झारखंड के विकास के लिए खनिजों का स्थानीय स्तर पर हो मूल्य संवर्धन, शिक्षा को मिले प्राथमिकता
सामाजिक-आर्थिक एवं संसदीय अध्ययन केन्द्र की परिचर्चा आयोजित | Prabhat Khabar Network
रांची में आयोजित परिचर्चा में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य के विकास का मूल्यांकन केवल बजट के आकार से नहीं बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव से होना चाहिए।
रांची. प्रेस क्लब सभागार में शुक्रवार को सामाजिक-आर्थिक एवं संसदीय अध्ययन केंद्र की ओर से ‘झारखंड: समग्र विकास के लिए संसाधन’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गयी. इसमें राज्य के आर्थिक विकास, प्राकृतिक संसाधनों, राजस्व क्षमता, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध और स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई. इस अवसर पर ‘झारखंड: संसाधन अभिवृद्धि की अनिवार्यता’ स्मारिका का विमोचन भी किया गया.
बजट के आकार से नहीं, सामाजिक प्रभाव से हो विकास का आकलन
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य का बजट शुरुआती वर्षों में करीब 6,000 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो आज काफी बढ़ चुका है. हालांकि, आर्थिक विकास का आकलन केवल बजट के आकार से नहीं, बल्कि उसके सामाजिक प्रभाव से किया जाना चाहिए. उन्होंने मानव विकास, शिक्षा और रोजगार को आर्थिक विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने पर जोर दिया.
खनिजों का स्थानीय स्तर पर हो मूल्य संवर्धन
पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ महेश पोद्दार ने कहा कि झारखंड की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत उसके खनिज संसाधन हैं. लेकिन केवल खनन आधारित अर्थव्यवस्था से राज्य की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं किया जा सकता. खनिजों का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन, तकनीकी क्षमता बढ़ाने, बाजार विस्तार और रोजगार सृजन पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा.
शिक्षा को विकास की प्राथमिकता बनाने पर जोर
अर्थशास्त्री डॉ हरिश्वर दयाल ने कहा कि वित्तीय हस्तांतरण के माध्यम से झारखंड को लाभ मिला है, लेकिन राज्य की प्रति व्यक्ति आय अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी कम है. उन्होंने शिक्षा को राज्य के विकास की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल करने की जरूरत बतायी. साथ ही स्थानीय निकायों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने और स्थानीय स्तर पर कर व गैर-कर राजस्व बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
कार्यक्रम का संचालन डॉ कमल बोस ने किया, जबकि विषय प्रवेश संस्था के सचिव अयोध्या नाथ मिश्रा ने कराया. मौके पर डॉ एचपी नारायण, प्रोफेसर डॉ चंद्रकांत शुक्ला, प्रोफेसर शिव शंकर प्रसाद, शिव शंकर उरांव, अरुण कुमार मिश्रा, एसके किड़ों सहित करीब डेढ़ सौ लोग मौजूद थे.
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