AI और रोबोट करेंगे अब नालियों की सफाई! प्लास्टिक देखते ही होगा एक्शन, गोरखपुर-दिल्ली के शोधकर्ताओं का कमाल, जानिए कैसे काम करती है ये तकनीक
AI पहचान करेगा प्लास्टिक और रोबोटिक आर्म उठाएगा कचरा (सांकेतिक तस्वीर)
नालियों में प्लास्टिक कचरा अब एक बड़ी समस्या है, लेकिन गोरखपुर और दिल्ली के शोधकर्ताओं ने एक AI-आधारित सिस्टम विकसित किया है. यह सिस्टम पानी में तैरते प्लास्टिक को पहचानकर रोबोटिक आर्म से उठाएगा.
UP News: नालियों में बहता प्लास्टिक अब सिर्फ गंदगी नहीं फैलाएगा, बल्कि तकनीक की नजर से बचना भी मुश्किल होगा. पानी की सतह पर तैरते प्लास्टिक को एआई पहचान लेगा और इसके बाद रोबोटिक आर्म उसे उठाकर कूड़ेदान में डाल देगा. गोरखपुर और दिल्ली के शोधकर्ताओं ने ऐसा एआई आधारित सिस्टम तैयार किया है. परीक्षण के दौरान इस सिस्टम ने प्लास्टिक कचरे की पहचान में 97.4 प्रतिशत सटीकता हासिल की. अब अनुदान मिलने के बाद इसके पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी है.
कैमरा देखेगा, एआई करेगा पहचान
मीडिया रिपोर्ट्स के जानकारी अनुसार मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) और दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी के चार शोधकर्ताओं ने इस सिस्टम को विकसित किया है. टीम में डॉ. अभिषेक वर्मा, दिनेश कुमार विश्वकर्मा, सुमित कुमार और प्रतीक सैनी शामिल हैं. डॉ. अभिषेक वर्मा एमएमएमयूटी के कंप्यूटर साइंस विभाग में सहायक आचार्य हैं. सिस्टम में ट्रांसफॉर्मर और सीएनएन आधारित कंप्यूटर विजन मॉडल, कैमरा और रोबोटिक आर्म को एक साथ जोड़ा गया है.
4,000 से ज्यादा तस्वीरों से हुई ट्रेनिंग
एआई मॉडल को 1,000 से अधिक शहरी और ग्रामीण स्थानों से जुटाई गई 4,000 से ज्यादा वास्तविक प्लास्टिक कचरे की तस्वीरों से प्रशिक्षित किया गया है. विशेषज्ञों ने इन तस्वीरों का सत्यापन भी किया. मॉडल प्लास्टिक की बनावट, चमक, आकार और ज्यामिति के आधार पर उसकी पहचान करता है. इसके बाद वह प्लास्टिक को पत्ते और लकड़ी जैसे जैविक कचरे से अलग कर सकता है. कम रोशनी में सिस्टम की क्षमता बढ़ाने के लिए आईआर या नाइट विजन कैमरे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
एक घंटे में 900 टुकड़े तक उठाने का दावा
शोधकर्ताओं के मुताबिक, सिस्टम एक घंटे में करीब 600 से 900 प्लास्टिक के टुकड़े उठा सकता है. हालांकि, इसकी वास्तविक क्षमता नाली के आकार और इस्तेमाल किए जाने वाले रोबोटिक आर्म पर निर्भर करेगी. सामान्य परिस्थितियों में आर्म एक बार में करीब 500 ग्राम से दो किलोग्राम तक भार उठा सकेगा. मॉड्यूलर फ्रेम की मदद से इसे नालियों पर लगाया जा सकता है. सोलर पैनल बैटरी चार्ज करने में मदद करेंगे. वहीं, आईओटी डैशबोर्ड बिन भरने या सिस्टम में खराबी आने पर अलर्ट देगा.
पहचानो और उठाओ, यही है सिस्टम का फॉर्मूला
इस तकनीक का काम आसान सिद्धांत पर आधारित है—पहचानो और उठाओ. कैमरा नाली के पानी की तस्वीर या वीडियो लेगा. डीप लर्निंग मॉडल उसमें मौजूद प्लास्टिक की पहचान करेगा. इसके बाद प्लास्टिक की स्थिति और पानी में उसकी गहराई के आधार पर रोबोटिक आर्म की दिशा तय होगी. आर्म ग्रिपर की मदद से कचरे को पकड़ेगा और उसे बिन में डाल देगा. शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तकनीक को भारत सरकार से 20 साल की पेटेंट अवधि मिली है. अब अनुदान मिलने के बाद नगर निगम की नालियों में इसके पायलट प्रोजेक्ट की योजना है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए