दीपिका कुमारी ने भी यहीं से सीखी तीरंदाजी, खरसावां के इस मैदान से निकले 28 अंतरराष्ट्रीय व 100 राष्ट्रीय चैंपियन...

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निशाना साधते तीरंदाज

खरसावां का दामादिरी मैदान तीरंदाजों के लिए वरदान है. यहा से निकले 28 अंतरराष्ट्रीय और 100 से अधिक राष्ट्रीय खिलाड़ी, खेल कोटा से 58 को मिली नौकरी.

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खरसावां: सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां प्रखंड स्थित हरिभंजा पंचायत का दामादिरी मैदान आज देश-दुनिया के तीरंदाजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. तीरंदाजी की दुनिया में इस मैदान की पहचान अब ‘आर्चरी की नर्सरी’ के रूप में पुख्ता हो चुकी है.

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इस ग्रामीण मैदान ने अपनी बदौलत जिले को कई ऐसे प्रतिभावान तीरंदाज दिए हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में देश का मान बढ़ाया है. पद्मश्री एवं अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित देश की शीर्ष तीरंदाज दीपिका कुमारी ने भी अपने करियर का पहला पाठ इसी ऐतिहासिक मैदान से सीखा था.

28 अंतरराष्ट्रीय व 100 राष्ट्रीय तीरंदाजों की जन्मस्थली

तींरदाजी का टेरगेट | Prabhat Khabar Network
तींरदाजी का टेरगेट

दामादिरी मैदान की मिट्टी में कुछ ऐसा हुनर है कि यहां अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. इस मैदान ने अब तक 28 अंतरराष्ट्रीय और 100 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्ट तीरंदाज तैयार किए हैं.

यहां के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने सटीक निशानों से सरायकेला-खरसावां के साथ-साथ पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है. गोरा हो, पलटन हांसदा, मंगल हो, बबन कुमार, आश्रीता केरकेट्टा, लक्ष्मी रानी माझी और संजय स्वांसी समेत कई नामचीन खिलाड़ियों ने इसी मैदान से निकलकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है.

खेल के साथ खुल रहे रोजगार के सुनहरे द्वार

तीरंदाजी में सफलता के साथ-साथ अब ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलने लगे हैं. खेल और हुनर के दम पर जिले के कई खिलाड़ियों को खेल कोटे के माध्यम से सरकारी और प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संस्थानों में नौकरियां मिली हैं.

अब तक जिले के करीब 58 तीरंदाजों को देश के अलग-अलग महकमों में रोजगार मिल चुका है. इस वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा के चलते ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं और बच्चों में तीरंदाजी के प्रति भारी उत्साह देखा जा रहा है.

चार बार हो चुकी है राष्ट्रीय प्रतियोगिता

इस क्षेत्र में तीरंदाजी के बढ़ते क्रेज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में अब तक चार बार राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन हो चुका है. इससे यहां एक मजबूत खेल संस्कृति विकसित हुई है.

जिला तीरंदाजी संघ की अध्यक्ष मीरा मुंडा के नेतृत्व और सचिव सुमंत मोहंती के मार्गदर्शन में प्रतिभाओं को निखारने का अभियान लगातार जारी है. संघ का मानना है कि क्षेत्र में पारंपरिक रूप से प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच और तराशने की जरूरत है, जिसे दामादिरी मैदान बखूबी पूरा कर रहा है.


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