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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में वसुंधरा राजे सिंधिया नहीं होंगी सीएम का चेहरा, भाजपा ने खींच दिया खाका

Updated at : 01 Apr 2022 1:59 PM (IST)
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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में वसुंधरा राजे सिंधिया नहीं होंगी सीएम का चेहरा, भाजपा ने खींच दिया खाका

वसुंधरा राजे को पार्टी द्वारा सीएम चेहरा घोषित नहीं किए जाने पर इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि चुनाव बाद उन्हें इस पद के लिए चयन कर ही लिया जाए. पार्टी की नई रणनीति के तहत उन्हें केंद्र में लाना है. ऐसे में वसुंधरा के पास पार्टी आलाकमान की बात को स्वीकार करना ही बेहतर विकल्प है.

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जयपुर : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अगले साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए खाका खींच दिया है. पार्टी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भाजपा की वरिष्ठ नेता और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को अगले साल के विधानसभा चुनाव में सीएम पद का चेहरा नहीं बनाया जाएगा. सूत्र बताते हैं कि भाजपा राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को सूबे की राजनीति से बाहर निकालकर केंद्रीय राजनीति और केंद्र सरकार शामिल किया जाएगा. सूत्र यह भी बताते हैं कि अभी हाल के दिनों में वसुंधरा राजे सिंधिया की दिल्ली यात्रा के बाद उन्हें केंद्र सरकार में शामिल किए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं.

खत्म होगी पार्टी की अंतर्कलह

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर मीडिया को बताया कि वसुंधरा राजे को पार्टी द्वारा सीएम चेहरा घोषित नहीं किए जाने पर इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि चुनाव बाद उन्हें इस पद के लिए चयन कर ही लिया जाए. उन्होंने कहा कि पार्टी की नई रणनीति के तहत उन्हें केंद्र में लाना है. ऐसे में वसुंधरा के पास पार्टी आलाकमान की बात को स्वीकार करना ही बेहतर विकल्प है. उन्होंने कहा कि इससे उन्हें राजनीतिक तौर पर दो फायदे मिलेंगे. पहला यह कि भाजपा की राजनीति में उनका स्थान और दूसरा उनके बेटे का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित रहेगा. उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से यह कदम उठाने के पीछे पार्टी में व्याप्त अंतर्कलह को समाप्त करना है.

शनिवार को माधोपुर जाएंगे जेपी नड्डा

बताते चलें कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दो अप्रैल को पार्टी के एसटी मोर्चा की ओर से आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेने सवाई माधोपुर में जाएंगे. भाजपा पूर्वी राजस्थान और उसके क्षेत्र में अच्छा प्रभाव रखने वाले आदिवासी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. राजस्थान में 200 विधानसभा सीटें हैं. 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 100 सीटें जीती थीं. सूत्रों के मुताबिक, भाजपा को लगता है कि राज्य में नेतृत्व बीते चुनाव में बड़ा मुद्दा था और राजस्थान में पार्टी की हार के पीछे यह भी एक बहुत बड़ा कारण था.

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अशोक गहलोत को टक्कर देना भाजपा के लिए चुनौती

सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राजस्थान में सत्तासीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को टक्कर देना भाजपा के लिए कठिन चुनौती है. इसके पीछे अहम कारण यह है कि राज्य में पार्टी का नेतृत्व अशोक गहलोत की रणनीति के मुकाबले कमजोर नजर आती है. ऐसे में, पार्टी आलाकमान 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की राज्य इकाई में बड़ा बदलाव करना चाहती है. इसलिए वह अगले साल के विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री के चेहरे के बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम लड़ने का मन बना रही है.

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