पलामू: पाटन रूट पर बिजली संकट गहराया, 20 मेगावाट की जगह मिल रहा 5 मेगावाट, 5 ग्रिड फेल
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पलामू के पाटन क्षेत्र में बिजली की अनियमित आपूर्ति और लो वोल्टेज से उपभोक्ता परेशान हैं। विभाग द्वारा पर्याप्त बिजली न मिलने से रोटेशन पर चल रही है व्यवस्था।
रामनरेश की रिपोर्ट
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पलामू. जिले के पाटन क्षेत्र में बिजली की अनियमित आपूर्ति होने से उपभोक्ता काफी परेशान है. इस परेशानी को दूर करने की दिशा में विभाग के द्वारा कोई सार्थक पहल नही किया जा रहा है. क्षेत्र में लो वोल्टेज, अनियमित आपूर्ति व फाल्ट की समस्या गंभीर बनी हुयी है. विद्युत उपभोक्ताओं ने गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के लिए कई बार विभाग के पदाधिकारियों से शिकायत की. इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नही हो सका. इस कारण लोग काफी परेशान है. विद्युत विभाग के द्वारा बिजली आपूर्ति के लिए जो वितरण व्यवस्था बनायी गयी है.
पाटन रूट से जोड़ा गया है 5 विद्युत उपकेंद्र
उसके मुताबिक पाटन रूट से पांच विद्युत उपकेंद्र को जोड़ा गया है. इस रूट में पाटन, गहरपथरा, कुम्हवा, पदमा व परसाईं विद्युत उपकेंद्र संचालित होता है. जानकारी के मुताबिक इन सभी पांच विद्युत ग्रीड को नियमित रूप से संचालित करने के लिए कम से कम 20 मेगावाट बिजली की आवश्यकता है. विभाग के कर्मियों की माने तो जरूरत से काफी कम बिजली ग्रीड को मिल रही है. प्रतिदिन औसतन करीब पांच से छह मेगावाट ही बिजली की आपूर्ति हो रही है. इतने कम मेगावाट बिजली में सभी पांच ग्रीडों से जुड़े उपभोक्ताओं को विद्युत उपलब्ध कराना संभव नही हो पा रहा है. बताया जाता है कि कुम्हवा विद्युत उपकेंद्र के नियमित संचालन के लिए चार मेगावाट बिजली की आवश्यकता है.
पाटन रूट से 3 प्रखंडों को होती है आपूर्ति
पाटन रूट में पांच विद्युत ग्रीड के माध्यम से तीन प्रखंडों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था है. गहर पथरा, पाटन व कुम्हवा विद्युत उपकेंद्र से पाटन प्रखंड क्षेत्र के अलावा पड़वा प्रखंड के कुछ गांवों में बिजली आपूर्ति की जाती है.जबकि पदमा विद्युत उपकेंद्र से मनातू, प्रखंड और परसाई उप केंद्र से तरहसी व पांकी प्रखंड के गांवों में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था है. पर्याप्त बिजली नही मिलने के कारण पाटन रूट के उपभोक्ताओं को नियमित आपूर्ति नही हो पाती है.
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प्रतिदिन मात्र दो से तीन घंटे ही बिजली
उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रतिदिन दो से तीन घंटे ही बिजली आपूर्ति की जाती है. वह भी कई घंटों के अंतराल पर आपूर्ति होती है. इस कारण उन्हें काफी परेशानी झेलना पड़ता है. विद्युत उपकेंद्र में कार्यरत कर्मियों का कहना है कि आवश्यकता के अनुसार बिजली नही मिलने से वितरण करने में परेशानी हो रही है. पोषक क्षेत्र के उपभोक्ताओं तक बिजली आपूर्ति करने के लिए रात्रि जागरण करना पड़ता है. कर्मियों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में लगातार बिजली आपूर्ति करना संभव नही है. क्योंकि उपकेंद्र को ही काफी कम बिजली मिलती है.
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रोटेशन के आधार पर होती है बिजली आपूर्ति
विद्युत उपकेंद्रों को पर्याप्त बिजली नही मिलने के कारण वितरण व्यवस्था में परेशानी हो रही है. कर्मियों की माने तो रोटेशन के आधार पर फीडर को बिजली की आपूर्ति करना पड़ता है. कर्मियों ने बताया कि किशुनपुर फीडर को चालू करने के लिए नावाजयपुर रूट को बंद करना पड़ता है. इसी तरह नावाजयपुर फीडर को चालू करने के लिए किशुनपुर फीडर बंद करना आवश्यक हो जाता है. क्योंकि विभाग के द्वारा विद्युत उपकेंद्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जरूरत के अनुसार बिजली नही दी जा रही है.
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