झारखंड नगर निकाय चुनाव में राजनीतिक दल सक्रिय, मैदान में उतरेंगे पार्टी समर्थित कार्यकर्ता
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 Nov 2022 9:36 AM
नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है. ऐसे में प्रमुख राजनीतिक दल समर्थित कार्यकर्ताओं को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी में जुट गये हैं. पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को परोक्ष रूप से मदद करने की तैयारी की जा रही है.
आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य के प्रमुख राजनीतिक दल सक्रिय हो गये हैं. निर्वाचन आयोग की ओर से दिसंबर के तीसरे सप्ताह में नगर निकाय चुनाव कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. हालांकि अभी तक अधिकारिक रूप से इसकी घोषणा नहीं हुई. नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है. ऐसे में प्रमुख राजनीतिक दल समर्थित कार्यकर्ताओं को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी में जुट गये हैं. पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को परोक्ष रूप से मदद करने की तैयारी की जा रही है. राजनीतिक दलों की ओर से ग्रास रूट स्तर पर संगठन की मजबूत बनाने की कवायद शुरू कर दी गयी है. दलीय आधार पर चुनाव नहीं होने की वजह से चुनाव में दलों के चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक रहेगा.
इधर राजधानी रांची के विभिन्न वार्डों में चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशी अपनी दावेदारी पेश कर दी है. भावी प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ घूम-घूम कर क्षेत्र के लोगों को अपनी भावना से अवगत करा रहे हैं. वार्डों में आरक्षण रोस्टर के बदलाव होने के बाद से राजनीतिक समीकरण बदल गया है. वैसे वार्ड जहां महिला आरक्षण की बाध्यता खत्म हो गयी है. वहां पर पूर्व महिला पार्षद के पति इस बार चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में जुट गये हैं.
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झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी हर चुनाव के लिए तैयार रहती है. नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है. ऐसे में पार्टी प्रत्यक्ष तो नहीं, परोक्ष रूप से पार्टी समर्थित कार्यकर्ताओं को मदद करेगी. पार्टी का प्रयास होगा कि हर वार्ड से एक पार्टी समर्थित उम्मीदवार हो. एक से अधिक उम्मीदवार होने पर सर्वसम्मति बनाने का भी प्रयास किया जायेगा.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि चुनाव को लेकर पहले से ही तैयारी की गयी है. चूंकि चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है. ऐसे में पार्टी वैसे कार्यकर्ताओं को मदद करेगी, जो पिछले एक साल से अधिक समय से पार्टी की हर गतिविधि में शामिल रहे हैं. भारत जोड़ो यात्रा में अहम योगदान देनेवाले कार्यकर्ताओं को आम सहमति बना कर मदद की जायेगी.
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सह सांसद दीपक प्रकाश ने कहा कि पार्टी हर चुनाव को लेकर तैयार रहती है. नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है, लेकिन चुनाव में पार्टी के कार्यकर्ता भी मैदान में उतरेंगे. फिलहाल पार्टी की ओर से जिलों में आक्रोश प्रदर्शन चल रहा है. 24 नवंबर के बाद इसको लेकर ठोस रणनीति बनायी जायेगी. प्रयास होगा कि सर्वसम्मति बना कर पार्टी समर्थित उम्मीदवार उतारा जाये.
आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा है कि झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग की नगर निकाय संबंधी चुनाव अधिसूचना संविधान के भाग 9 ए के अनुच्छेद 243 जेडसी (नगर पालिका) और भाग 10 के अनुच्छेद 244 (अनुसूचित क्षेत्रों और जनजाति क्षेत्रों का प्रशासन) का उल्लंघन करता है. इसलिए इसे झारखंड हाइकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है. आदिवासी सेंगेल अभियान जल्द ही इस पर कार्रवाई कर संविधान और आदिवासी हितों की रक्षा की कोशिश करेगा. अब देखना है कि संविधान और आदिवासी हितों की रक्षार्थ शेड्यूल एरिया में गैर आदिवासी को नगर निगम अध्यक्ष बनाने के खिलाफ कुर्मी महतो मौन रहेंगे या असली आदिवासियों के साथ आवाज बुलंद करेंगे? उन्होंने कहा कि जब भी संसद में अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकाय चुनाव संबंधी संशोधन प्रस्ताव पारित किया जाएगा, तब अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा पंचायत कानून की तरह सभी नगर निकाय अध्यक्ष का पद आदिवासी के लिए आरक्षित होना तय है.
कांके रोड शहरी प्रखंड कांग्रेस कमेटी की बैठक शनिवार को प्रखंड अध्यक्ष अनिल उरांव की अध्यक्षता में हुई. इसमें नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को विजयी बनाने पर चर्चा की गयी. अजय नाथ शाहदेव ने कहा कि वार्ड स्तर पर पार्टी को मजबूत किया जायेगा. कांग्रेस के समर्पित उम्मीदवार को मदद की जायेगी. बैठक में अख्तर अली, निरंजन पासवान, संगीता कच्छप, सुमित्रा उरांव, फहीम खान वेद प्रकाश, आनंद जालान, संगीता तिर्की सूरज मुंडा कृष्णा आदि थे.
केंद्रीय सरना समिति की बैठक अरगोड़ा स्थित कार्यालय में हुई, जिसमें कहा गया कि रांची नगर निगम के मेयर पद को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करना आदिवासी-मूलवासियों को विभाजित करने का राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है. यह जानते हुए भी कि रांची एक आदिवासी बहुल जिला है और यह पांचवीं अनुसूची जिलाें में से एक है. इसके बावजूद राज्य की नौकरशाही ने जानबूझ कर इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया है. रांची शहरी क्षेत्र की लगभग 16 लाख की आबादी में भी अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या अनुसूचित जाति की संख्या से कहीं ज्यादा है. ऐसे में किस आधार पर इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है ? रांची नगर निगम के पूरे 53 वार्ड में सिर्फ 11 सीटों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करना धोखेबाजी है. इसमें जल्द सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन किया जायेगा.
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