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गहराया सौ साल पुराने धार्मिक स्थल गिराये जाने का मामला, प्रशासन पर मनमानी का आरोप, धार्मिक संगठनों ने की यह मांग

Updated at : 19 May 2021 2:29 PM (IST)
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गहराया सौ साल पुराने धार्मिक स्थल गिराये जाने का मामला, प्रशासन पर मनमानी का आरोप, धार्मिक संगठनों ने की यह मांग

बाराबंकी में एक सौ साल पुराने धार्मिक स्थल को कथित रूप से ढहाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इसको लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है.

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  • धार्मिक स्थल गिराये जाने के मामले ने पकड़ा तूल

  • विरोध पर उतरे कई धार्मिक संगठन

  • पुनर्निर्माण के साथ कड़ी कार्रवाई की मांग

बाराबंकी में एक सौ साल पुराने धार्मिक स्थल को कथित रूप से ढहाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इसको लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है. बोर्ड की मांग है कि सरकार अधिकारियों पर कार्रवाई करने के साथ साथ धार्मिक स्थल का पुनर्निर्माण करे.

तूल पकड़ रहा है मामलाः गौरतलब है कि जिस धार्मिक स्थल को कथित रूप से गिराये जाने की बात सामने आ रही है, वो करीब सौ साल पुरानी है. वहीं, धार्मिक स्थल से जुड़े लोगों का कहना है कि, बीते दो महीने पहले डीएम की ओर से कागजात मांगे गये थे, जिसको लेकर मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. वहीं, कमेटी का आरोप है कि जवाब दाखिल करने के बाद भी इसे गिरा दिया गया.

नहीं दी गई कोई पूर्व सूचनाः इस मामले में मस्जिद कमेटी का कहना है कि जिला प्रशासन की ओर से कोई भी पूर्व सूचना नहीं दी गई. प्रशासन के इस कदम की एक धर्म विशेष के लोग कड़ी निंदा कर रहे हैं. उनका कहना है कि जल्द से जल्द सरकार इसका फिर से निर्माण करे, और आरोपी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई करे. कमेटी ने सरकार से मांग की है कि वो किसी पूर्व न्यायाधीश से मामले की जांच कराए.

जिला प्रशासन ने दिया तर्कः इधर इस मामले में जिला प्रशासन का कहना है कि सुनवाई का मौका दिए जाने के बाद भी कोई नहीं आया. यहां तक की परिसर में रह रहे लोग नोटिस मिलने के बाद फरार हो गये. जिसके बाद प्रशासन ने परिसर पर कब्जा कर लिया. प्रशासन ने ये भी कहा कि, इलाहाबाद हाईकेर्ट ने बीते दो अप्रैल को मामले को निरस्त कर दिया.

कई संगठनों ने की कड़ी निंदाः उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड समेत कई संगठनों ने इस कदम की घोर आलोचना की है. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी ने इसे प्रशासन की मनमानी बताया है. साथ ही उन्होंने कहा है कि वो प्रशासन की इस मनमानी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं.

भाषा इनपुट के साथ

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Posted by: Pritish Sahay

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