाश पांडेय और केके बिश्नोई के तबादले सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. केके बिश्नोई को संभल से हटाकर बिजनौर भेजा गया है, जबकि अविनाश पांडेय को मेरठ की जिम्मेदारी से मुक्त कर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध किया गया. मेरठ के थप्पड़ कांड के बाद हुई यह कार्रवाई अब प्रशासनिक बदलाव के साथ-साथ राजनीतिक संदेश के तौर पर भी चर्चा में है.

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नटवर कुमार

लेखक के बारे में

By नटवर कुमार

नटवर कुमार पत्रकारिता के क्षेत्र में दो वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले पत्रकार हैं.वे ग्राउंड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते हैं. राजनीतिक घटनाक्रम, स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक गतिविधियों, अपराध, सामाजिक मुद्दों और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि है. उनका प्रयास खबरों को तथ्यात्मक, स्पष्ट और पाठकों के लिए उपयोगी तरीके से प्रस्तुत करना रहता है.नटवर कुमार ने इतिहास में मास्टर ऑफ आर्ट्स (M.A. History) और मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पटना से की है. इतिहास और पत्रकारिता में उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें घटनाओं को व्यापक संदर्भ में समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने में मदद करती है.इस दौरान उन्होंने दूरदर्शन पटना में भी समय दिया है. नटवर कुमार मूल रूप से बिहार के दिनकर की भूमि बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं.

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