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लॉकडाउन के कारण राजस्थान के इन मंदिरों में 10 महीने से भगवान शिव हैं ‘अकेले’

Updated at : 04 May 2020 7:51 AM (IST)
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लॉकडाउन के कारण राजस्थान के इन मंदिरों में 10 महीने से भगवान शिव हैं ‘अकेले’

rajasthan lockdown : कोटा/बूंदी : कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू किये गये लॉकडाउन के चलते जहां अधिकतर धार्मिक स्थान आम लोगों के लिए बंद हैं. वहीं राजस्थान के हाड़ोती क्षेत्र में भगवान शिव के कई मंदिरों में यह माता पार्वती की ‘गायब’ मूर्तियों की वापसी में भी बाधक बन गया है और इनमें शिवजी ‘अकेले’ हैं.

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कोटा/बूंदी : कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू किये गये लॉकडाउन के चलते जहां अधिकतर धार्मिक स्थान आम लोगों के लिए बंद हैं. वहीं राजस्थान के हाड़ोती क्षेत्र में भगवान शिव के कई मंदिरों में यह माता पार्वती की ‘गायब’ मूर्तियों की वापसी में भी बाधक बन गया है और इनमें शिवजी ‘अकेले’ हैं.

बूंदी जिले के हिंडोली शहर में स्थित रघुनाथ घाट में मंदिर के पुजारी राम बाबू पराशर कहते हैं, ‘इन मूर्तियों को वापस आना चाहिए था. लॉकडाउन के कारण मंदिर में कोई शादी नहीं हुई, इसलिए मूर्ति अब भी गायब है.’

सरकारी स्कूल में शिक्षक राम बाबू पराशर (55) ने बताया कि शताब्दियों पुरानी मान्यता है कि अगर किसी की जल्दी शादी नहीं होती है, तो उसे रात को माता पार्वती की मूर्ति को ‘उठा’ ले जाना चाहिए. उन्होंने बताया, ‘इससे भगवान शिव को अपने जीवनसाथी से अलगाव का अहसास होगा और उसकी जल्द शादी हो जायेगी.’

उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के युवक इस परंपरा का पालन करते हैं और माता पार्वती की प्रतिमा अपने घर ले जाने के बाद वे उनसे प्रार्थना करते हैं कि वह भगवान शिव से उसके लिए योग्य पत्नी का आशीर्वाद पाने में मदद करें.

पुजारी ने कहा, ‘उनकी इच्छा पूरी होने के बाद नवविवाहित जोड़ा माता पार्वती की प्रतिमा के साथ वापस आता है और प्रतिमा को उपयुक्त स्थान पर परंपरा के साथ स्थापित करता है.’ उन्होंने बताया कि और यह सब गुप्त रूप से किया जाता है.

पराशर ने बताया कि गांव के कुछ अज्ञात युवक देवी पार्वती की ढाई फुट लंबी मूर्ति पिछले सावन (जुलाई-अगस्त, 2019) में यहां से ले गये थे. माना जाता है कि मूर्ति 400 से 500 साल पुरानी थी. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सावन पांचवां महीना है, जिस दौरान भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना होती है.

उन्होंने बताया कि 24 मार्च से जारी लॉकडाउन के बाद से न तो विवाहों की और न ही साामाजिक कार्यक्रमों की अनुमति दी गयी है. इसलिए पार्वती की कई मूर्तियां अब भी गायब हैं. पुजारी ने बताया, ‘चूंकि लॉकडाउन के कारण, अक्षय तृतीया के दिन भी कोई विवाह नहीं हो सका है, इसलिए पिछले 10 महीने से भगवान शिव मंदिर में अकेले हैं.’

राजस्थान में अक्षय तृतीया को विवाह के लिए शुभ माना जाता है. पराशर ने कहा, ‘हमने कभी शिकायत दर्ज नहीं करायी, क्योंकि जहां से मूर्ति गायब होती है, कुछ समय बाद उसी स्थान पर दोबारा स्थापित हो जाती है.’

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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