Gyanvapi Masjid Case: ज्ञानवापी मस्जिद मामले में आज अहम दिन, पूजा की मांग को लेकर आएगा कोर्ट का फैसला

Gyanvapi Masjid Case: ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर में मिले कथित शिवलिंग की पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग पर आज फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला आना है. इसके अलावा परिसर में मुसलमानों के प्रवेश पर पाबंदी वाली याचिका की पोषणीयता (सुनवाई करने या नहीं करने) पर भी कोर्ट का फैसला आना है.
Varanasi News: वाराणसी स्थित ज्ञानवापी और श्रृंगार गौरी मामले में आज, 17 नवंबर को फिर से सुनवाई होगी. मामले में आज सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रेक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडे की बेंच सुनवाई करेगी. इससे पहले 14 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले में आज सर्वे के दौरान परिसर में मिले कथित शिवलिंग की पूजा-अर्चना की अनुमति देने और मुसलमानों के प्रवेश पर पाबंदी का आदेश देने का आग्रह करने वाली याचिका की पोषणीयता पर कोर्ट फैसला सुनाएगी.
इस संबंध में जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता सुलभ प्रकाश ने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में फैसला सुनाने के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की है. इस मामले में अपनी सुनवाइयों के दौरान सिविल जज ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका की पोषणीयता पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.
हिंदू पक्ष की ओर से ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में तथाकथित शिवलिंग पाए जाने का दावा किया था. ऐसे में कोर्ट को आज, स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की प्रार्थना की तत्काल शुरुआत की इजाजत, पूरे ज्ञानवापी परिसर को हिंदुओं को सौंपने और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मुसलमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर फैसला सुनाना है.
इससे पहले हुई सुनवाई में ज्ञानवापी में स्थित कथित ‘शिवलिंग’ की कार्बन डेटिंग पर जिला अदालत ने फैसला सुनाया था. जिला जज डॉ अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने शिवलिंग की कार्बन डेटिंग जांच से साफ इनकार कर दिया था. मामले में हिंदू पक्ष की मांग थी कि शिवलिंग की कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक परीक्षण किया जाए. तो वहीं मुस्लिम पक्ष इस मांग पर लगातार आपत्ति जता रहा है, और शिवलिंग को फव्वारा बता रहा है.
दरअसल, पांच हिंदू याचिकाकर्ताओं में से चार ने वाराणसी की स्थानीय अदालत द्वारा आदेशित वीडियोग्राफी सर्वेक्षण के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर पाए गए ‘शिवलिंग’ की कार्बन-डेटिंग की मांग की है. कार्बन डेटिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर पुरातत्व में किसी वस्तु की उम्र को समझने के लिए किया जाता है. ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने कार्बन डेटिंग की याचिका का विरोध किया है. हालांकि, पिछली सुनवाई में कोर्ट ने भी इस तरह की जांच से इनकार कर दिया था.
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By Sohit Kumar
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