टाइगर बफर जोन खोलने से मध्य प्रदेश का बढ़ा रेवेन्यू, लेकिन बाघों के संरक्षण को लेकर विशेषज्ञ जता रहे चिंता
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 27 Aug 2021 2:25 PM
"ट्रैवल इन बफर" कार्यक्रम के तहत पहली बार मानसून में 80 से अधिक बाघों वाले क्षेत्रों को पर्यटन के लिए खोला गया था.
इस मानसून में पर्यटकों के लिए मध्य प्रदेश में छह बाघ अभयारण्यों के बफर जोन खोलने से राज्य को 26 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है. लेकिन संरक्षण पर इस कदम के प्रभाव के बारे में चिंता जतायी जा रही है. बारिश के मौसम में बाघों के आवास बंद हो जाते हैं. पर्यटन के लिए अपने बफर जोन खोलने के कदम ने वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षण पर राजस्व को प्राथमिकता दी जा रही है.
“ट्रैवल इन बफर” कार्यक्रम के तहत पहली बार मानसून में 80 से अधिक बाघों वाले क्षेत्रों को पर्यटन के लिए खोला गया था. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक अधिकारियों ने कहा कि बांधवगढ़ और कान्हा टाइगर रिजर्व से प्रत्येक को 12-12 लाख रुपये का उच्चतम राजस्व प्राप्त हुआ. बांधवगढ़ रिजर्व 124 बाघों के साथ भारत में सबसे अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में से एक है, जिसमें इसके बफर जोन में कम से कम 45 शामिल हैं. कान्हा के पास 108 बाघ हैं. इनमें 25 इसके बफर जोन में शामिल हैं. 2018 की बाघ गणना के अनुसार, मध्य प्रदेश में 526 बाघ थे.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार ने जोर देकर कहा कि वे बाघ की रक्षा के लिए सभी दिशा-निर्देशों और विनियमों का पालन कर रहे हैं. अगर रिजर्व अधिकारियों को (किसी क्षेत्र में) बाघों की आवाजाही के बारे में कोई सूचना मिलती है… हम वहां पर्यटकों को अनुमति नहीं देते हैं. कुमार ने कहा कि विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों के साथ चर्चा के बाद जोन खोले गये.
भारतीय वन्यजीव संस्थान (देहरादून) के वरिष्ठ बाघ पारिस्थितिकीविद्, वाईवी झाला ने कहा कि अगर इसे विनियमित तरीके से किया जा रहा है तो अवधारणा में कोई समस्या नहीं है. बाघों के संभोग का कोई निश्चित समय नहीं है, और यह कई अध्ययनों में साबित हुआ है. वन विभाग को संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए गतिशील योजना के साथ ऐसा करना चाहिए.
वन्यजीव विशेषज्ञ सुहास कुमार ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने और पैसा कमाने के लिए टाइगर रिजर्व नहीं बनाये गये हैं. उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को शिक्षित करके और उन्हें वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनाकर संरक्षण देना है. राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना, 2017 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि वन्यजीव क्षेत्र में पर्यटन और संरक्षण के बीच संघर्ष है, तो संरक्षण प्रबल होना चाहिए.
Posted By: Amlesh Nandan.
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