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PHOTO: यूरोपियन मेंटल हॉस्पिटल कांके से सीआईपी तक का सफर, 106ठे स्थापना दिवस पर देखें अनदेखी तस्वीरें

Updated at : 16 May 2023 10:08 PM (IST)
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PHOTO: यूरोपियन मेंटल हॉस्पिटल कांके से सीआईपी तक का सफर, 106ठे स्थापना दिवस पर देखें अनदेखी तस्वीरें

Prabhat Khabar Exclusive|झारखंड की राजधानी रांची के कांके में अंग्रेजों के जमाने में बने अस्पताल, जिसे अब केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी कांके) के नाम से जाना जाता है, अपना 106ठा स्थापना दिवस मना रहा है. इस अवसर पर इस विश्वप्रसिद्ध अस्पताल की कुछ पुरानी तस्वीरें यहां देखें...

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Prabhat Khabar Exclusive: बीसवीं सदी में जहां भालुओं का बसेरा था, अंग्रेजों ने एक अस्पताल की नींव रखी. विश्वयुद्ध के बाद यूरोपियन सैनिकों की मानसिक चिकित्सा के लिए यहां यूरोपियन मेंटल हॉस्पिटल की स्थापना हुई. वर्ष 1918 में स्थापित इस अस्पताल का नाम अब केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी कांके) है. यह अब झारखंड की राजधानी रांची के कांके ब्लॉक में स्थित है. बेंगलुरु के निम्हांस के बाद मानसिक रोगों के इलाज का सबसे बड़ा केंद्र सीआईपी कांके ही है.

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सीआईपी कांके न केवल मानसिक रोगियों के इलाज का बड़ा केंद्र है, बल्कि यह एक बेहतरीन शिक्षण संस्थान भी है, जो देश को हर साल 34 साइकियैर्टिस्ट तैयार करके देता है. यूरोपियन सैनिकों के इलाज के लिए बने इस केंद्र में आज विश्वस्तरीय शोध हो रहे हैं. गरीबों को कम पैसे में बेहतरीन इलाज मिल रहा है.

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सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियैट्री (सीआईपी) कांके में अगर मरीज भर्ती हो जाये, तो उसके परिवार के लोगों की बड़ी चिंता दूर हो जाती है. इस अस्पताल में एडमिट मरीज को 2 महीने के लिए महज 600 रुपये का भुगतान करना पड़ता है. इसमें मरीज के रहने, खाने-पीने, इलाज, कपड़ा आदि के साथ-साथ दवाई का खर्च भी शामिल है.

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केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के डायरेक्टर जेनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) के अधीन काम करने वाले इस संस्थान का परिवेश तो मानसिक रोगियों के लिए बेहतरीन है ही, इसका आर्किटेक्ट भी विश्वस्तरीय है. लंदन के किंग्स कॉलेज और मॉर्शले हॉस्पिटल का आर्किटेक्ट सीआईपी कांके से ही प्रभावित है.

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मानसिक आरोग्य के लिए जाने-जाने वाले भारत के सबसे बेहतरीन संस्थानों में एक सीआईपी रांची में झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज करवाने के लिए आते हैं. यहां तक कि पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से भी लोग इलाज कराने रांची आते हैं.

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यूरोपियन मेंटल हॉस्पिटल, जो अब सीआईपी कांके के नाम से दुनिया भर में मशहूर है, अपनी स्थापना के 105 साल पूरे कर चुका है. 17 मई 2023 को यह अस्पताल अपना 106ठा स्थापना दिवस मना रहा है. इस अवसर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जिसमें वैश्विक मुद्दों पर एक्सपर्ट अपनी राय रखेंगे. ‘सीआईपी बुलेटिन 2023’ और ‘अलुमनाई न्यूजलेटर 2023’ का लोकार्पण भी होगा. स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में अस्पताल में इलाज करा रहे कई मरीजों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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