यूपी में अब ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की आई शामत, हाईटेक होंगे आरटीओ के प्रवर्तन दस्ते

Published by : Sandeep kumar Updated At : 08 Aug 2023 7:47 AM

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उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन करना अब वाहन स्वामियों को भारी पड़ने वाला है. अगर वाहनों की ओवर स्पीडिंग की या फिर और कोई भी नियम तोड़ा तो अब चालान से बच पाना असंभव हो जाएगा. वजह है कि अब परिवहन विभाग हाईटेक इंटरसेप्टर वाहनों से लैस होने जा रहा है.

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Uttar Pradesh Transport Department: उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग के प्रवर्तन दस्ते जल्द ही हाईटेक हो जाएंगे. आरटीओ (प्रवर्तन), एआरटीओ प्रवर्तन को अब परिवहन विभाग ऐसे नए हाईटेक स्कॉर्पियो इंटरसेप्टर वाहन उपलब्ध कराएगा, जिसमें ऐसी मशीन लगी होगी जो 500 मीटर की दूरी से ओवर स्पीड वाहनों का ऑटोमेटिक चालान कर देगी. ऐसे नए 66 इंटरसेप्टर वाहन परिवहन विभाग के अधिकारियों के लिए आ रहे हैं. इनमें से पहले चरण में 38 स्कॉर्पियो इंटरसेप्टर कार बनकर लगभग तैयार हैं. परिवहन आयुक्त ने बताया कि ‘प्रवर्तन अधिकारियों को इस तरह के इंटरसेप्टर वाहन उपलब्ध कराए जाने से सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन कराना आसान हो सकेगा.

परिवहन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ’38 इंटरसेप्टर वाहन बनकर तैयार हो चुकी हैं. जैसे ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से उद्घाटन के लिए समय मिल जाएगा, इन इंटरसेप्टर कारों को मंडल स्तर पर आरटीओ प्रवर्तन और जिलों पर एआरटीओ प्रवर्तन को सौंप दिया जाएगा. पहले चरण में 38 इंटरसेप्टर वाहन तो दूसरे चरण में 28 इंटरसेप्टर वाहन इंफोर्समेंट ऑफिसर को मिलेंगे. जितने प्रवर्तन अधिकारी शेष रह जाएंगे उन्हें अगले साल यह इंटरसेप्टर वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे.

कई आधुनिक खूबियों से लैस है कार

परिवहन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ‘इंटरसेप्टर कार में कई खासियत होंगी, जिससे अभियान चलाने में अधिकारियों को आसानी होगी. खासियत यह होगी कि इसमें पीछे की सीट पर लेजर स्पीड गन लगाई गई है. हाईटेक कैमरा भी है जो लंबी दूरी से ओवर स्पीड वाहन का चालान करने में सक्षम है. 500 मीटर की दूरी से ही इंटरसेप्टर कार में लगी लेजर स्पीड गन ऑटोमेटिक चालान कर देगी. e-challan होने के बाद तत्काल वाहन स्वामी के पास चालान का मैसेज भी पहुंच जाएगा. इसी में प्रिंटर भी लगा हुआ है.

आग से सुरक्षा के लिए फायर एक्सटिंग्विशर भी वाहन के अंदर लगाया गया है. इसके अलावा पीछे की सीट पर एक ऑपरेटर के बैठने की भी जगह बनाई गई है. आगे की सीटें चेकिंग अधिकारी और स्टाफ के लिए होंगी. कार के बाहरी हिस्से में सड़क सुरक्षा के नियमों के प्रचार प्रसार के लिए स्टिकर लगाए गए हैं और हर तरफ आरटीओ लिखा हुआ रहेगा.

हाईटेक इंटरसेप्टर वाहन से मिलेगा राहत-  ट्रांसपोर्ट कमिश्नर

उत्तर प्रदेश के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर चंद्रभूषण सिंह का कहना है कि ‘सड़क सुरक्षा की दृष्टि से यातायात नियमों का पालन कराना परिवहन विभाग और पुलिस विभाग की जिम्मेदारी है. ऐसे में अब परिवहन विभाग अपने प्रवर्तन अधिकारियों को हाईटेक इंटरसेप्टर वाहन उपलब्ध कराएगा. यह वाहन तमाम खूबियों से लैस होंगे, जिसमें लेजर स्पीड गन लगी होगी, जो 500 मीटर की दूरी से ही चालान करने में सक्षम होगी. पहले चरण में जल्द ही 38 अधिकारियों को यह वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे. उसके बाद 28 अन्य अधिकारियों को अगले चरण में वाहन दिए जाएंगे. रोड सेफ्टी फंड से अगले साल बचे हुए अधिकारियों को भी इंटरसेप्टर कार दी जाएंगी.

ई-बसों का सफर दो से पांच रुपये तक महंगा

प्रदेश में नगर परिवार निदेशालय द्वारा शहरी क्षेत्र में चलाई जाने वाली बसों का किराया बढ़ा दिया गया है. यह किराया 6 महीने में दो बार बढ़ाया गया है, जिसमें 2-5 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. इससे पहले फरवरी में यूपी रोडवेज बसों का किराया बढ़ाया गया था. रोडवेज ने बसों के किराये में लगभग 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी. किराया बढ़ाने का फैसला राज्य परिवहन प्राधिकरण ने लिया था.

जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के नगर परिवहन विभाग में ई-बसों का संचालन किया जाता है. अब इलेक्ट्रिक बसों में AC में सफर करने के लिए यात्रियों को दो से पांच रुपये अतिरिक्त किराया देना पड़ेगा. नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा जनवरी के बाद अगस्त में किराये में बढ़ोतरी कर दी गई है.

अब इतने रुपये करने होंगे खर्च

अब ई बसों में यात्रियों को सफर करने के लिए न्यूनतम 12 रुपये और अधिकतम 55 रुपये खर्च करने पड़ेंगे. ई-बसों में किराया एक किलोमीटर के हिसाब से बढ़ा दिया गया है, जिसमें GST और एक्सीडेंट फंड को दूरी के अनुसार बढ़ाया गया. इसमें GST 50 पैसे और अधिकतम ढाई रुपये वसूले जाएंगे.

उत्तर प्रदेश के सभी 14 शहरों में सिटी बसों का किराया समान करने की वजह से अलग-अलग दूरी के अनुसार किराया बढ़ा है. कहीं कहीं पर सिटी बस और इलेक्ट्रिक बस का किराया अलग अलग होता था, जिसकी वजह से विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी. इसके बाद इलेक्ट्रिक बसों की नई किराया सूची जारी की गई है. क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम ने बताया कि ई-बसों का किराया बढ़ाया जाना प्रस्तावित था, जिसको अब शासन के द्वारा मुहर लगने के बाद बढ़ा दिया गया है.

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