झारखंड: समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिलों ने नहीं दिया 37 करोड़ रुपये का जवाब, 105 पर प्राथमिकी दर्ज
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 21 Sep 2022 6:31 AM
समग्र शिक्षा अभियान के 37 करोड़ रुपये का हिसाब जिलों ने नहीं दिया. विभाग द्वारा बार बार मौका देने के बाद भी आज तक खर्च की गयी राशि उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं हुआ है. अब ऐसे लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है
रांची: समग्र शिक्षा अभियान के 37 करोड़ रुपये का हिसाब जिलों ने नहीं दिया. शिक्षा विभाग द्वारा बार-बार मौका देने के बाद भी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं किया गया. अब ऐसे लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. राज्य के 14 जिलों में अब तक 105 एफआइआर दर्ज कराया गया है. विभाग ने जिलों से पूछा है कि जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है, उनमें से कितने लोगों को अब तक जेल भेजा गया.
डीइओ और डीएसइ को इसकी समीक्षा करने के लिए कहा गया है. संबंधित जिले के डीसी और एसपी से मिलकर इसकी समीक्षा करने के लिए कहा गया है. जिनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है, उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित कराने को कहा गया है. इस संबंध में जिलों को पूरी रिपोर्ट देने को कहा गया है. जिलों को सर्टिफिकेट केस भी कराने को कहा गया है.
14 जिलों में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. इनमें सबसे अधिक 32 एफआइआर पलामू में कराया गया है, जबकि जामताड़ा में 18 प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. शिक्षा विभाग ने अन्य जिलों में भी जहां अग्रिम राशि का समायोजन नहीं हुआ है, वहां भी एफआइआर दर्ज करने का निर्देश दिया है.
जिलों के द्वारा सबसे अधिक सिविल वर्क के लिए दी गयी राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है. सिविल वर्क के तहत 32.92 करोड़ रुपये का हिसाब जिलों ने नहीं दिया है. इसके अलावा बच्चों की पोशाक के 89 लाख, विद्यालय वार्षिक अनुदान के 1.47 करोड़ व अन्य मद में दिये गये लगभग 2.68 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र जिलों ने नहीं दिया है.
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व विद्यालय के प्रधानाध्यापक राशि की निकासी करते हैं. राशि का हिसाब नहीं देने वाले विद्यालय की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व प्रधानाध्यापक पर प्राथमिक दर्ज करायी गयी है.
शिक्षा विभाग ने जिलों से पूछा : कितने लोगों को अब तक भेजा जेल
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्षों व प्रधानाध्यापकों पर प्राथमिकी
समग्र शिक्षा अभियान के तहत विद्यालयों को अलग-अलग योजना के तहत राशि दी जाती है. सिविल वर्क के तहत भवन निर्माण व मरम्मत के लिए राशि दी जाती है. वार्षिक अनुदान के तहत स्कूलों को प्रति वर्ष राशि दी जाती है. इससे विद्यालयों के रंग-रोगन, शौचालय और पेयजल संबंधित कार्य किये जाते हैं. विद्यालय प्रबंधन समिति को बच्चों की पोशाक के लिए भी राशि दी जाती है. कुछ स्कूलों ने पोशाक की राशि की निकासी तो कर ली पर बच्चों को पोशाक नहीं दिया. मामला उजागर होने पर दोषी लोगों पर विभाग ने प्राथमिकी दर्ज करायी.
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