बारिश में जब आस्था बनती है विषधर से बचाव की ढाल, सांप-बिच्छू के बढ़ते खतरे के बीच मां मनसा की हो रही आराधना

Updated:
विज्ञापन

मां मनसा की प्रतिमा.

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

बरसात के मौसम में सांप-बिच्छुओं के बढ़ते खतरे के बीच खरसावां-कुचाई के ग्रामीण मां मनसा की पूजा करते हैं. यह पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ गहरे रिश्ते और लोकविश्वास की अभिव्यक्ति है.

विज्ञापन

खरसावां : सावन-भादो की बारिश के साथ खेतों में धान की हरियाली उतरती है. मिट्टी में नमी बढ़ती है और गांव की पगडंडियों, झाड़ियों, खेतों तथा घरों के आसपास सांप-बिच्छुओं की आवाजाही भी बढ़ जाती है. ऐसे मौसम में खरसावां-कुचाई के ग्रामीण इलाकों में मां मनसा की पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहती, बल्कि सदियों पुराने लोकविश्वास और प्रकृति के साथ ग्रामीण जीवन के रिश्ते की अभिव्यक्ति बन जाती है.

विज्ञापन

ये है मान्यता

ग्रामीणों की मान्यता है कि मां मनसा की पूजा करने से सांप-बिच्छू और विषैले जीवों के प्रकोप से परिवार की रक्षा होती है. इसी विश्वास के साथ ग्रामीण मां से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छी फसल की कामना करते हैं. खेतों में दिन-रात काम करने वाले किसान और जंगल-पहाड़ से जुड़े ग्रामीणों के लिए इस पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. मां मनसा की पूजा साधारणतः तीन चरणों में होती है. पहला चरण 17 अगस्त, दूसरा चरण 17 सितंबर और तीसरा और अंतिम चरण 17 अक्टूबर को होता है. सरायकेला खरसावां जिले में दूसरे चरण के मनसा पूजा की धूम मची है.

पूजा में दिखती है गांव की सामूहिक आस्था

मनसा पूजा के अवसर पर गांवों में अलग ही रौनक दिखाई देती है. कहीं घरों में पूजा-अर्चना होती है, तो कहीं सामूहिक रूप से मां मनसा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है. महिलाएं पारंपरिक तरीके से पूजा की तैयारी करती हैं. बच्चे और युवा भी आयोजन में शामिल होते हैं. पूजा स्थल पर धार्मिक अनुष्ठान के साथ लोकगीत और पारंपरिक रीति-रिवाजों की झलक मिलती है.

गांव के सामाजिक जीवन को जोड़ती है पूजा

सरायकेला खरसावां क्षेत्र में मनसा पूजा की परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है. यह गांव के सामाजिक जीवन को भी जोड़ती है. पूजा के दौरान परिवार और पड़ोसी एक साथ जुटते हैं. बुजुर्ग नई पीढ़ी को पूजा की परंपरा और उससे जुड़ी लोककथाएं बताते हैं. इस तरह धार्मिक आस्था के साथ लोक-संस्कृति भी अगली पीढ़ी तक पहुंचती रहती है.

विष से रक्षा करती हैं मां मनसा

लोकविश्वास में मां मनसा को सर्पों और विष से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है. बारिश में जब विषधर जीवों का खतरा बढ़ता है, तब ग्रामीण विशेष श्रद्धा के साथ मां की पूजा करते हैं. मान्यता है कि उनकी कृपा से सर्पदंश और विषैले जीवों से परिवार सुरक्षित रहता है.

प्रकृति से जुड़ी है पूजा की परंपरा

मनसा पूजा का एक महत्वपूर्ण पक्ष प्रकृति से ग्रामीणों का संबंध भी है. सांप और दूसरे जीव खेतों, जंगलों और जलस्रोतों के आसपास के पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा हैं. हालांकि लोकविश्वास में उनसे बचाव की कामना की जाती है, वहीं पूजा ग्रामीण समाज की उस परंपरा को भी दर्शाती है, जिसमें प्रकृति की शक्तियों को देवी-देवताओं के रूप में सम्मान दिया जाता रहा है.

आस्था से आगे, संस्कृति की विरासत

सरायकेला खरसावां में मनसा पूजा आज भी ग्रामीण संस्कृति की जीवंत कड़ी है. बदलते समय, आधुनिकता और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद पूजा की परंपरा कायम है. मां मनसा के प्रति श्रद्धा में जहां सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना जुड़ी है, वहीं इसके साथ गांव की सामूहिकता, लोकगीत, रीति-रिवाज और पीढ़ियों की स्मृतियां भी जुड़ी हैं. यही वजह है कि बरसात की बूंदों के बीच होने वाली मनसा पूजा ग्रामीण जीवन में सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और लोकसंस्कृति के बीच बने उस रिश्ते की कहानी है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है.

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola