झारखंड हाईकोर्ट ने अनिल पाल्टा के ट्रांसफर पर जतायी कड़ी नाराजगी, कहा- क्यों नहीं मामले की जांच CBI को सौंप दी जाये, 24 घंटे में सरकार दे जवाब

Updated at : 17 Jun 2021 8:30 PM (IST)
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झारखंड हाईकोर्ट ने अनिल पाल्टा के ट्रांसफर पर जतायी कड़ी नाराजगी, कहा- क्यों नहीं मामले की जांच CBI को सौंप दी जाये, 24 घंटे में सरकार दे जवाब

Jharkhand News ( रांची) : झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुए जांच के दौरान CID के ADG अनिल पाल्टा के ट्रांसफर पर कड़ी नाराजगी जतायी. खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि रेमडेसीविर इंजेक्शन सहित अन्य जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी मामले की जांच के दौरान ही एडीजी का क्यों ट्रांसफर किया गया.

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Jharkhand News (राणा प्रताप, रांची) : झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुए जांच के दौरान CID के ADG अनिल पाल्टा के ट्रांसफर पर कड़ी नाराजगी जतायी. खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि रेमडेसीविर इंजेक्शन सहित अन्य जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी मामले की जांच के दौरान ही एडीजी का क्यों ट्रांसफर किया गया.

हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को ऐसी क्या अर्जेंसी आ गयी थी कि निष्पक्ष जांच के आश्वासन देने के 15 दिनों के अंदर ही एडीजी अनिल पाल्टा का ट्रांसफर करना पड़ा. ऐसा प्रतीत होता है कि यह ट्रांसफर किसी को बचाने के लिए किया गया है. पिछली सुनवाई के दौरान एडीजी ने उपस्थित होकर हाइकोर्ट को निष्पक्ष जांच के लिए आश्वस्त किया था, पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया.

जब हाइकोर्ट स्वयं मॉनिटरिंग कर रहा हो, तो बीच में ट्रांसफर क्यों किया गया. ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि जब कोर्ट मॉनिटरिंग कर रहा हो, तो जांच के बीच में अधिकारी का ट्रांसफर कर दिया गया हो. यदि ट्रांसफर करना ही था, तो कोर्ट को इसकी जानकारी पहले देनी चाहिए थी. बिना कोर्ट को बताये जांच के बीच में ऐसा करना कोर्ट की अवमानना है. नये एडीजी फिलहाल जांच नहीं करेंगे.

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सरकार बताये कि इस मामले की जांच CBI को क्यों नहीं सौंप दी जाये. 18 जून तक शपथ पत्र के माध्यम से ट्रांसफर करने के कारण व संबंधित दस्तावेज के साथ जवाब दायर किया जाये. वही, खंडपीठ ने मौखिक रूप से केंद्र सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि मामले की जांच CBI को देने से आपको कोई आपत्ति तो नहीं है.

इस पर केंद्र के अधिवक्ता राजीव सिन्हा ने बताया कि यदि कोर्ट जांच करने को कहेगा, तो इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 21 जून की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने खंडपीठ को बताया कि प्रशासनिक आधार पर अनिल पाल्टा का स्थानांतरण हुआ है. इसका असर जांच पर नहीं पड़ेगा.

मामले की जांच अनुसंधानकर्ता द्वारा सही दिशा में की जा रही है. हालांकि, दवाओं की कालाबाजारी मामले की जांच SIT बनाकर किया जा सकता है, जिसके हेड एडीजी रेलवे अनिल पाल्टा होंगे. वहीं, प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने पक्ष रखते हुए CID के ADG अनिल पाल्टा के ट्रांसफर का मामला उठाया.

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उन्होंने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान एडीजी वर्चुअल तरीके से कोर्ट में उपस्थित हुए थे तथा निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन जांच के बीच में उनका तबादला करने से जांच के प्रवाहित होने की संभावना है. रिम्स की ओर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने पक्ष रखा. उल्लेखनीय है कि दवाओं की कालाबाजारी मामले को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसकी मॉनिटरिंग शुरू की थी.

Posted By : Samir Ranjan.

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