समय से पहले जन्मे नवजातों की जिंदगी दांव पर, 5 साल में भी नहीं बन सका सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक

सांकेतिक तस्वीर (AI Image)
झारखंड में सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित करने के लिए 5 साल पहले ही योजना बनी थी, लेकिन राज्य के किसी सरकारी अस्पताल में अबतक यह सुविधा शुरू नहीं हो सकी है. इससे समय से पहले जन्म लेने वाले गंभीर नवजातों को जीवनरक्षक सुविधा नहीं मिल पा रही है.
लता रानी की रिपोर्ट
रांचीः समय से पहले जन्मे, गंभीर रूप से बीमार या ऐसी परिस्थितियों में जन्मे नवजात, जिनकी मां किसी कारणवश स्तनपान नहीं करा पातीं, उनके लिए डोनर मिल्क जीवनरक्षक साबित होता है. लेकिन, झारखंड की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ने इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है. पांच साल पहले सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित करने की योजना बनी थी, लेकिन राज्य के किसी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा शुरू नहीं हो सकी है. एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाएगा. ऐसे में यह सवाल फिर सामने है कि राज्य में अब तक एक भी सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक क्यों नहीं स्थापित किया जा सका ?
5 साल बाद भी नहीं शुरू हो पायाह्यूमन मिल्क बैंक
झारखंड में रिम्स समेत 7 सरकारी मेडिकल कॉलेज, दो एनआइसीयू और 24 स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) मौजूद हैं. इसके बावजूद आज तक एक भी सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित नहीं हो सका है. राज्य में डोनर मिल्क की सुविधा केवल राजधानी के एक निजी चिल्ड्रेन अस्पताल में उपलब्ध है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की योजना पांच साल पुरानी है. वर्ष 2022-2023 में इसके लिए 30 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान भी कर दिया गया. लेकिन, हैरानी की बात यह है कि बीते पांच साल में स्वास्थ्य विभाग ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने के लिए जरूरी 1700 स्क्वायर फीट जगह नहीं खोज सका.
30 करोड़ का बजट, फिर भी अधर में योजना
गौरतलब है कि सितंबर 2021 में तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने झारखंड में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की घोषणा की थी. स्वास्थ्य विभाग ने 2023 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्य योजना के तहत ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित करने के लिए झारखंड के चार शहरों- बोकारो, दुमका, हजारीबाग एवं रांची (रातू सीएचसी के अस्पतालों) का चयन किया था. विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, इसकी स्थापना पर शुरुआत में सवा करोड़ रुपए खर्च होने थे. वर्ष 2022-2023 में 'चाइल्ड हेल्थ केयर एंड ह्यूमन मिल्क कॉम्पोनेंट' मद में योजना की राशि संयुक्त रूप से बढ़ाकर 30 करोड़ रुपए कर दी गई. दो तिहाई राशि केंद्र सरकार, जबकि एक तिहाई राज्य बजट से खर्च होनी थी. लेकिन, कोई कमीशन अधिकारी के नियुक्त नहीं होने के कारण योजना अधर में लटक गई.
गंभीर नवजातों के लिए क्यों जरूरी है ह्यूमन मिल्क बैंक?
अस्पतालों में इसलिए जरूरी है मिल्क बैंक जन्म के बाद मां का पहला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए अमृत के समान माना जाता है. यह बच्चे को संक्रमण से बचाने के साथ उसके शारीरिक और मानसिक विकास की मजबूत नींव रखता है. लेकिन, झारखंड में हर साल बड़ी संख्या में ऐसे नवजात जन्म लेते हैं, जिन्हें किसी न किसी कारणवश अपनी मां का दूध नसीब नहीं होता है. यूनिसेफ समेत विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के शोध बताते हैं कि जिन नवजातों को पर्याप्त मात्रा में मां का दूध नहीं मिलता, उनमें संक्रमण, निमोनिया, डायरिया, कुपोषण और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा अधिक होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बच्चों के लिए 'डोनर ब्रेस्ट मिल्क' सबसे सुरक्षित विकल्प होता है, जो केवल और केवल ह्यूमन मिल्क बैंक के जरिए ही उपलब्ध हो सकता है. रोजाना बड़ी तादाद में बच्चों को ऐसा दूध उपलब्ध कराने के लिए राज्य के सरकारी अस्पतालों में ह्यूमन मिल्क बैंक की स्थापना बेहद जरूरी है.
रांची के निजी अस्पताल में राज्य का एकमात्र ह्यूमन मिल्क बैंक रांची के रेडियम रोड स्थित रानी अस्पताल में 22 दिसंबर 2023 को ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित किया गया. 20 फरवरी 2024 से यहां नियमित रूप से डोनर मिल्क उपलब्ध कराया जा रहा है. अब तक 294 नवजातों को डोनर मिल्क दिया जा चुका है. अस्पताल के अनुसार, वर्ष 2024 में 108, वर्ष 2025 में 119 और वर्ष 2026 में अब तक 67 बच्चों को डोनर मिल्क दिया गया है. वर्ष 2024 में 78 तथा वर्ष 2025 में 74 माताओं ने दूध दान किया. प्रतिदिन लगभग 1000 एमएल से अधिक डोनर मिल्क की जरूरत रहती है.
