जेपीएससी की लचर कार्यप्रणाली: 18 साल बाद भी टीआरएल असिस्टेंट प्रोफेसर के इंटरव्यू का रिजल्ट नहीं

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जेपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती: 18 साल बाद भी रिजल्ट नहीं

जेपीएससी ऑफिस. (फाइल फोटो)

जेपीएससी की लचर कार्यप्रणाली के चलते जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (टीआरएल) के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया 18 साल से अटकी हुई है. 2008 में हुए इंटरव्यू का अंतिम परिणाम अब तक जारी नहीं हुआ है, जिससे अभ्यर्थी निराश हैं. सीबीआइ जांच में सामने आई गंभीर गड़बड़ियां भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही हैं.

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JPSC Assistant Professor Recruitment Delay : जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं. वर्ष 2008 में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा (टीआरएल) के तहत मुंडारी समेत अन्य भाषाओं में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए इंटरव्यू लिया गया था. लेकिन 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी इसका अंतिम परिणाम जारी नहीं हो सका है.

आठ साल से इंटरव्यू का इंतजार

अभ्यची आज भी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि किसी भी भती प्रक्रिया का इतने लंबे समय तक लंबित रहना प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. इसी तरह वर्ष 2018 में शुरू हुई असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया के तहत पंचपरगनिया भाषा विषय में आज तक इंटरव्यू भी नहीं हो सका है. आठ साल बाद भी प्रक्रिया प्रारंभिक चरण से आगे नहीं बढ़ी है. अभ्यर्थियों का कहना है कि इस देरी के कारण कई उम्मीदवार अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके हैं, विश्वविद्यालयों में उर्दू, भूगोल समेत कई अन्य विषयों की नियुक्ति प्रक्रिया भी वर्षों से लंबित है.

आयोग ने अपने ही नियम का पालन नहीं किया

सीबीआइ जांच में यह भी सामने आया है कि आयोग ने अपने ही नियमों का पालन नहीं किया. नियम था कि जो अभ्यर्थी पेपर-1 में शामिल नहीं होंगे, उन्हें पेपर-2 और पेपर-3 की परीक्षा में शामिल नहीं किया जायेगा, साथ ही केवल वही अभ्यर्थी पेपर-3 की कॉपियों के मूल्यांकन के पात्र होंगे, जो पेपर-1 और पेपर-2 में न्यूनतम अंक प्राप्त करेंगे, लेकिन आयोग ने ऐसे अभ्यर्थियों की भी पेपर-3 की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया, जो पहले दो पेपर में पास ही नहीं हुए थे. इन सभी बिंदुओं की जांच सीबीआइ कर रही है.

सीबीआइ जांच में सामने आयी गंभीर गड़बड़ी

जेपीएससी द्वारा विवि में असिस्टेंट प्रोफेसर (व्याख्याता) नियुक्ति मामले की सीबीआइ जांच जारी है. जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आयी है. सबसे बड़ा आरोप यह है कि आयोग ने जेट 2006 का परिणाम मेरिट लिस्ट तैयार किये बिना ही जारी कर दिया था. सीबीआइ के अनुसार, इस परीक्षा में 191 अयोग्य अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर दिया गया था. बाद में इनमें से 37 अभ्यर्थियों की असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति भी कर दी गयी. इस सूची में जेपीएससी के एक सदस्य के भाई और बहन का नाम भी शामिल होने की बात जांच में सामने आयी है. जांच एजेंसी के अनुसार जेट 2006 का परिणाम 13 जनवरी 2007 को प्रकाशित किया गया था. इसमें 767 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया, जबकि तत्कालीन सचिव एलिस उषा रानी सिंह ने 9 मार्च 2007 को मेरिट लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया था, यानी मेरिट लिस्ट बनने से पहले ही परिणाम जारी कर दिया गया.

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प्रिया गुप्ता

लेखक के बारे में

By प्रिया गुप्ता

प्रिया गुप्ता पिछले एक साल से प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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