बालू-चिप्स के चालान की नयी व्यवस्था पर उठे सवाल, हजारों संवेदकों के बिल अटकने का दावा
झारखंड में बालू-चिप्स के नए चालान नियम से हजारों संवेदकों के बिल अटके हैं. निर्माण कार्य प्रभावित होने से लोगों की आजीविका पर असर पड़ रहा है. मुख्य सचिव से तत्काल समीक्षा की मांग की गई है.
रांची. झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने बालू, चिप्स और मिट्टी जैसे लघु खनिजों के चालान की अप्रैल से लागू नयी व्यवस्था से उत्पन्न व्यावहारिक कठिनाइयों को लेकर मुख्य सचिव अविनाश कुमार को पत्र लिखा है. उन्होंने नयी व्यवस्था की तत्काल समीक्षा करने और चालान संबंधी कारणों से लंबित वैध संवेदक बिलों का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है.
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि नयी चालान व्यवस्था के कारण राज्य के हजारों संवेदक आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं. इसका असर सड़क, पुल-पुलिया, भवन, विद्यालय, अस्पताल और नाली समेत विभिन्न सरकारी निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य प्रभावित होने से राजमिस्त्री, मजदूर, प्लंबर, बिजली मिस्त्री, छड़ मजदूर, ट्रांसपोर्टर और निर्माण सामग्री से जुड़े छोटे-बड़े कारोबारियों की आजीविका पर भी असर पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि अवैध खनन रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इससे वैध निर्माण कार्य बाधित नहीं होने चाहिए.
लंबित वैध बिलों का भुगतान करने की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि बड़ी संख्या में संवेदकों ने सरकारी योजनाओं के तहत काम पूरा कर दिया है, लेकिन उनके बिल लंबित हैं. केवल चालान संबंधी व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण वैध बिलों का भुगतान अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है. इससे संवेदकों के साथ मजदूरों, ट्रांसपोर्टरों और छोटे व्यवसायियों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.
उन्होंने मुख्य सचिव से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर चालान व्यवस्था की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करने और लंबित वैध बिलों के भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की.
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