Matar ki kheti in UP: सितंबर-अक्टूबर में लगाएं अगेती मटर, 50-65 दिन में तैयार होगी फसल, 1 बीघा में लागत से कमाई तक जानें पूरा हिसाब
सितंबर-अक्टूबर में लगाएं अगेती मटर (AI)
उत्तर प्रदेश के किसान सितंबर के आखिरी सप्ताह से अगेती मटर की खेती शुरू कर सकते हैं. जानें कम समय में तैयार होने वाली किस्मों, बुवाई का सही समय, बीज की मात्रा और कमाई का पूरा गणित.
Matar ki kheti in UP: सितंबर का आखिरी सप्ताह किसानों के लिए अगेती सब्जी मटर की खेती शुरू करने का अच्छा समय हो सकता है. खासकर उत्तर प्रदेश में अगेती मटर की ऐसी किस्में उपलब्ध हैं, जो सामान्य मटर की तुलना में कम समय में तैयार होकर बाजार में पहुंच जाती हैं. रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार कम अवधि वाली मटर की किस्मों की बुवाई सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के मध्य तक की जा सकती है. वहीं ICAR-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने उत्तर प्रदेश के लिए काशी धान्वी जैसी 50 से 65 और 75 दिन में तैयार होने वाली अगेती किस्म विकसित की है.
अगेती मटर में बाजार का फायदा
अगेती मटर की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान सामान्य सीजन से पहले फसल बाजार में ला सकते हैं. इस समय ताजी मटर की आवक सीमित रहने पर किसानों को बेहतर बाजार भाव मिलने की संभावना रहती है. भदोही में भी किसान सितंबर के आखिरी सप्ताह से अगेती मटर की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं. वहां कृषि विशेषज्ञों ने अगेती मटर की बुवाई 25 सितंबर से 25 अक्टूबर के बीच करने की सलाह दी है.
कौन-सी किस्म चुनें बीज
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए काशी नंदिनी, काशी उदय, काशी अगेती और काशी धान्वी जैसी किस्मों पर विचार किया जा सकता है. ICAR-IIVR के मुताबिक काशी धान्वी 65-75 दिन की अतिरिक्त अगेती किस्म है और इसे इस तरह विकसित किया गया है कि दिसंबर की शुरुआत में फसल बाजार में लाई जा सके. संस्थान के अनुसार यह किस्म उत्तर प्रदेश के लिए अनुशंसित है.
मटर की खेती करने का सही समय
उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत में मटर की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. अगेती मटर की खेती के लिए किसान सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के पहले पखवाड़े तक बुवाई कर सकते हैं. वहीं पछेती किस्मों की बुवाई नवंबर तक की जा सकती है. अगेती मटर की बुवाई जल्दी करने से फसल पहले तैयार होती है और बाजार में शुरुआती आवक के दौरान बिक्री का मौका मिलता है. इसलिए किसान अपने क्षेत्र की जलवायु और चुनी गई मटर की किस्म के अनुसार बुवाई का समय तय करें.
1 बीघा में कितना बीज लगेगा
बीज की मात्रा किस्म और स्थानीय खेती पद्धति पर निर्भर करती है. भदोही में अगेती मटर के लिए करीब 40 किलो बीज प्रति बीघा की दर बताई गई है, जबकि वैज्ञानिक स्रोत क्षेत्रफल के हिसाब से अलग-अलग बीज दर बताते हैं, इसलिए किसान अपने जिले के कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार बीज की मात्रा तय करें.
लागत और कमाई का पूरा हिसाब
मटर की खेती में किसान की मुख्य लागत बीज, खेत की तैयारी, खाद, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, कीट-रोग नियंत्रण और तुड़ाई पर आती है. कमाई निकालते समय केवल मंडी में मिलने वाले भाव को आधार नहीं बनाना चाहिए. कुल उत्पादन को उस समय के वास्तविक थोक भाव से गुणा करने के बाद खेती की पूरी लागत घटाने पर ही संभावित शुद्ध आय सामने आएगी. मटर के भाव में मंडी और समय के अनुसार काफी अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय मंडी का ताजा भाव जोड़ना जरूरी है.
काशी तृप्ति में 3-4 बार तुड़ाई
ICAR-IIVR की काशी तृप्ति किस्म 80-85 दिन में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो सकती है. संस्थान के अनुसार इसकी 3-4 बार तुड़ाई की जा सकती है और इसकी औसत उपज क्षमता 95-100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है. इससे किसानों को एक ही बार में पूरी फसल बेचने के बजाय चरणबद्ध तरीके से बाजार में उपज पहुंचाने का विकल्प मिलता है.
बीज उपचार पर दें खास ध्यान
अच्छी फसल के लिए बुवाई से पहले बीज उपचार जरूरी है. रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने मटर को बीज जनित रोगों से बचाने के लिए बीज उपचार की सलाह दी है. विश्वविद्यालय के अनुसार बुवाई से पहले बीज को निर्धारित तरीके से उपचारित करने और उचित पोषण देने से फसल की शुरुआती बढ़वार बेहतर की जा सकती है.
मुनाफे का सही गणित ऐसे समझें
अगर किसान 1 बीघा में अगेती मटर लगाने की योजना बना रहे हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपने क्षेत्र में बीघा के वास्तविक आकार, बीज की कीमत, मजदूरी, सिंचाई और खाद की लागत का हिसाब तैयार करना चाहिए. इसके बाद स्थानीय मंडी में पिछले कुछ दिनों के मटर भाव और संभावित उत्पादन के आधार पर कमाई का अनुमान लगाया जा सकता है. मटर की खेती में कम समय में फसल तैयार होना फायदा देता है, लेकिन वास्तविक मुनाफा उत्पादन, लागत और बाजार भाव पर निर्भर करेगा.
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