प्रयागराज TGT-PGT भर्ती में एक्स-सर्विसमैन आरक्षण पर बढ़ा विरोध, नई नियमावली में आरक्षण गायब होने से बढ़ी चिंता

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प्रयागराज TGT-PGT भर्ती में एक्स-सर्विसमैन आरक्षण पर बढ़ा विरोध

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Prayagraj News: प्रयागराज में TGT-PGT भर्ती को लेकर विवाद गहरा गया है. पूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को नई नियमावली से हटाने की आशंका ने अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है. उनका दावा है कि इससे उनके चयन के अवसर बुरी तरह प्रभावित होंगे.

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Prayagraj News: प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी भर्ती को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच अब भूतपूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण हटाने की आशंका का मुद्दा भी उठ गया है. अभ्यर्थियों का आरोप है कि नई नियमावली में आगामी शिक्षक भर्ती के दौरान एक्स-सर्विसमैन को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण शामिल नहीं किया गया है. उनका कहना है कि इससे पूर्व सैनिकों को चयन प्रक्रिया में मिलने वाला अवसर प्रभावित होगा और समय से चली आ रही पुरानी व्यवस्था समाप्त हो सकती है.

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पुरानी व्यवस्था में पांच फीसदी सीटें रहती थीं आरक्षित

पिछली शिक्षक भर्तियों में कुल रिक्तियों का पांच प्रतिशत हिस्सा भूतपूर्व सैनिकों के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित रहने की व्यवस्था रही है. आगामी भर्ती में इस प्रावधान के हटने की आशंका से पूर्व सैनिक चिंतित हैं और इसे अपने अवसरों पर सीधा असर मान रहे हैं. उनका कहना है कि आरक्षण हटने पर सामान्य प्रतिस्पर्धा में चयन की संभावना और कठिन हो सकती है. अभ्यर्थियों की चिंता अब भर्ती प्रक्रिया में अधिकारों और अवसरों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी है.

400 अंक के बाद भी चयन नहीं होने का दावा

पूर्व सैनिक रवींद्र यादव के अनुसार, 2022 की भर्ती में उन्होंने 400 अंक हासिल किए और 100 प्रश्न हल किए थे. इसके बावजूद चयन नहीं हो सका. उन्होंने बीएड की डिग्री भी प्राप्त की है और अगली शिक्षक भर्ती के लिए तैयारी जारी रखना चाहते हैं. लेकिन नई नियमावली में पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण नहीं होने की आशंका उन्हें परेशान कर रही है. उनका मानना है कि आरक्षण व्यवस्था बहाल होने से पूर्व सैनिक अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धा में बेहतर अवसर मिल सकता है.

एनओसी के कारण चयन रद्द होने का आरोप

राकेश कुमार सिंह ने बताया कि 2022 की भर्ती के समय वे सेवानिवृत्ति से महज एक महीने दूर थे. उनके मुताबिक, एनओसी स्वीकार नहीं किए जाने के कारण उनका चयन रद्द हो गया. उन्होंने बताया कि उनका स्कोर 352 अंक था, जबकि संबंधित मेरिट 220 अंक तक पहुंची थी. उनका कहना है कि यदि दस्तावेजी औपचारिकताएं समय पर पूरी होतीं, तो वे चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ सकते थे.नई भर्ती में नियम स्पष्ट होने और अधिकार सुरक्षित रहने की मांग करते हैं.

राजस्थान और हरियाणा में ज्यादा आरक्षण का दावा

अभ्यर्थियों का दावा है कि अन्य राज्यों में भूतपूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण का दायरा अधिक है. उनके अनुसार राजस्थान में 20 प्रतिशत और हरियाणा में 14 प्रतिशत तक आरक्षण दिया जाता है. वहीं उत्तर प्रदेश में पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था रही है, जिसे हटाने का विरोध हो रहा है. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस बदलाव से पूर्व सैनिकों को मिलने वाले अवसर सीमित होंगे और भर्ती प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है. वे तुरंत बहाली चाहते है.

वर्टिकल आरक्षण के भीतर लागू होता है क्षैतिज आरक्षण

क्षैतिज आरक्षण को वर्टिकल आरक्षण के भीतर लागू किया जाता है. इसमें महिलाओं, दिव्यांगों, भूतपूर्व सैनिकों और अन्य विशेष वर्गों को निर्धारित प्रतिनिधित्व मिलता है. उदाहरण के तौर पर महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण होने पर एससी, एसटी, ओबीसी और अनारक्षित श्रेणियों में भी तय अनुपात में महिला अभ्यर्थियों को समायोजित किया जाता है. अभ्यर्थियों की मांग है कि आगामी टीजीटी-पीजीटी भर्ती में एक्स-सर्विसमैन के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान जोड़ा जाए और लागू हो.

अधियाचन में आरक्षण का प्रावधान नहीं होने का दावा

शिक्षा निदेशालय ने यूपीएसईएससी को भेजे गए अधियाचन में टीजीटी और पीजीटी पद शामिल किए हैं, लेकिन क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान दर्ज नहीं किया गया है. इसी वजह से पूर्व सैनिकों के साथ महिलाओं, खिलाड़ियों और अन्य विशेष श्रेणियों के अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. अधिकारियों का तर्क है कि क्षैतिज आरक्षण तभी दिया जाता है जब भर्ती इकाई में रिक्त पदों की संख्या 25 से अधिक हो। ऐसा अधिकारियों ने कहा.

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