आतंक का अंत: TSPC सुप्रीमो ब्रजेश गंझू का वाराणसी में एनकाउंटर, जानें उपमुखिया से उग्रवादी संगठन के प्रमुख तक का सफर

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घटनास्थल पर एटीएस की टीम और बृजेश गंझू. फाईल फोटो | प्रभात खबर

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संगठन TSPC के सुप्रीमो ब्रजेश सिंह गंझू उर्फ़ गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ़ सरकार को यूपी एटीएस ने वाराणसी में मुठभेड़ के बाद मार गिराया. 20 साल से फरार चल रहे इस कुख्यात उग्रवादी पर झारखंड सरकार ने 25 लाख और NIA ने 5 लाख का इनाम रखा था. उसकी जिंदगी का अंत कैसे हुआ, जानें पूरी कहानी.

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रांची/चतरा. संगठन टीएसपीसी (तृतीय प्रस्तुति सम्मेलन कमेटी) के सुप्रीमो ब्रजेश सिंह गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ सरकार उर्फ बृजेश गंझू उर्फ सरदार को यूपी एटीएस ने मार गिराया. रविवार की सुबह पांच बजे यूपी के वाराणसी जिले के रामनगर स्थित लंका मैदान के पास मुठभेड़ हुई. इससे पहले एटीएस को गुप्त सूचना मिली थी कि 30 लाख का इनामी ब्रजेश गंझू वाराणसी में प्रवेश कर लंका मैदान की ओर जाने वाला है. इसके बाद एटीएस की टीम ने मिर्जापुर और सोनभद्र से जुड़े संभावित मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी. इसी दौरान लंका मैदान के पास मोटरसाइकिल पर दो संदिग्ध आते दिखाई पड़े. टीम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो दोनों ने गोलीबारी शुरू कर दी. इस पर एटीएस की टीम ने बचाव में जवाबी कार्रवाई की. जिसमें ब्रजेश गंजू को गोली लगी, जबकि उसका साथी मौके से फरार हो गया. घायल ब्रजेश को इलाज के लिए एटीएस की टीम अस्पताल ले गयी, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

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ब्रजेश पर झारखंड सरकार ने 25 लाख और एनआइए ने पांच लाख रुपये का इनाम रखा था. ब्रजेश गंझू 20 साल फरार चल रहा था. वह झारखंड के चतरा जिला अंतर्गत लवालौंग थाना के लुटु साहावन का रहनेवाला था. उसके खिलाफ उग्रवादी घटना, हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी, आगजनी, लोक सेवकों पर हमला, अवैध हथियार और विस्फोटक रखने समेत 50 से अधिक मामले दर्ज थे. मुठभेड़ के दौरान ब्रजेश का एक साथी भागने में सफल रहा. हालांकि मुठभेड़ में एटीएस के डीएसपी विपिन कुमार राय और मुख्य आरक्षी जितेंद्र कृष्णा घायल हो गये. दोनों ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहन रखा था, जिससे दोनों को ज्यादा क्षति नहीं हुई.

एटीएस ने घटनास्थल से दो पिस्टल, एक कार्बाइन, बड़ी संख्या में कारतूस और एक लाख रुपये नकद बरामद किये हैं. सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू मारे गये उग्रवादी ब्रजेश के बड़े भाई हैं. टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू लंबे समय से भूमिगत रहकर संगठन का संचालन कर रहा था. उसकी गतिविधियां सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आती थीं. झारखंड पुलिस के पास भी उसकी सही तसवीर तक नहीं थी. लेकिन समय-समय पर अलग-अलग नामों से संगठन की ओर से प्रेस विज्ञप्तियां जारी होती रही थीं.

सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में थीं. ब्रजेश के मारे जाने और संगठन के दूसरे प्रमुख चेहरे आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद टीएसपीसी के पुराने नेतृत्व ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है. ब्रजेश के फरार साथी की तलाश में यूपी पुलिस अभियान चला रही है. वहीं, मुठभेड़ में शामिल यूपी एटीएस की टीम को उत्तरप्रदेश के डीजीपी की ओर से दो लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है.


घटनास्थल पर मौजूद एटीएस की टीम | प्रभात खबर
घटनास्थल पर मौजूद एटीएस की टीम | प्रभात खबर

मुठभेड़ नहीं, पकड़ कर मारा गया मेरे भाई को : गणेश गंझू

टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू के मुठभेड़ में मारे जाने पर उनके बड़े भाई और सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू ने यूपी एटीएस के दावे पर सवाल उठाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि ब्रजेश को मुठभेड़ में नहीं मारा गया, बल्कि कहीं और से पकड़ने के बाद दूसरे स्थान पर ले जाकर उसकी हत्या की गयी है. ब्रजेश अक्सर कहा करता था कि वह बड़े पुलिस अधिकारियों के संपर्क में है और उसे कुछ नहीं होगा. उन्होंने दावा किया कि ब्रजेश को किसी अन्य स्थान से पकड़ा गया और बाद में दूसरे स्थान पर ले जाकर मारा गया.

2010 में निर्विरोध उपमुखिया बना था ब्रजेश गंझू

वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में लावालौंग प्रखंड की राजनीति में टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू का का प्रभाव चर्चा में रहा था. स्थानीय लोगों के अनुसार उस समय एक पंचायत को छोड़कर प्रखंड की अधिकांश पंचायतों में मुखिया, पंचायत समिति सदस्य व जिला परिषद सदस्य के पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ था. इसी पंचायत चुनाव में ब्रजेश गंझू भी निर्विरोध वार्ड सदस्य चुना गया था. बाद में वार्ड सदस्यों की सहमति से उसे उपमुखिया बनाया गया था. उस दौर में पंचायत चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में निर्विरोध निर्वाचन को क्षेत्र में ब्रजेश के प्रभाव से जोड़कर देखा गया था. वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में ब्रजेश गंझू पंचायत समिति सदस्य के रूप में निर्वाचित हुआ था. चुनाव जीतने के बाद एनआइए और पुलिस ने उसके खिलाफ मामलों की जांच की. कार्रवाई के बाद उसकी पंचायत समिति सदस्य की सदस्यता रद्द कर दी गयी थी.


घटनास्थल पर मिली बंदूक | प्रभात खबर
घटनास्थल पर मिली बंदूक | प्रभात खबर

भाई के विधायक बनने में निभायी थी अहम भूमिका

वर्ष 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में ब्रजेश गंझू के बड़े भाई गणेश गंझू ने सिमरिया सीट से झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) के टिकट पर चुनाव लड़ा था. चुनाव के दौरान ब्रजेश गंझू ने अपने भाई के पक्ष में क्षेत्र में घूम-घूमकर लोगों से वोट मांगा था. उस चुनाव में गणेश गंझू ने भाजपा प्रत्याशी सुजीत भारती को हराकर जीत दर्ज की थी.

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