झारखंड के प्रमुख तीन जिलों में नवजात शिशुओं के स्तनपान की स्थिति
| जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान करने वाले नवजात | अस्पताल से छुट्टी मिलने तक स्तनपान करने वाले नवजात | अस्पताल में डोनर ह्यूमन मिल्क पाने वाले नवजात | राज्य के प्रमुख तीन जिलों में न्यू प्रेग्नेंट वूमेन की संख्या |
| रांची - 50,049 | रांची - 45,542 | लोहरदगा - 208 | रांची - 66,244 |
| धनबाद - 43,848 | धनबाद - 27,504 | पश्चिमी सिंहभूम - 06 | धनबाद - 45,846 |
| बोकारो - 36,028 | बोकारो - 25,269 | बोकारो - 01 | गिरिडीह - 43,028 |
| कुल संख्या-3,20,619 | कुल संख्या-2,72,554 | कुल संख्या - 217 | कुल संख्या-5,50,083 |
स्तनपान को लेकर जागरूकता की कमी
स्तनपान नहीं कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, ओवरी कैंसर, मोटापा, डायबिटीज, ऑस्टियोपोरोसिस और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश महिलाओं को यह जानकारी ही नहीं होती कि अतिरिक्त दूध को दान भी किया जा सकता है. इधर, झारखंड में स्तनपान के आंकड़े चिंताजनक है. एनएफएचएस-5 के अनुसार तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने का आंकड़ा शहरी इलाके में 22.5 और ग्रामीण इलाके में 21.3 प्रतिशत ही है.
डोनर मिल्क से बची बच्चे की जान
बोकारो की रहने वाली पूर्णिमा कुमारी का बच्चा समय से पहले पैदा हुआ और उसका वजन केवल 800 ग्राम था. उन्हें पर्याप्त दूध नहीं हो पा रहा था. अस्पताल में डोनर मिल्क मिलने से बच्चे को सहारा मिला. अब बच्चा स्वस्थ है और वजन बढ़ा है. जमशेदपुर की साजदा बेगम के बच्चे की सर्जरी रानी अस्पताल में हुई. वह अपने बच्चे को स्तनपान कराने के साथ अतिरिक्त दूध जरूरतमंद नवजातों के लिए दान कर रही है.
4 शहरों में शुरू होगा या ह्यूमन मिल्क बैंक- तत्कालीन सचिव
झारखंड स्वास्थ्य विभाग के पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ अरुण कुमार सिंह का कहना है कि मां का पहला दूध अमृत के समान होता है. रेफ्रिजरेटर, डीप फ्रीज और आरो प्लांट जैसी तकनीक का उपयोग कर मां के दूध को छह महीने तक स्टोर किया जा सकता है. ह्यूमन मिल्क बैंक का उद्देश्य शिशु मृत्यु दर को कम करना था, लेकिन न जाने किन वजहों से यह योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है.
वहीं, एनएचएम चाइल्ड हेल्थ केयर के नोडल अफसर डॉ विजय किशोर रजत ने बताया कि दूसरे राज्यों की तरह झारखंड में भी कई जगहों पर ह्यूमन मिल्क बैंक खोलने की योजना थी. इसके लिए 1700 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत थी, लेकिन जगह के अभाव में यह अब तक शुरू नहीं हो पाया है. कोशिश है कि जिन जिलों में जगह उपलब्ध है, वहां इस वर्ष ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू कर दिया जाए.
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लेखक के बारे में
By अर्चना कुजूर
अर्चना कुजूर एक डिजिटल पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं, जो वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कार्यरत हैं. वह झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों के साथ-साथ राज्य की प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक और जनसरोकार से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं. अर्चना ने वर्ष 2016 में क्राफ्ट फिल्म स्कूल, रोहिणी (नई दिल्ली) से टीवी जर्नलिज्म एंड न्यूज रीडिंग में एक वर्षीय डिप्लोमा किया. इसके बाद उन्होंने नोएडा स्थित नेशनल वॉयस न्यूज और इंडिया वॉयस न्यूज चैनल (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) में इंटर्नशिप करने के साथ-साथ व्यावहारिक पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया.
झारखंड लौटने के बाद उन्होंने कशिश न्यूज चैनल में लगभग डेढ़ वर्ष तक आउटपुट विभाग में कॉपी राइटर के रूप में कार्य किया. इसके बाद रांची एक्सप्रेस में एजुकेशन बीट पर रिपोर्टिंग की और प्रिंट पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया. वर्ष 2022 से उन्होंने न्यूज11 भारत और नक्षत्र न्यूज चैनल में लगभग दो-दो वर्षों तक डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए राज्य की राजनीति, शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, योजनाओं और समसामयिक विषयों पर हजारों समाचार और विशेष लेख लिखें.
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