अतीक-मुख्तार की ‘वापसी’ से यूपी में क्यों मचा हड़कंप, पोस्टर में अखिलेश यादव का नाम, 2027 चुनाव से पहले बढ़ा सियासी सस्पेंस
2024 में भी उठ चुका है यही मुद्दा
UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पोस्टर वार छिड़ गया है. सपा और अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी के नामों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस सियासी सरगर्मी के पीछे की वजहें जानें.
UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य में सियासी पोस्टर वार तेज हो गया है. लखनऊ समेत कई शहरों में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए गए हैं. इन पोस्टरों में अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ सपा पर आरोप लगाए गए हैं. पोस्टर किस संगठन या व्यक्ति ने लगाए हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
‘आजम, अतीक और मुख्तार’ के नाम से साधा निशाना
कुछ पोस्टरों पर ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ जैसे नारे लिखे गए हैं. वहीं दूसरे पोस्टरों में ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ जैसी राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया गया है. रिपोर्टों के मुताबिक ऐसे पोस्टर लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई इलाकों में दिखाई दिए हैं.
‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ के जरिए क्षेत्रवार हमला
कुछ पोस्टरों में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का नारा देकर अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कई नाम प्रदर्शित किए गए हैं. पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान के अलावा अन्य नेताओं और आपराधिक मामलों में नाम सामने आए लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं. इन पोस्टरों के जरिए सपा के पिछले शासनकाल को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए जा रहे हैं.
2024 में भी उठ चुका है यही मुद्दा
यह पहली बार नहीं है जब आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के नामों के जरिए अखिलेश यादव को घेरा गया हो. अप्रैल 2024 में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी इन तीनों को अखिलेश यादव से जोड़ते हुए सपा पर राजनीतिक हमला किया था. यह उस समय लोकसभा चुनाव के बीच हुई बयानबाजी का हिस्सा था.
अतीक और मुख्तार की मौत, आजम खान जेल में
अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की अप्रैल 2023 में प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मुख्तार अंसारी की मार्च 2024 में बांदा के अस्पताल में मौत हुई थी. वहीं आजम खान कई मामलों में दोषसिद्धि के बाद जेल में रहे हैं. इन पुराने राजनीतिक और आपराधिक विवादों को अब 2027 के चुनावी माहौल में पोस्टरों के जरिए फिर चर्चा में लाया गया है. यह भी देखें: UP Election 2027: 'मंत्री हम ही बनेंगे', चुनाव की तारीख भी नहीं घोषित, मंत्री पद की होड़ में इंद्रजीत सरोज का ये दावा से BJP ने घेरा, VIDEO वायरल
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