नेपाल से यूपी तक मिला सोने का गुप्त रास्ता, 10 किलो सोने ने खोली तस्करी की परतें, कन्नौज पहुंचा 100 किलो सोना और सामने आया पूरा नेटवर्क

Updated:
विज्ञापन

सोना तस्करी में गिरफ्तारी

UP Crime News: कन्नौज में 10 किलो सोने की तस्करी के साथ पकड़े गए तस्करों से पूछताछ में नेपाल से भारत तक फैले एक बड़े सोना तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि मात्र तीन महीनों में करीब 100 किलो सोना छह अलग-अलग खेपों में भारत लाया गया था.

विज्ञापन

UP Crime News: उत्तर प्रदेश के कन्नौज में 10 किलो सोने के साथ पकड़े गए तस्करों से पूछताछ में नेपाल से भारत तक फैले सोना तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया कि महज तीन महीने में करीब 100 किलो सोना छह अलग-अलग खेप में नेपाल से भारत लाया गया. इसके बाद इसे यूपी, दिल्ली समेत दूसरे राज्यों तक पहुंचाया गया. इस पूरे खेल में नए सिम कार्ड, तय डिलीवरी प्वाइंट और कैरियर को हर चक्कर पर लाखों रुपये देने जैसी प्लानिंग का इस्तेमाल किया जाता था.

विज्ञापन

छह खेप में 100 किलो सोने की डिलीवरी

कन्नौज में 10 किलो सोने के साथ पकड़े गए महराजगंज के संदीप जायसवाल और नेपाल के सरोज पंथ से पूछताछ में तस्करी के नेटवर्क की कई परतें सामने आई हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों पिछले तीन महीने में करीब 100 किलो सोना नेपाल से भारत ला चुके थे. यह सोना कुल छह बार में भारत पहुंचाया गया और बाद में यूपी, दिल्ली समेत अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किया गया.

हर डिलीवरी के लिए नया सिम, WhatsApp कॉल से संपर्क

तस्करी करने वाले गिरोह ने संपर्क के लिए भी खास रणनीति बना रखी थी. सोना देने वाला हर बार कैरियर को नया सिम कार्ड देता था. बताया गया कि इन नंबरों का इस्तेमाल सिर्फ सोने की डिलीवरी से जुड़ी बातचीत के लिए किया जाता था. WhatsApp कॉल के जरिए दिल्ली और दूसरे राज्यों में मौजूद लोगों से संपर्क किया जाता और तय ठिकाने पर सोना पहुंचाया जाता था. शुरुआती जांच में फर्जी पहचान पर लिए गए प्री-एक्टिवेटेड सिम के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है.

एक चक्कर के मिलते थे 1 से 2 लाख रुपये

जांच में यह भी पता चला कि इस नेटवर्क में कैरियर की भूमिका निभाने वालों को हर नेपाल यात्रा के बदले 1 से 2 लाख रुपये तक दिए जाते थे. बताया जा रहा है कि गिरोह के तार सर्राफा कारोबारियों से भी जुड़े हो सकते हैं. खाड़ी देशों से सोने की खेप नेपाल पहुंचने के बाद उसे सड़क मार्ग के जरिए भारत लाया जाता था. भारत पहुंचने के बाद सोना अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किया जाता और उससे मिलने वाली रकम नेपाल में मौजूद सप्लायर तक भेजी जाती थी.

चार घंटे का पास, लेकिन नौ घंटे बाद लौटी कार

तस्करी के इस पूरे खेल में एक ब्रेजा कार की आवाजाही ने भी जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार 21 अगस्त को सुबह करीब 9:36 बजे महेशपुर बॉर्डर से नेपाल में दाखिल हुई थी. वाहन के लिए चार घंटे की अवधि का पास बनाया गया था, लेकिन कार करीब साढ़े नौ घंटे बाद शाम सात बजे भारत लौटी. इसी आवाजाही ने जांच को और गंभीर बना दिया. फिलहाल कस्टम विभाग दोनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और सोने के सप्लायर तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है.

Also Read: 'फोटो दिखाएं तो मैं इस्तीफा दूंगा', अयोध्या के मछली भोज विवाद पर अजय राय का पलटवार


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola