मौत का धमाका अचानक नहीं था? कौशांबी की पटाखा फैक्ट्री का मालिक पहले भी पहुंचा था जेल, फिर भी चलता रहा कारोबार

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लाइसेंस सस्पेंड होने के बाद भी चलता रहा अवैध कारोबार

कौशांबी की पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने 11 परिवारों को तबाह कर दिया. सवाल यह है कि जिस मालिक का लाइसेंस सालों पहले रद्द हो चुका था, उसकी फैक्ट्री में बारूद का कारोबार कैसे जारी रहा?

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Kaushambi Blast: उत्तर प्रदेश के कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में हुआ भीषण विस्फोट 11 परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दे गया. धमाका इतना जबरदस्त था कि पूरी फैक्ट्री मलबे में तब्दील हो गई और आसपास के कई मकान भी इसकी चपेट में आ गए. हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है? जिस फैक्ट्री में सोमवार, 31 अगस्त को विस्फोट हुआ, उसके मालिक नौशाद अली का लाइसेंस करीब दो साल पहले ही सस्पेंड किया जा चुका था. इतना ही नहीं, अवैध विस्फोटक रखने के मामले में उसे गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया था. इसके बावजूद जेल से बाहर आने के बाद उसी इलाके में दोबारा पटाखों और बारूद का कारोबार कैसे चलता रहा, अब जांच का अहम विषय यही है.

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1200 किलो बारूद मिला था, अगले दिन गिरफ्तार हुआ था नौशाद

कौशांबी मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर पिपरी थाना क्षेत्र में मनौरी गांव है. करीब 25 हजार की आबादी वाले इस गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर नई बस्ती भी बस रही है, जहां 8 से 10 मकान बन चुके हैं. इसी इलाके में नौशाद अली ने कई साल पहले पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस लिया था. 8 अक्टूबर 2024 को जांच के दौरान उसके गोदाम से 1200 किलो बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी. इसके अगले ही दिन नौशाद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और उसका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया. अब सवाल है कि जब लाइसेंस पर कार्रवाई हो चुकी थी, तो इसके बाद भी फैक्ट्री परिसर में पटाखों का भंडारण और कारोबार कैसे जारी रहा?

जेल से बाहर आने के बाद फिर शुरू हुआ बारूद का कारोबार

जानकारी के मुताबिक जेल से बाहर आने के बाद नौशाद ने दोबारा पटाखों का कारोबार शुरू कर दिया. इस बार परिवार के अन्य सदस्य भी उसके साथ जुड़ गए. इनमें उसका भाई शकील, बेटा आदिल और परिवार की महिलाएं भी शामिल थीं. इसके बावजूद पटाखों का भंडारण जारी रहा. सोमवार को हुए धमाके ने इस पूरे कारोबार की भयावह तस्वीर सामने ला दी. कुछ ही सेकेंड में फैक्ट्री जमींदोज हो गई और आसपास के मकानों में रहने वाले परिवारों पर भी कहर टूट पड़ा. हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई.

पुलिस से प्रशासन तक, चार स्तरों पर उठ रहे सवाल

विस्फोट के बाद पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं. पिपरी थाना क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में पटाखे और बारूद जमा होते रहे, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई, यह जांच का विषय है. पिपरी थानाध्यक्ष विकास सिंह पर अपने क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी थी. वहीं सीओ चायल शिवांक सिंह के स्तर पर भी थाना क्षेत्र की निगरानी और कार्रवाई की समीक्षा से जुड़े सवाल सामने आ रहे हैं. यह भी जांच में देखा जाएगा कि पहले अवैध बारूद रखने के मामले में जेल जा चुके व्यक्ति की गतिविधियों पर दोबारा निगरानी की गई थी या नहीं.

तहसील और फायर विभाग की भूमिका भी जांच के घेरे में

प्रशासनिक स्तर पर एसडीएम चायल प्रेरणा गौतम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. जिस जगह गोदाम और फैक्ट्री संचालित हो रही थी, वहां आबादी के बीच पटाखों का कारोबार कैसे चलता रहा और क्या तहसील प्रशासन ने कभी मौके पर जाकर इसकी जांच की, इसका जवाब जांच के बाद सामने आएगा. वहीं पटाखों के कारोबार में अग्निसुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में मुख्य अग्निशमन अधिकारी मंगेश कुमार के विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल हैं. लाइसेंस सस्पेंड होने के बाद क्या फायर विभाग ने मौके का निरीक्षण किया था और क्या अवैध रूप से पटाखे या विस्फोटक जमा किए जाने की जानकारी विभाग तक पहुंची थी, इन बिंदुओं की भी जांच होगी.

2 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी धमाके की आवाज, 500 मीटर तक बिखरा मलबा

कौशांबी पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि धमाके की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी. फैक्ट्री का सामान और मलबा करीब 500 मीटर तक बिखर गया. एक क्षतिग्रस्त मकान का आरसीसी पिलर भी करीब 500 मीटर दूर जाकर गिरा. फैक्ट्री से करीब 200 मीटर दूर स्थित तीन मंजिला मकान की पहली और दूसरी मंजिल की एक तरफ की दीवारें उड़ गईं. आसपास के पांच मकानों का पिछला हिस्सा भी पूरी तरह ढह गया. इतना ही नहीं, करीब 200 मीटर दूर स्थित 33 हजार वोल्ट की बिजली लाइन का टावर भी क्षतिग्रस्त हो गया और बिजली लाइन को नुकसान पहुंचा.

9 घंटे चला रेस्क्यू, 6 लोगों पर FIR; गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित

हादसे के बाद मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए करीब नौ घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. दोपहर 12 बजे शुरू हुआ अभियान रात 9 बजे तक जारी रहा. फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीमों ने मलबा हटाकर लोगों की तलाश की. मौके पर 10 जेसीबी, 11 दमकल की गाड़ियां और 14 एंबुलेंस तैनात की गई थीं. कमिश्नर एम. लोकेश ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता रेस्क्यू ऑपरेशन थी और आवासीय क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री कैसे चल रही थी, इसकी जांच कराई जाएगी. डीएम अमित पाल शर्मा ने भी कहा कि जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. कौशांबी एसपी सत्यनारायण प्रजापति के मुताबिक मामले में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की गई हैं. पुलिस के अनुसार फैक्ट्री अवैध तरीके से चल रही थी और उसका लाइसेंस दो साल पहले ही रद्द किया जा चुका था.

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