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बजट से उम्मीदें : झारखंड चैंबर ने कहा- खूंटी, गुमला समेत इन आदिवासी बहुल जिलों को रेल मार्ग से जोड़ा जाये

Updated at : 07 Jan 2023 7:56 PM (IST)
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बजट से उम्मीदें : झारखंड चैंबर ने कहा- खूंटी, गुमला समेत इन आदिवासी बहुल जिलों को रेल मार्ग से जोड़ा जाये

झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष किशोर मंत्री ने कहा है कि गुमला, चतरा, सिमडेगा और खूंटी जैसे आदिवासी बहुल इलाके अब तक रेल मार्ग से नहीं जुड़ पाये हैं. रेल संपर्क नहीं होने की वजह से ये क्षेत्र आर्थिक विकास की मुख्यधारा में शामिल नहीं हो पाये हैं.

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Expectations From Budget : अगले महीने 1 फरवरी को आम बजट (Union Budget 2023) संसद में पेश किया जायेगा. इस बजट से से देश के सभी राज्यों को उम्मीदें रहती है. हर राज्य चाहता है कि केंद्र सरकार उसके क्षेत्र में ऐसी योजना शुरू करे, जिससे इलाके का विकास हो, लोगों को रोजगार मिले. झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों को रेल मार्ग से जोड़ने की मांग की है.

झारखंड में रेल कनेक्टिविटी पर चैंबर ने दिया जोर

झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष किशोर मंत्री ने कहा है कि गुमला, चतरा, सिमडेगा और खूंटी जैसे आदिवासी बहुल इलाके अब तक रेल मार्ग से नहीं जुड़ पाये हैं. रेल संपर्क नहीं होने की वजह से ये क्षेत्र आर्थिक विकास की मुख्यधारा में शामिल नहीं हो पाये हैं. इन जिलों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए रेल कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है.

करीब एक दर्जन नयी ट्रेनों की मांग

श्री मंत्री ने कहा है कि झारखंड के प्रमुख शहरों को भारत के अन्य राज्यों से जोड़ने के लिए नयी ट्रेन की जरूरत है. उन्होंने मांग की है कि रांची से अजमेर, रांची से अहमदाबाद, रांची से देहरादून, गिरिडीह से मुंबई, गिरिडीह से बेंगलुरु, गिरिडीह से पुणे, धनबाद से दिल्ली, धनबाद से पुरी, न्यू गिरिडीह से कोलकाता, न्यू गिरिडीह से रांची, रांची से कोटा के बीच ट्रेन चलायी जाये. साथ ही उन्होंने झारखंड से अधिक से अधिक वंदे भारत ट्रेन चलाने की भी मांग की है.

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झारखंड के सभी जिले रेल मार्ग से जुड़ें : झारखंड चैंबर

चैंबर अध्यक्ष ने कहा है कि झारखंड के जिला मुख्यालय और अन्य सभी प्रमुख शहरों/राज्यों के बीच पार्सल/मालगाड़ियों की संख्या कम होने की वजह से निर्माता और किसान अपने तैयार माल या फसल को समय पर खरीदारों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं. इसलिए राज्य के सभी जिलों को रेल मार्ग से जोड़ना जरूरी है.

झारखंड में हों मल्टी मॉडल रेलवे सुविधाएं

इतना ही नहीं, झारखंड चैंबर ने झारखंड के सभी जिला मुख्यालयों में मल्टी मॉडल रेलवे सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया है, ताकि माल की डिलीवरी, विशेष रूप से खराब होने वाले माल की डिलीवरी हो सके. समय पर सामान की आपूर्ति कर दी जायेगी, तो किसानों का नुकसान कम होगा.

महत्वपूर्ण स्टेशनों पर बुनियादी ढांचा का विकास

झारखंड चैंबर ने प्रदेश के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी ढांचा के विकास की भी सलाह दी है. कहा है कि आधारभूत संरचनाओं के अभाव की वजह से यात्रियों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है. चैंबर के अध्यक्ष किशोर मंत्री ने कहा कि पारसनाथ रेलवे स्टेशन के बुनियादी ढांचे के विकास की जरूरत है. राज्य के सभी प्रमुख स्टेशनों पर लिफ्ट, एस्केलेटर, रैंप और एसी रिटायरिंग रूम की सुविधाएं दी जानी चाहिए.

झारखंड के चक्रधरपुर में बने रेल कोच कारखाना

झारखंड चैंबर ने पश्चिमी सिंहभूम के चाईबासा में रेल कोच फैक्ट्री विकसित करने की मांग भी की है. साथ ही रांची में एक नया रेलवे जोन खोलने का भी सुझाव चैंबर ने दिया है. चैंबर का कहना है कि झारखंड देश का प्रमुख इस्पात उत्पादक राज्य है. बावजूद इसके इस प्रदेश में एक भी रेल कोच कारखाना नहीं है. यहां एक रेल कोच कारखाना खोला जाना चाहिए.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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