वन विभाग ने सालभर पहले दी थी कटाई की अनुमति, प्रक्रिया में अटके पेड़; रांची-मुरी रोड पर मौत को दे रहे दावत

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जंगल के रास्ते जाते लोग : प्रतीकात्मक फोटो

रांची-मुरी मार्ग पर बीते साल वन विभाग ने 24 सूखे पेड़ों को खतरनाक बताकर काटने की अनुमति दी थी. लेकिन, आज भी ये पेड़ मौत बनकर खड़े हैं, जिससे राहगीरों की जान का खतरा मंडरा रहा है. सरकारी लालफीताशाही के चलते यह मामला एक साल से अटका पड़ा है.

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रांची : रांची-मुरी पथ पर रविवार को जीवित पेड़ की डाल गिरने से दो युवकों की मौत के बाद सड़क किनारे खड़े सूखे पेड़ों को लेकर भी चिंता बढ़ गयी है. इस मार्ग पर करीब 24 सूखे पेड़ अब भी मौत का खतरा बने हुए हैं. हैरानी की बात यह है कि करीब एक साल पहले ही इन पेड़ों को कटाई के लिए चिह्नित किया जा चुका है. वन विभाग की जांच में इन्हें पूरी तरह सूखा पाया गया था, जबकि कुछ पेड़ अंदर से खोखले भी मिले थे. विभाग ने इन्हें खतरनाक बताते हुए पिछले साल ही काटने की अनुमति दे दी थी, लेकिन आज भी ये सड़क किनारे खड़े हैं.

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अनुमति मिली, फिर भी कटाई का काम अटका

इन पेड़ों को काटकर हटाने की जिम्मेदारी पथ निर्माण विभाग की है. सूखे पेड़ों को काटने के लिए पथ निर्माण विभाग ने वन विकास निगम से इस्टीमेट मांगा है. सरकारी प्रक्रिया के चक्कर में यह मामला करीब एक साल से अटका हुआ है. विभाग के कार्यपालक अभियंता (ग्रामीण) ने 18 सितंबर 2025 को वन विभाग से इन पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी थी.

15 से 60 फीट ऊंचे, मोटाई 1.5 से 6.5 फीट

रांची-मुरी मार्ग पर चिह्नित किये गये सूखे पेड़ों की ऊंचाई 15 से 60 फीट तक है। इनकी मोटाई 1.5 से 6.5 फीट के बीच है। ऐसे में सड़क किनारे खड़े इन पेड़ों के गिरने पर जानमाल के नुकसान की आशंका बनी हुई है। रविवार की घटना के बाद राहगीरों के बीच भी इन पेड़ों को लेकर डर बढ़ गया है।

जिस पेड़ की डाल गिरी, वह सूखा नहीं था : अभियंता

रविवार को अनगड़ा के पास जीवित पेड़ की डाल गिरने से दो युवकों की मौत हुई थी. घटना के बाद विभागीय इंजीनियर मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. रांची पथ प्रमंडल (ग्रामीण) के कार्यपालक अभियंता जितेंद्र कुमार ने कहा कि जिस पेड़ की डाली गिरने से युवकों की मौत हुई, वह सूखा पेड़ नहीं था. घटनास्थल अनगड़ा के आगे है. वन विभाग से सिल्ली तक पेड़ काटने की अनुमति मिली है और पेड़ों को काटने की प्रक्रिया चल रही है.

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वन विभाग- हमारी जिम्मेदारी सिर्फ अनुमति देने तक

वन प्रमंडल पदाधिकारी श्रीकांत वर्मा ने कहा कि सूखे पेड़ों के गिरने से जानमाल का नुकसान हो सकता है. उन्होंने बताया कि जांच के बाद एक साल पहले ही रांची-मुरी रोड में 24 सूखे पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी गयी थी. पेड़ काटने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की है. वन विभाग के पास पेड़ काटने का प्रावधान नहीं है। विभाग केवल पेड़ काटने की अनुमति देता है.

हर साल बरसात से पहले चिह्नित किये जाते हैं सूखे पेड़

श्रीकांत वर्मा ने बताया कि हर वर्ष बरसात से पहले सभी रेंज को सूखे पेड़ों को चिह्नित करने का निर्देश दिया जाता है. रांची में भी ऐसे पेड़ों को चिह्नित किया गया है. सड़क किनारे 24 पेड़ों को चिह्नित किया गया है. ऐसे में इन पेड़ों को समय पर हटाना जरूरी है, ताकि सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

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