सारंगपोसी में 36 घंटे जाम के बाद फिर फंसे हाइवा और ट्रेलर, 15 किमी घूमकर जा रहीं बसें..

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गढ्ढे पर फंसे ट्रेलर

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राजनगर-सरायकेला मुख्य मार्ग पर सारंगपोसी के समीप सड़क के गड्ढे अब वाहन चालकों के लिए परेशानी बन गये हैं. 36 घंटे बाद मार्ग पर आवागमन सुचारू हुआ जो कुछ देर बाद दोबारा बाधित हो गया.

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राजनगर: राजनगर-सरायकेला मुख्य मार्ग पर सारंगपोसी गांव के समीप सड़क के गड्ढे अब वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बन गये हैं. यहां भारी वाहनों के फंसने का सिलसिला थम नहीं रहा है.

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करीब 36 घंटे की मशक्कत के बाद सोमवार शाम छह बजे फंसे हाइवा और पलटे ट्रेलर को हटाकर आवागमन बहाल करने का प्रयास किया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद एक मालवाहक ट्रेलर फिर उसी गड्ढे में फंस गया. उसके बगल से हाइवा निकालने की कोशिश में हाइवा भी गड्ढे में फंस गया. इससे मुख्य मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही दोबारा ठप हो गयी.

जेसीबी से भी नहीं निकला हाइवा, कई वाहन फंसे

फोटो कैप्शन (१) गढ्ढे पर फंसे ट्रेलर  फोटो कैप्शन (२) फंसे वाहन को निकलने का प्रयास करते जीसीबी लोडर  फोटो कैप्शन (३) सड़क पर बने गड्ढे जिसमें पानी भरा हुआ | Prabhat Khabar Network
फंसे वाहन को निकलने का प्रयास करते जीसीबी

मंगलवार सुबह करीब 10 बजे जेसीबी (लोडर) की मदद से हाइवा को निकालने का प्रयास किया गया. इस दौरान हाइवा फंसे ट्रेलर की बॉडी से सट गया, जिससे उसे बाहर नहीं निकाला जा सका. मार्ग पर अब भी कई भारी वाहन फंसे हुए हैं. इससे वाहन चालकों के साथ राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

बसों ने बदला रूट, 15 किमी बढ़ी दूरी

सड़क जाम जैसी स्थिति के कारण कई वाहनों ने अपना निर्धारित रास्ता बदल दिया है. सरायकेला से बहलदा (ओडिशा) जाने वाली मिंज बस और झोराडीह से सरायकेला आने वाली खुशी बस को टांगरानी होकर चलना पड़ रहा है. इससे दोनों बसें करीब 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर रही हैं. यात्रियों को अतिरिक्त समय और परेशानी झेलनी पड़ रही है.

एक किमी में छह बड़े गड्ढे, मरम्मत के बाद फिर बिगड़ी सड़क

फोटो कैप्शन (१) गढ्ढे पर फंसे ट्रेलर  फोटो कैप्शन (२) फंसे वाहन को निकलने का प्रयास करते जीसीबी लोडर  फोटो कैप्शन (३) सड़क पर बने गड्ढे जिसमें पानी भरा हुआ | Prabhat Khabar Network
सड़क पर बने गड्ढे जिसमें पानी भरा हुआ

नामिबेड़ा और सारंगपोसी के बीच कैनाल से मंझला दावना तक करीब एक किलोमीटर के हिस्से में छह बड़े गड्ढे हैं. ग्रामीणों के आंदोलन के बाद पथ निर्माण विभाग ने करीब आठ गड्ढों में जीएसबी डालकर उन्हें भरने का काम किया था. इससे कुछ समय के लिए आवागमन सुगम हुआ, लेकिन भारी वाहनों के लगातार दबाव से सड़क फिर बदहाल हो गयी.

सैकड़ों भारी वाहनों का दबाव, दिनभर उड़ती है धूल

ग्रामीणों के अनुसार मुख्य मार्ग से रोज सैकड़ों भारी वाहन गुजरते हैं. लगातार दबाव के कारण सड़क तेजी से टूट रही है. सुनील मार्डी ने कहा कि सड़क से दिनभर धूल उड़ती है, जिससे आसपास के घरों में रखे सामान तक खराब हो रहे हैं. उन्होंने टिकाऊ सड़क निर्माण की मांग की है.

कल्वर्ट नहीं बनने से खेतों का पानी सड़क पर

ग्रामीण बाणजू टुडू ने बताया कि सारंगपोसी के पास खेतों का पानी सड़क पर बहता है. निर्माण के समय ही जल निकासी के लिए कल्वर्ट की मांग की गयी थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया. ग्रामीणों के अनुसार पिछले सात वर्षों में करीब 23 किलोमीटर सड़क की दो बार मरम्मत व चौड़ीकरण हुआ, लेकिन सड़क फिर खराब हो गयी. उनका कहना है कि जल निकासी की समस्या दूर नहीं होने और भारी वाहनों के बढ़ते दबाव से सड़क की हालत लगातार बिगड़ रही है.

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