14 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे निलंबित IAS विनय चौबे, हजारीबाग वन भूमि घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

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विनय कुमार चौबे की फाइल फोटो

विनय कुमार चौबे की फाइल फोटो

झारखंड के निलंबित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हजारीबाग वन भूमि घोटाले में 14 महीने से जेल में बंद विनय चौबे की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर ली है. इससे उनके जेल से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त हो गया है.

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रांची : झारखंड के चर्चित और निलंबित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है. पिछले 14 महीनों से सलाखों के पीछे बंद विनय चौबे के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली ने हजारीबाग वन भूमि घोटाले से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए उनकी जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है और रिहाई का आदेश जारी किया है. इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (क्रिमिनल) दायर कर न्याय की गुहार लगाई थी. हालांकि, शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को यह छूट भी दी है कि यदि वे चाहें तो जमानत रद्द कराने के लिए दोबारा कानूनी प्रक्रिया के तहत कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती हैं.

20 मई 2025 को हुई थी गिरफ्तारी

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 20 मई 2025 को गिरफ्तार किया था. तब से वे विभिन्न मामलों में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद थे. हजारीबाग वन भूमि घोटाले में दर्ज प्राथमिकी (11/2025) के तहत वे नवंबर 2025 से जेल में थे. सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद अब 14 महीने बाद उनके जेल से बाहर आने की पूरी संभावना है.

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चार प्रमुख मामलों में मिल चुकी है बेल

आईएएस विनय कुमार चौबे के अधिवक्ता देवेश अजमानी के अनुसार, उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से कुल चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे. इसमें हजारीबाग वन भूमि घोटाला भी शामिल है. इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. इसके अलावा जमीन ट्रांसफर मामला, आय से अधिक संपत्ति मामला, शराब घोटाला मामले में भी अदालत से डिफॉल्ट बेल प्राप्त हो चुकी है. उनके खिलाफ जगन्नाथपुर थाने में भी एक मामला दर्ज है, लेकिन इस केस में पुलिस ने उन्हें रिमांड पर नहीं लिया था. सभी लंबित मामलों में जमानत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उनकी रिहाई का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो चुका है.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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