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Subrata Roy ने खड़ा किया था करोड़ों का व्यापार, आखिरी वक्त में नहीं मिला पत्नी-बच्चों का साथ, जानें पूरी कहानी

Updated at : 15 Nov 2023 11:49 AM (IST)
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Subrata Roy ने खड़ा किया था करोड़ों का व्यापार, आखिरी वक्त में नहीं मिला पत्नी-बच्चों का साथ, जानें पूरी कहानी

Subrata Roy Death: भारतीय उद्योगपति और सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय की मौत मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने की वजह से 75 साल के उम्र में हो गयी. मगर, दुख की बात ये है कि उनके आखिरी वक्त में उनके पत्नी और बच्चों का भी साथ नहीं मिला.

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Subrata Roy Death: भारतीय उद्योगपति और सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय की मौत मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने की वजह से 75 साल के उम्र में हो गयी. मगर, दुख की बात ये है कि उनके आखिरी वक्त में उनके पत्नी और बच्चों का भी साथ नहीं मिला. सुब्रत रॉय ने देश में खुदरा, रियल एस्टेट और वित्तीय सेवा क्षेत्रों में एक बड़ा व्यापार खड़ा किया था. हालांकि, बाद में वो विवाद का एक बड़ा केंद्र में भी रहे. उन्हें अपने समूह की कंपनियों के संबंध में कई नियामक और कानूनी लड़ाइयों का सामना करना पड़ा, जिन पर बहु-स्तरीय विपणन योजनाएं बनाने के लिए नियमों को दरकिनार करने का आरोप लगाया गया था. सुब्रत रॉय ने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे. उनके अर्श से फर्श तक पहुंचने की कहानी काफी दिलचस्प है.

मुंबई में कराया गया था एडमिट

सहारा की तरफ से जारी बयान के अनुसार, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद रविवार को उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उच्च रक्तचाप, मधुमेह सहित विभिन्न बीमारियों से लंबे समय से जूझ रहे सुब्रत रॉय का दिल का दौरा पड़ने के कारण रात साढ़े 10 बजे निधन हो गया. समूह ने बयान में कहा कि सहारा इंडिया परिवार अत्यंत दुख के साथ हमारे सहारा इंडिया परिवार के प्रबंध कार्यकर्ता और अध्यक्ष माननीय ‘सहाराश्री’ सुब्रत रॉय सहारा के निधन की सूचना दे रहा है. बयान में उन्हें एक प्रेरणादायक नेता और दूरदर्शी बताते हुए कहा गया है, कि उनके निधन से हुई क्षति को संपूर्ण सहारा इंडिया परिवार गहराई से महसूस करेगा. सहाराश्री जी उन सभी के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति, एक संरक्षक और प्रेरणा के स्रोत थे, जिन्हें उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला.

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1978 में हुई थी सहारा इंडिया की स्थापना

सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय का जन्म 10 जून 1948 को बिहार के अररिया के एक बंगाली परिवार में हुआ. उनके पिता का नाम सुधीर चंद्र रॉय और मां का नाम छवि रॉय था. उनके पिता अपने इलाके के सबसे अमीर जमीनदार थे. सुब्रत शुरू से ही, बिजनेस करना चाहते थे. उन्हें 1978 में एक छोटी सी फाइनेंस कंपनी की स्थापना की जो केवल वित्त क्षेत्र में काम करती थी. इसके बाद, सुब्रत रॉय ने अपनी मेहनत और लगन से कंपनी को नयी ऊंचाईयों पर पहुंचाया. उन्होंने कंपनी को सहारा की पहुंच मीडिया, एविएशन, रियल एस्टेट, हॉस्पिटैलिटी जैसे मजबूत सेक्टरों में स्थापित किया. एक वक्त ऐसा था कि सहारा इंडिया भारत में प्राइवेट सेक्टर में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली कंपनी बन गयी. सुब्रत रॉय ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को अपना व्यापार बढ़ाने के लिए मुख्यालय के रुप में चुना. उन्होंने यहां 1990 में सहारा इंडिया परिवार के मुख्यालय की स्थापना की. वो इस दशक के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शामिल थे. उनके कारण लखनऊ में नेताओं और अभिनेताओं की भीड़ लगी रहती थी. अमिताभ बच्चन, सपा के नेता रहे अमर सिंह और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव उनके करीबी लोगों में माने जाते थे.

2008 के बाद कंपनी के आए बुरे दिन

सुब्रत रॉय की सहारा इंडिया परिवार का रियल एस्टेट सेक्टर में व्यापार काफी बड़ा था. कंपनी ने 2008 से 2014 इस सेक्टर में निवेश करने के लिए करीब तीन करोड़ निवेशकों से 24 हजार करोड़ रुपये जुटाए. इस बीच, साल 2009 में सहारा इंडिया ने बाजार से और पैसे जुटाने के लिए आईपीओ लाने की कोशिश की. इसके लिए सेबी के पास आवेदन करके दस्तावेज जमा किया गया. सेबी ने दस्तावेजों की जांच में कई वित्तिय गड़बड़ियां पायी. इसके बाद, सेबी ने 12 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना लगा दिया. सेबी ने बिना आईपीओ के बाजार से पैसा उठाने का आरोप लगाया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा. कोर्ट ने सुब्रत रॉय की मुश्किलें और बढ़ा दी. कोर्ट ने फैसला दिया कि कंपनी 12000 करोड़ रुपये पर 15 फीसदी ब्याज लगाते हुए निवेशकों का 24,000 करोड़ रुपये लौटाये. बाद में, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं मानने के कारण सुब्रत रॉय को फरवरी 2014 में गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद करीब दो साल तक उन्हें जेल में रहना पड़ा.

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Madhuresh Narayan

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By Madhuresh Narayan

Madhuresh Narayan is a contributor at Prabhat Khabar.

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