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रांची मेन रोड हिंसा मामले में जांच कमेटी को नहीं मिला अतिरिक्त समय, CID और पुलिस ने भी नहीं दिया कोई जवाब

Updated at : 18 Oct 2022 9:26 AM (IST)
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रांची मेन रोड हिंसा मामले में जांच कमेटी को नहीं मिला अतिरिक्त समय, CID और पुलिस ने भी नहीं दिया कोई जवाब

रांची मेन रोड हिंसा मामले में सीआइडी और रांची पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया है. इस घटना की जांच के लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमेटी बनायी थी. सरकार द्वारा दी गयी समयवधि समाप्त हो गयी है

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रांची मेन रोड हिंसा मामले में उच्चस्तरीय जांच कमेटी के सवाल और पत्राचार का सीआइडी और रांची पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया है. सरकार के आदेश पर ही संबंधित जांच कमेटी बनी थी. यहां बताते चलें कि राजधानी के मेन रोड (महात्मा गांधी मार्ग) में 10 जून 2022 को हुई हिंसा में गोली लगने से जैप-3 का एक पुलिसकर्मी घायल हो गया था और आरोपी पक्ष के दो लोगों की मौत हो गयी थी. गोलियां किसकी थी और किसने चलायी थी, इसकी जांच उच्चस्तरीय कमेटी कर रही है. कमेटी में एडीजी संजय आनंद लाठकर व सचिव अमिताभ कौशल शामिल हैं. इस मामले में 32 प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.

जांच कमेटी को नहीं मिला अतिरिक्त समय : 

जांच एजेंसियों ने यह कह कर मामला टाल दिया कि फोरेंसिक जांच के लिए गोली एफएसएल भेजी गयी है. उधर, उच्चस्तरीय कमेटी की जांच भी ठप पड़ गयी है. वजह है सरकार द्वारा तीन बार में दी गयी तीन माह व सात दिन की समयावधि का समाप्त होना. कमेटी की ओर से और समय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को 14 सितंबर 2022 को पत्र दिया गया था, लेकिन एक माह बीत जांच के लिए अतिरिक्त समय कमेटी को नहीं मिला है. इससे पूर्व जांच कमेटी रांची पुलिस प्रशासन, आरोपी पक्ष और अन्य लोगों को मिलाकर करीब 200 का बयान कलमबद्ध कर चुकी है. घटनास्थल का भी जायजा ले चुकी है. वीडियो फुटेज को भी खंगाला जा चुका है.

घटना के अहम तथ्य

कुल 18 केस दर्ज किये गये

मामले में 22 नामजद सहित आठ-दस हजार अज्ञात आरोपी

आरोपियों में से दो मो मुद्दसिर व मो साहिल की फायरिंग में घायल होने के बाद हुई मौत

घटना में धनबाद के गोविंदपुर स्थित जैप-3 के जवान अखिलेश यादव के पैर में लगी थी गोली, आठ-दस पुलिसकर्मी हुए थे घायल, फायरिंग, पत्थरबाजी व आगजनी हुई थी

अभी टिप्पणी करना उचित नहीं

मामला अनुसंधान अंर्तगत है, इसलिए इस मामले में अभी इस पर किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं.

किशोर कौशल, एसएसपी, रांची

हाइकोर्ट कर चुकी है सख्त टिप्पणी

झारखंड हाइकोर्ट ने 10 जून को एमजीएम रोड में हुई हिंसक उपद्रव की घटना की जांच के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज पीआइएल पर कई बार सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने माैखिक रूप से कहा था कि जांच के प्रति राज्य सरकार गंभीर प्रतीत नहीं होती है. सीसीटीवी फुटेज की मदद लेकर घटना की जांच की जानी चाहिए थी. जांच की जिम्मेवारी एसआइटी से सीआइडी को दे दी गयी. सरकार ने सीआइडी को जांच की जिम्मेवारी क्यों दी, इसे स्पष्ट नहीं किया गया है.

बताया गया कि घटना को लेकर 32 प्राथमिकी दर्ज की गयी है, लेकिन सिर्फ एक केस को सीआइडी को ट्रांसफर किया गया है. आखिर ऐसा क्यों किया गया. अनुसंधान में सीधे ताैर पर संलग्न एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा व डेली मार्केट थाना के थाना प्रभारी को अनुसंधान के क्रिटिकल समय में स्थानांतरित कर दिया गया अथवा हटा दिया गया. इन तबादलों के पीछे सरकार की मंशा क्या थी. रांची के एसएसपी सुरेंद्र झा व हिंदपीढ़ी थाना प्रभारी को क्यों बदला गया. ज्ञात हो कि प्रार्थी पंकज कुमार यादव ने पीआइएल दायर की है. उन्होंने पूरे मामले की एनआइए से जांच कराने की मांग की है.

रिपोर्ट- प्रणव

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