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सात साल बाद भी नहीं हुआ म्यूटेशन, स्मार्ट सिटी की जमीन पर अटका विकास

8 Oct, 2025 12:52 am
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सात साल बाद भी नहीं हुआ म्यूटेशन, स्मार्ट सिटी की जमीन पर अटका विकास

ची स्मार्ट सिटी लिमिटेड को एचइसी से करीब 656 एकड़ जमीन राज्य सरकार द्वारा हस्तांतरित की गयी थी.

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रांची. रांची स्मार्ट सिटी लिमिटेड को एचइसी से करीब 656 एकड़ जमीन राज्य सरकार द्वारा हस्तांतरित की गयी थी. लेकिन सात साल बीतने के बाद भी इस भूमि का नामांतरण (म्यूटेशन) राजस्व अभिलेखों में पूरा नहीं हो सका है. म्यूटेशन नहीं होने की वजह से भूमि का स्वामित्व दस्तावेज स्पष्ट नहीं है. झारखंड बिल्डिंग बाइलॉज के मुताबिक ऐसी स्थिति में नक्शे (बिल्डिंग प्लान) की स्वीकृति नहीं दी जा सकती है. अब तक नक्शों को स्वीकृति नहीं मिलने की वजह से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट केवल कागजों पर ही अटका हुआ है. करोड़ों रुपये लगाकर नीलामी में जमीन हासिल करने वाले निवेशकों के पैसे फंस गये हैं. साथ ही उनका नुकसान रोज बढ़ता जा रहा है. म्यूटेशन नहीं होने की वजह है जमीन का लीज होल्ड होना. एचइसी ने रांची स्मार्ट सिटी को जब जमीन दी, तो उसकी फ्री होल्ड रजिस्ट्री की गयी. लेकिन इससे पहले एचइसी के लिए जो जमीन अधिग्रहित की गयी थी, वह लीज होल्ड है और लीज होल्ड जमीन का म्यूटेशन नहीं होता है. यही कारण है कि एचइसी द्वारा भूमि अधिग्रहण के बाद संबंधित जमीन का म्यूटेशन नहीं कराया गया. हालांकि अब एचइसी ने इस जमीन का स्वामित्व रांची स्मार्ट सिटी को सौंप दिया है. ऐसे में अब नीलामी के बाद जमीन की फ्री होल्ड रजिस्ट्री की जरूरत पड़ी है. इस स्थिति में संबंधित जमीन का पहले एचइसी, फिर नगर विकास विभाग और अंत में रांची स्मार्ट सिटी के नाम पर म्यूटेशन होगा. इसके बाद ही इस पर बने फ्लैट की खरीद-बिक्री हो पायेगी और मामला सुलझ सकता है.

करोड़ों भुगतान के बाद भी निर्माण शुरू नहीं कर पा रहे हैं निवेशक

अब तक स्मार्ट सिटी क्षेत्र में भूमि आवंटन के लिए लगभग 70 एकड़ जमीन कुल 16 निजी निवेशकों और संस्थाओं को दी जा चुकी है. इन निवेशकों ने 99 वर्ष की लीज पर जमीन ली है और शुरुआती भुगतान के रूप में करोड़ों रुपये सरकार को जमा किये हैं. लेकिन म्यूटेशन की देरी और नक्शा पास न होने के कारण वे अब निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं कर पा रहे हैं. इसके अलावा स्मार्ट सिटी परिसर में ही लगभग 60 एकड़ जमीन आइआइएम, रांची, आरबीआइ, नाबार्ड, डीवीसी व सीपीडब्लूडी जैसी संस्थाओं को भी भूमि आरक्षित की गयी है. इनमें से कई को भी अब तक औपचारिक स्वीकृति या म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी है.

1200 करोड़ से ज्यादा का होना है निवेश

स्मार्ट सिटी क्षेत्र में आइटी पार्क, आवासीय व कार्यालय ब्लॉक, मॉल, अस्पताल, स्कूल, विश्वविद्यालय जैसे कई निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं. लेकिन स्वीकृति न मिलने के कारण जमीन आवंटन के बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं हो रहा है. मालूम हो कि रांची स्मार्ट सिटी परियोजना का शिलान्यास 2016 में हुआ था और इसे झारखंड की राजधानी का आधुनिक चेहरा बनाने की दृष्टि से तैयार किया गया है. लगभग 1200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इस योजना में नागरिक सुविधाओं, आवास, आइटी हब और हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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