रांची सिविल कोर्ट में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत,16 साल बाद हत्या के आरोपी को रिहाई, सुलह के बाद साथ रहने को राजी हुए पति-पत्नी

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पति-पत्नी सुलह करते हुए

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तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में 8.53 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया, जिससे 367.78 करोड़ रुपये का सेटलमेंट हुआ. इस दौरान एक हत्या आरोपी को रिहाई मिली और बिछड़े पति-पत्नी भी एक हुए.

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प्रवीण मुंडा की रिपोर्ट

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रांची. सिविल कोर्ट रांची में शनिवार को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सह कार्यपालक अध्यक्ष झालसा सुजीत नारायण प्रसाद ने इसका वर्चुअल उद्घाटन किया. उद्घाटन सत्र में न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा-1, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय पवन कुमार, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एसवी शर्मा, डालसा सचिव राकेश रोशन समेत सभी अधिकारी उपस्थित थे.

न्यायाधीश अनिल कुमार मिश्रा ने कहा कि आम जनता को त्वरित, आसानी से मिलने वाला और सस्ता न्याय मिले. इसी उद्देश्य से देशभर में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है. इस महाअभियान के तहत आपसी सहमति और समझौते से विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों का मौके पर ही निपटारा किया जा रहा है.

16 साल जेल में काटने के बाद हत्या के आरोपी को मिली रिहाई

हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मोगो कच्छप को लोक अदालत के माध्यम से समय पूर्व रिहा किया गया. उसने करीब 16 वर्ष जेल में सजा काटी. जेल जाने से पहले वह प्लंबर का काम करता था और शायद अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन जीने के सपने देखता होगा. जेल की सलाखों के पीछे उसका हर दिन संघर्षों भरा था.

उसने अपने परिवार को याद किया, अपनी गलती पर पछताया और बाहर की दुनिया को फिर से देखने की उम्मीदें संजोईं. जेल में रहने के दौरान उसे वागवानी का प्रशिक्षण मिला. रिहाई के बाद उसे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया गया.

डालसा काउंसेलर पीएन सिंह ने एक सप्ताह तक उसकी काउंसेलिंग की. श्रम विभाग के सहयोग से उसका जॉब कार्ड बनवाया गया. साथ ही दो लाख रुपये का बीमा कराया गया, कन्यादान योजना से जोड़ा गया तथा एनएलयू रांची के सहयोग से 10 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया.

लोक अदालत में सुलह के बाद फिर साथ रहेंगे पति-पत्नी

वैवाहिक वाद संख्या औएम 504/2025 में भी सुलह हुई. यह मामला अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय राजेश कुमार सिंह की अदालत में लंबित था. इसमें प्रथम पक्ष खुशबू साहू ने अपने पति संजय कुमार के खिलाफ भरण-पोषण के लिए केस किया था.

मध्यस्थता के माध्यम से सुलह होने के बाद दोनों पति-पत्नी राजी-खुशी फिर से एक साथ रहने को तैयार हो गये. खुशबू साहू ने कहा कि लोक अदालत के इस फैसले से उन्हें अपने परिवार को फिर से एक साथ लाने का मौका मिला.

उन्होंने यह संदेश दिया कि जब अपनों के बीच थोड़ी सी भी कड़वाहट आ जाए, तो उसे बातचीत और आपसी समझ से दूर किया जा सकता है. संजय कुमार ने भी अपनी गलती मानी और कहा कि वे अब खुशबू का पूरा ख्याल रखेंगे और दोनों मिलकर एक नया जीवन शुरू करेंगे.

48 हजार से अधिक लंबित मामलों का भी हुआ निपटारा

राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 48 हजार से अधिक लंबित मामलों तथा 8.65 लाख से अधिक प्री-लिटिगेशन मामलों का निपटारा किया गया. इन मामलों के निपटारे से कुल 367 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का समाधान हुआ.

डालसा सचिव राकेश रोशन ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन के लिए न्यायिक दंडाधिकारियों के लिए 38 तथा कार्यपालक दंडाके लिए 20 बेंच का गठन किया गया था.

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