मायावती बोलीं- बुरे दिनों मे दलितों को याद करती है कांग्रेस, बिना नाम लिए इस नेता को बता दिया बलि का बकरा

मायावती ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि पार्टी अपने स्वार्थ के लिए बुरे दिनों में दलितों को बलि का बकरा बनाती है, और जब अच्छे दिन आते हैं तो दलित समाज की हमेशा उपेक्षा/तिरस्कार किया जाता है. दरअसल, पूर्व सीएम ने बिना नाम लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बलि का बकरा करार दिया है.
Lucknow News: बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि पार्टी अपने स्वार्थ के लिए बुरे दिनों में दलितों को बलि का बकरा बनाती है, और जब अच्छे दिन आते हैं तो दलित समाज की हमेशा उपेक्षा/तिरस्कार किया जाता है. दरअसल, कांग्रेस में नए अध्यक्ष के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे का चुनाव किया गया है. ऐसे में बिना नाम लिया पूर्व सीएम ने खड़गे को बलि का बकरा करार दिया है.
1. कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि इन्होंने दलितों व उपेक्षितों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर व इनके समाज की हमेशा उपेक्षा/तिरस्कार किया। इस पार्टी को अपने अच्छे दिनों में दलितों की सुरक्षा व सम्मान की याद नहीं आती बल्कि बुरे दिनों में इनको बलि का बकरा बनाते हैं।
— Mayawati (@Mayawati) October 20, 2022
मायावती ने ट्वीट कर लिखा, ‘कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि इन्होंने दलितों व उपेक्षितों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर व इनके समाज की हमेशा उपेक्षा/तिरस्कार किया. इस पार्टी को अपने अच्छे दिनों में दलितों की सुरक्षा व सम्मान की याद नहीं आती बल्कि बुरे दिनों में इनको बलि का बकरा बनाते हैं.
बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने आगे कहा कि, कांग्रेस पार्टी को अपने अच्छे दिनों के लम्बे समय में अधिकांशतः गैर-दलितों को एवं वर्तमान की तरह सत्ता से बाहर बुरे दिनों में दलितों को आगे रखने की याद आती है. क्या यह छलावा व छद्म राजनीति नहीं? लोग पूछते हैं कि क्या यही है कांग्रेस का दलितों के प्रति वास्तविक प्रेम?
दरअसल, मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष बन चुके हैं. इसी के साथ खड़गे कांग्रेस के अध्यक्ष बनने वाले दूसरे दलित नेता बन गए हैं. इससे पहले 1971 में जगजीवन राम कांग्रेस अध्यक्ष बने थे. कर्नाटक से संबंध रखने वाले खड़गे लगातार नौ बार विधायक रह चुके हैं. हालांकि वह 2019 में वह लोकसभा चुनाव हार गए थे. कांग्रेस में आने से पहले वे रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) में शामिल हुए थे.
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By Prabhat Khabar News Desk
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