दो हफ्ते में तीन बार बदला जाति-निवास प्रमाण पत्र का फॉर्मेट, उधवा अंचल में आवेदकों का बढ़ा सिरदर्द
अंचल कार्यालय में जाति - निवास बनवाने में जुटे भीड़ | Prabhat Khabar Network
उधवा अंचल में जाति और आवासीय प्रमाण पत्र के फॉर्मेट में लगातार बदलाव से आवेदकों में भारी आक्रोश है. पिछले दो हफ्तों में तीन बार फॉर्मेट बदलने से लोगों को सरकारी प्रमाण पत्र बनवाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं. अब 'सभी कार्य हेतु मान्य' लिखा जा रहा है, लेकिन लोगों को अभी भी चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
उधवा : उधवा अंचल कार्यालय में जाति और आवासीय प्रमाण पत्र के फॉर्मेट में लगातार बदलाव से आवेदकों में आक्रोश का माहौल है. पिछले दो सप्ताह के भीतर तीन बार फॉर्मेट में परिवर्तन कर दिया गया है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
हजारों ऑनलाइन आवेदन लंबित
जानकारी के अनुसार पिछले दिनों से अंचल मुख्यालय में जाति-निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए हजारों ऑनलाइन आवेदन लंबित पड़े हैं. अंचल प्रशासन ने स्टाफ की कमी अथवा समय की कमी के कारण उक्त हजारों आवेदनों का समय पर निष्पादन नहीं किया गया. इसके बाद विभागीय मंत्री के आदेश के बाद अंचल में ऑफलाइन जाति-निवास प्रमाण पत्र बनना शुरू हुआ तो रोजाना प्रखंड मुख्यालय में सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटने लगी. स्थिति ऐसी है कि अंचल कार्यालय में तिल रखने की जगह नहीं है.
‘केवल एसआईआर हेतु मान्य’ लिखने से बढ़ा विवाद
इधर अंचल प्रशासन ने ऑफलाइन जाति एवं निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदकों से मुखिया के लेटर हेड और वार्ड सदस्य द्वारा प्रमाणित दस्तावेज मांगना शुरू किया. सबसे बड़ी गड़बड़ी तब हुई, जब निर्गत किए गए जाति एवं निवास प्रमाण पत्र के ऊपर अंचल कार्यालय द्वारा ‘केवल एसआईआर हेतु मान्य’ लिख दिया गया.
सैकड़ों प्रमाण पत्रों पर दर्ज हुआ था उल्लेख
नियमानुसार जाति-निवास प्रमाण पत्र सभी सरकारी कार्यों के लिए मान्य होता है, किसी एक कार्य के लिए सीमित नहीं किया जा सकता. लेकिन उधवा में सैकड़ों प्रमाण पत्रों पर यही लिखकर दे दिया गया. सूत्रों की मानें तो मामले का खुलासा होने के बाद वरीय पदाधिकारियों ने इस पर संज्ञान लिया और इसे बदलने का निर्देश दिया.
अब ‘सभी कार्य हेतु मान्य’ लिखा जा रहा
वरीय पदाधिकारी के निर्देश के बाद सोमवार से अंचल कार्यालय ने फिर से फॉर्मेट चेंज कर दिया है. अब नए फॉर्मेट में प्रमाण पत्र पर ‘सभी कार्य हेतु मान्य’ लिखा जाने लगा है. इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है. अब आवेदकों को नए फॉर्मेट के साथ जाति-निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
वरीय पदाधिकारी के निर्देश पर बदला फॉर्मेट
इस संबंध में सीओ, उधवा आशीष कुमार ने कहा, "वरीय पदाधिकारी के निर्देशानुसार फॉर्मेट चेंज किया गया है."
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