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झारखंड: कृषि विभाग ने जिन कंपनियों को किया था ब्लैक लिस्ट, उसे 10 दिनों के अंदर ही लिया वापस, जानें पूरा मामला

Updated at : 19 Sep 2023 6:51 AM (IST)
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झारखंड: कृषि विभाग ने जिन कंपनियों को किया था ब्लैक लिस्ट, उसे 10 दिनों के अंदर ही लिया वापस, जानें पूरा मामला

कृषि विभाग ने छह फरवरी 2023 को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली में उपयोग हो रहे प्लास्टिक उत्पाद के परीक्षण कार्य दिया था.

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रांची: कृषि विभाग ने जिन कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया था, उसे 10 दिनों के अंदर ही वापस ले लिया है. भारत सरकार की संस्था सीपैट की जांच रिपोर्ट के बाद इन कंपनियों को काली सूची में डाला गया था. अब कृषि विभाग फिर कंपनियों द्वारा की जा रही आपूर्ति सामग्री की जांच करायेगा. कृषि विभाग को शिकायत मिली थी कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जो प्लास्टिक पाइप की आपूर्ति हो रही है, उसकी गुणवत्ता सही नहीं है. विभाग ने जो विशेषता का जिक्र किया है, सामग्री उसके अनुसार नहीं है. इसके बाद कृषि निदेशक ने जांच कमेटी बनायी थी. इस कमेटी में भारत सरकार की संस्था सीपैट को भी रखा गया था.

कुल 14 कंपनियों पर की गयी थी कार्रवाई :

कृषि विभाग ने छह फरवरी 2023 को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली में उपयोग हो रहे प्लास्टिक उत्पाद के परीक्षण कार्य दिया था. छह मार्च को रैंडम आधार पर सभी जिलों में इस योजना के तहत लगाये गये प्लास्टिक उत्पाद की जांच का आदेश संयुक्त निदेशक और सीपैट को दिया गया था. 17 मई को सीपैट ने जांच रिपोर्ट दे दी थी. इसी आधार पर सितंबर को सभी कंपनियों को काली सूची में डाल दिया गया.

इन पर पांच साल तक सरकारी काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इस पर सभी कंपनियों ने कृषि विभाग को स्पष्टीकरण दिया है. इसके आलोक में कृषि विभाग ने सीपैट से दूसरा ओपिनियन लेने का निर्णय लिया है. जब तक दूसरा ओपिनियन नहीं आ जाता है, तब तक कंपनियों को काली सूची में डालने के 11 सितंबर के आदेश को वापस ले लिया गया है.

काली सूची में डाली गयी कंपनियों के साथ की बैठक

काली सूची में डाली गयी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ विभाग ने बैठक की. इसमें कंपनियों ने तय किया कि 30 दिनों के अंदर जहां-जहां से सीपैट ने जांच की है, वहां के प्लास्टिक उत्पाद बिना किसी शुल्क से बदल दिया जायेगा. उसके बाद जो सैंपल की जांच होगी, उसका खर्च संबंधित कंपनी उठायेगी. अगर कंपनी को किसी किसान से उत्पाद को लेकर शिकायत मिलेगी, तो उसको भी 30 दिनों के अंदर बदल दिया जायेगा. अगर कंपनी इन शर्तों का पालन नहीं करेगी, तो एमओयू स्वत: रद्द कर दिया जायेगा.

जो कंपनियां काली सूची में डाली गयी थीं

मोहित इंडिया, मैकनॉव इंडस्ट्रीज, ग्लोबल इलेक्ट्रो मैक्निकल इक्वीपमेंट, प्रीमियर इरिगेशन, एडरिटिक प्राइवेट लिमिटेड, निंबस पाइप्स लिमिटेड, मोहित पोलिटेक प्राइवेट लिमिटेड, वेदांता पोलिमर्स प्राइवेट लिमिटेड, श्री भंडारी प्लास्टिक प्राइवेट लिमिटेड, रुंगटा इरिकेशन लिमिटेड, भारत ड्रिप इरिगेशन एंड एग्रो, आरएम ड्रिप व स्प्रिंक्लर सिस्टम लिमिटेड, समय इरिगेशन (प्रा) लिमिटेड.

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