चमकदार चना खरीदने से पहले हो जाएं सावधान, जांच में मिला चमड़ा रंगने वाला जहरीला रंग, खाने से लिवर-किडनी को नुकसान
चने को पीला करने के लिए मिलाया जहरीला रंग (AI)
कानपुर में चमकदार भुने चनों में चमड़ा रंगने वाला जहरीला रंग मिलने से हड़कंप मच गया है. 36 टन से अधिक मिलावटी चने को नष्ट कर दिया गया है. जानें इस घातक मिलावट से आपकी सेहत को क्या खतरा है.
Kanpur Roasted Gram Adulteration : बाजार में चमकदार और पीले दिखने वाले भुने चने खरीदने से पहले सावधान हो जाएं. इन चनों को आकर्षक बनाने के लिए कहीं औद्योगिक रंग तो नहीं मिलाया जा रहा, इसकी जांच जरूरी है. कानपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच में भुने चने में औरामाइन डाई की मौजूदगी सामने आई है. यह ऐसा कृत्रिम पीला रंग है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से जूट, कपड़ा और चमड़ा रंगने में किया जाता है. खाद्य पदार्थों में इस रंग का इस्तेमाल प्रतिबंधित है. जांच में मिलावट की पुष्टि होने के बाद न्यायालय के आदेश पर 36,580 किलोग्राम भुना चना नष्ट करा दिया गया. जब्त किए गए माल की अनुमानित कीमत करीब 33.48 लाख रुपये बताई गई है.
सात महीने पहले लिए गए थे नमूने
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 17 दिसंबर 2025 को कानपुर के बिनगवां स्थित बाबा बैजनाथ ट्रेडर्स के गोदाम पर कार्रवाई की थी. टीम को यहां बड़ी मात्रा में भुना चना मिला था. मिलावट की आशंका पर चने के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए और गोदाम को सील कर दिया गया. जांच रिपोर्ट में चने में औरामाइन डाई की मौजूदगी की पुष्टि हुई. इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटी चने को असुरक्षित घोषित कर सीज कर दिया.
चमड़े और कपड़े रंगने में होता है इस्तेमाल
अधिकारियों के अनुसार, औरामाइन डाई एक औद्योगिक सिंथेटिक पीला रंग है. इसका इस्तेमाल जूट, कपड़ा और चमड़ा रंगने जैसे औद्योगिक कामों में किया जाता है. खाद्य पदार्थों में इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होने के कारण प्रतिबंधित है. खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसी आधार पर मिलावटी चने को खाने योग्य नहीं माना और न्यायालय के समक्ष इसके निस्तारण की कार्रवाई शुरू की.
कोर्ट के आदेश के बाद नष्ट हुआ 36 टन से ज्यादा चना
यह मामला एमएम न्यायालय प्रथम में विचाराधीन था. सरकार बनाम महेश कुमार गुप्ता से संबंधित दो वादों में न्यायालय ने 14 जुलाई को सीज सामग्री के निस्तारण का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश के बाद सोमवार को मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई. समिति की निगरानी में भौंती स्थित नगर निगम के डंपिंग यार्ड में अनुबंधित फर्म मेसर्स एनवायरमेंटल टेक्नो आगरा के माध्यम से 36,580 किलोग्राम भुना चना नष्ट कराया गया.
पहले भी सामने आ चुका है मिलावटी रंग का मामला
कानपुर में खाद्य पदार्थों में औद्योगिक रंग के इस्तेमाल का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले खाद्य सुरक्षा विभाग ने पनकी स्थित पीतांबरा इंटरप्राइजेज मसाला फैक्ट्री पर छापा मारा था. यहां चावल में रंग मिलाकर हल्दी तैयार किए जाने का मामला सामने आया था. कार्रवाई के दौरान विभाग ने करीब 5.86 लाख रुपये का मिलावटी स्टॉक जब्त किया था. साथ ही फैक्ट्री का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया था. नमूने जांच के लिए भेजे गए थे.
सेहत के लिए कितना खतरनाक है औरामाइन?
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रो. जेएस कुशवाहा के मुताबिक, औरामाइन युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसके सेवन के बाद उल्टी, दस्त और पेट में तेज दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. शुरुआती स्तर पर एलर्जी और आंखों में जलन जैसी परेशानी भी हो सकती है. वहीं लंबे समय तक ऐसे मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है.
चने की चमक देखकर न करें खरीदारी
खाद्य विशेषज्ञों और अधिकारियों की सलाह है कि भुना चना खरीदते समय केवल उसका रंग और चमक देखकर आकर्षित न हों. जरूरत से ज्यादा चमकीला या असामान्य रूप से पीला दिखाई देने वाला खाद्य पदार्थ मिलावट का संकेत हो सकता है. पैक्ड चना खरीदते समय पैकेट पर FSSAI लाइसेंस, पैकिंग और गुणवत्ता संबंधी जानकारी जरूर जांचें.
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