झारखंड में बनेगा कृषि विश्वविद्यालय और पशुपालन विश्वविद्यालय, BAU के किसान मेला में कृषि मंत्री बादल का ऐलान

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 मनाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए आवश्यक बजट की व्यवस्था भी की गयी है. झारखंड मिलेट्स के लिए प्राचीन समय से जाना जाता रहा है. अब हमें अपनी प्राचीन परंपरा और उत्पादों की ओर लौटने का प्रयास करना होगा.

झारखंड में कृषि विश्वविद्यालय और पशुपालन विश्वविद्यालय की स्थापना की जायेगी. यह घोषणा झारखंडके कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने बिरसा एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू) में आयोजित तीन दिवसीय किसान मेला के उद्घाटन समारोह में शुक्रवार को की. उन्होंने कहा कि बीएयू में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की स्मृति में एक विशाल हाई-टेक ऑडिटोरियम बनाने के लिए भी राज्य सरकार अनुदान देगी. उन्होंने कहा कि बीएयू कोे एनडीआरआई करनाल और जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड की तरह अग्रणी बनने का प्रयास करना चाहिए.

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 मनाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए आवश्यक बजट उपबंध भी किया गया है. झारखंड मिलेट्स के लिए प्राचीन समय से जाना जाता रहा है. अब हमें अपनी प्राचीन परंपरा और उत्पादों की ओर लौटने का प्रयास करना होगा. उन्होंने कहा कि दुमका के हंसडीहा स्थित डेयरी प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के छात्र ने स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा में देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है. इसके लिए विश्वविद्यालय में उसका सम्मान किया जाना चाहिए.

इससे पहले मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि ग्रामीण युवाओं को गांवों और कृषि कार्य से जोड़े रखने के लिए राज्यव्यापी अभियान चलना चाहिए, ताकि गांवों में स्वावलंबन और खुशी आ सके. मैट्रिक पास करने के बाद युवाओं का नौकरी के लिए शहरों की ओर पलायन रुके. उन्होंने कहा कि किसानों की उन्नति होगी, तो देश खुशहाल होगा. राज्य सरकार ने लाखों किसानों का ऋण माफ किया है.

कृषि सचिव अबु-बकर सिद्दीकी ने वैज्ञानिकों से वैसी प्रौद्योगिकी विकसित करने की अपील की, जो छोटे एवं सीमांत किसानों के अनुकूल हो. मौसम परिवर्तन के दौर में भी बेहतर परिणाम दे सके. उन्होंने कृषि मेला हर जिला और प्रखंड में आयोजित करने पर बल दिया, ताकि गांव-गांव तक नयी प्रौद्योगिकी पहुंच सके और किसान संपन्न हो सकें. उन्होंने कहा कि झारखंड मछली के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है. राज्य बनने के समय यहां वार्षिक मछली उत्पादन 14,000 टन था, जो अब 2.5 लाख टन हो गया है.

स्वागत भाषण बीएयू के कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह ने दिया. इस अवसर पर कांके के विधायक समरी लाल, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक एमएस राव तथा आईसीएआर-अटारी, पटना के निदेशक डॉ अंजनी कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किये. प्रसार शिक्षा निदेशक जगरनाथ उरांव ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम का संचालन शशि सिंह ने किया. अतिथियों ने विश्वविद्यालय के कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया.

बता दें कि शुक्रवार को कांके स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय एग्रोटेक किसान मेला का भव्य शुभारंभ हुआ. मेला में लगभग 150 स्टॉल पर कृषि, पशुपालन, वानिकी, बागवानी, मत्स्यपालन, दुग्ध प्रौद्योगिकी, कृषि प्रसंस्करण, कृषि यंत्रीकरण, कृषि स्टार्टअप, कुटीर उद्योग आदि से संबंधित आधुनिक प्रौद्योगिकी, सेवाओं एवं उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है.

कृषि और संबंधित गतिविधियों में नवोन्मेषी प्रयोग और विशिष्ट उपलब्धियों के लिए 8 प्रगतिशील किसानों दुमका की सुचिता देवी, गढ़वा की अयोध्या बिंद, सरायकेला-खरसावां की अंशु सिंह, साहिबगंज के विकास कुमार, पूर्वी सिंहभूम के विजय महतो, पलामू के राधेश्याम प्रसाद, चतरा के भीम रजक और देवघर के गोकुल प्रसाद यादव को सम्मानित किया गया.

विश्वविद्यालय ने मेला में मड़ुआ, गुंदली, कोदो, चेना, कंगनी, मुरात, ज्वार, बाजरा के पोषक तत्वों के बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए इन अनाजों और उनके प्रसंस्कृत उत्पादों जैसे बिस्किट, कुकीज, गुजिया, नट बॉल्स, लड्डू, शक्करपारा, मिक्सचर, बालूशाही निमकी, चकली, धुसका, मोमो, डुंबू, बर्फी, पोहा, इडली, मफीन, केक, पास्ता, मठरी, समोसा, अनारसा, मैकरोनी, चाऊ, फ्लैक्स को प्रदर्शित किया गया है. इनमें चावल,, गेहूं मक्का आदि की तुलना में प्रोटीन व आयरन समेत अन्य पोषक तत्व ज्यादा होते हैं.
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By Mithilesh Jha
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