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राज्यसभा चुनाव में वोट मैनेज करने के मामले की CBI जांच से झारखंड हाइकोर्ट का इनकार

Updated at : 18 Jun 2023 9:13 AM (IST)
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राज्यसभा चुनाव में वोट मैनेज करने के मामले की CBI जांच से झारखंड हाइकोर्ट का इनकार

अदालत ने प्रार्थी के आग्रह को अस्वीकार करते हुए कहा कि मामले की सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है. अदालत राज्य सरकार से अपेक्षा करती है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से तथा त्वरित गति से करायेगी. साथ ही मामले में कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जायेगा.

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रांची. राज्यसभा चुनाव-2016 में वोट मैनेज करने को लेकर जगरन्नाथपुर थाना में तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता व अन्य के खिलाफ दर्ज मामले की सीबीआइ जांच नहीं होगी. मामले की सीबीआइ जांच को लेकर दायर याचिका झारखंड हाइकोर्ट ने खारिज कर दिया. हाइकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने जगरन्नाथपुर थाना में कांड संख्या-154/ 2018 के तहत दर्ज प्राथमिकी को सीबीआई को हैंडओवर करने से इनकार कर दिया. अदालत ने प्रार्थी के आग्रह को अस्वीकार करते हुए कहा कि मामले की सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है. अदालत राज्य सरकार से अपेक्षा करती है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से तथा त्वरित गति से करायेगी. साथ ही मामले में कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जायेगा. इससे पूर्व प्रार्थी के अधिवक्ता विनोद सिंह ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि दर्ज मामले की जांच से वह संतुष्ट नहीं हैं.

‘पुलिस की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं’

पुलिस की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं रह गया है. झारखंड पुलिस वर्ष 2018 से मामले की जांच कर रही है, लेकिन वह आज भी पूरा नहीं हुआ है. मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराएं भी नहीं जोड़ी गयी है. उन्होंने पूरे मामले की जांच सीबीआइ से कराने के लिए आदेश देने का आग्रह किया. वहीं, भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने आयोग के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने मामले को लेकर जगन्नाथपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. इसमें तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता, मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार अजय कुमार को आरोपी बनाया गया था. उन पर तत्कालीन राज्यसभा प्रत्याशी महेश पोद्दार व मुख्तार अब्बास नकवी के पक्ष में वोट करने को लेकर प्रलोभन देने का आरोप लगाया गया है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव ने याचिका दायर कर मामले की जांच सीबीआई से कारेन की मांग की थी.

यह है मामला

वर्ष 2016 में राज्यसभा चुनाव के बाद बाबूलाल मरांडी ने एक ऑडियो टेप जारी किया था. इसमें तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता, विधायक निर्मला देवी, उनके पति योगेंद्र साव के बीच बातचीत की बात सामने आयी थी. इसके बाद पूरे मामले की शिकायत भारत निर्वाचन आयोग से की गयी थी. आयोग ने प्रथम दृष्टया जांच के बाद राज्य सरकार को मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था. गृह विभाग के अवर सचिव अवधेश ठाकुर के बयान पर जगन्नाथपुर थाना में मामला दर्ज करवाया गया. एडीजी अनुराग गुप्ता के निलंबन के बाद राज्य सरकार ने विभागीय कार्रवाई शुरू की थी. बाद में अनुराग गुप्ता को विभागीय जांच में क्लीन चिट दे दी गयी.

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