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नीलांबर पीतांबर विवि में एमबीए स्टूडेंट्स के साथ सिस्टम का मजाक, न क्लासरूम, न कुर्सियां, वीसी ने दिये जांच के आदेश

Updated at : 19 May 2025 9:05 AM (IST)
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नीलांबर पीतांबर विवि में एमबीए स्टूडेंट्स के लिए क्लास रूम नहीं

नीलांबर पीतांबर विवि में एमबीए स्टूडेंट्स के लिए क्लास रूम नहीं

NPU MBA Issue: पलामू स्थित नीलांबर पीतांबर विवि (NPU) में एमबीए के स्टूडेंट्स के साथ सिस्टम मजाक कर रही है. यहां कोर्स शुरू होने के सात सालों के बाद भी एमबीए स्टूडेंट्स के लिए न तो क्लासरूम है, न ही कुर्सियां. इस मामले में वीसी ने जांच के आदेश दिये हैं.

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मेदिनीनगर, शिवेंद्र कुमार: पलामू में स्थित नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय में एमबीए स्टूडेंट्स के साथ पढ़ाई के नाम पर मजाक किया जा रहा है. विश्वविद्यालय में कोर्स शुरू होने के सात साल बाद भी बच्चों के लिए न तो क्लासरूम की व्यवस्था की गयी है, न ही कुर्सियों की. इस कोर्स के लिए विवि में शिक्षक भी केवल तीन ही हैं, जिनमें से स्थायी शिक्षक केवल एक है. पिछले सात सालों में विश्वविद्यालय ने स्टूडेंट्स से फीस करोड़ों में वसूल की है, लेकिन उन्हें सुविधा बिल्कुल नहीं दी. इस मामले (NPU MBA Issue) में विवि के वीसी डॉ दिनेश कुमार सिंह ने जांच के आदेश दिये हैं.

2017 से हो रही एमबीए की पढ़ाई

बता दें कि नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय में साल 2017 से मास्टर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) की पढ़ाई हो रही है. यह कोर्स जेएस कालेज के कैंपस में शुरू किया गया है. लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी एमबीए की क्लास करने के लिए क्लास रूम तक कि व्यवस्था नहीं हो पायी है. क्लासरूम के लिए जिस रूम को चिन्हित किया गया है. उस कमरे में एक भी बेंच डेक्स नहीं लगा हुआ है. जबकि एमबीए सेल्फ फाइनेंस कोर्स है. इसके लिए जो भी छात्र एडमिशन लेते हैं. उन्हें पूरे कोर्स के लिए करीब 91 हजार रुपया खर्च करना पड़ता है. फिर भी छात्रों के लिए क्लास रूम नहीं है. जब कभी कभार कुछ बच्चे क्लास करने आ भी जाते हैं. तो उन्हें एमबीए के लिए काम कर रहे उस कार्यालय में बैठाकर पढ़ाया जाता है, जिसकी साइज महज 10 बाय 12 है. वहीं, बच्चों को पढ़ाने के लिए कार्यालय में रखे गए कुर्सी, टेबल, अलमारी के अलावा केवल छह से सात कुर्सी ही अलग से लग पाते हैं.

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डिमांड ड्राफ्ट से लिया जाता है फीस

इस संबंध में विवि में पढ़ रहे छात्रों ने बताया कि एक सेमेस्टर के लिए उन्हें 21 हजार 88 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट बनवाना पड़ता है. जिसके लिए 110 रुपए अलग से बैंक को देने पड़ते हैं. छात्रों का कहना है कि इससे उनपर आर्थिक बोझ पड़ता है. पूरे कोर्स के लिए विद्यार्थियों को आठ बार डिमांड ड्राफ्ट बनवाना पड़ता है. इसमें चार बार सेमेस्टर की फीस और चार बार परीक्षा फॉर्म भरने के लिए डिमांड ड्राफ्ट बनवाना पड़ता है. परीक्षा फॉर्म भरने के लिए एक बार में 1500 का डिमांड ड्राफ्ट बनवाना पड़ता है. जिसका 25 रुपया अलग से बैंक को देना पड़ता है.

सात साल में फीस के रूप में वसूले पौने दो करोड़

वहीं, विश्वविद्यालय के द्वारा 2017 में एमबीए कोर्स की शुरुआत की जाने के बाद अबतक 7 बैच में 213 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है. इस हिसाब से केवल एडमिशन फीस के रूप में विश्वविद्यालय छात्रों से पौने दो करोड़ रुपये वसूल चुका है. मालूम हो कि विवि में एमबीए कोर्स में सत्र 2017-19 में 42, 18-20 में 32, 19-21 में 31, 20-22 में 37, 21-23 में 23, 22-24 में 18 और 23-25 पर 30 बच्चे नामांकित है.

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एमबीए के क्लास के लिए तीन शिक्षक रखे गए हैं

बता दें कि विश्वविद्यालय के द्वारा एमबीए कोर्स को चलाने के लिए डॉ सुमित कुमार मिश्रा, अजय कुमार और प्रतिभा कुमारी को क्लास लेने के लिए रखा गया है. इनमें से केवल डॉ सुमित कुमार मिश्रा परमानेंट शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं. बाकि अजय कुमार और प्रतिभा कुमारी को प्रत्येक क्लास के लिए 600 दिया जाता है.

एमबीए की क्लास के लिए नहीं है रूमः निदेशक

एमबीए के निदेशक डॉ एसके पांडेय ने कहा कि क्लासरूम के लिए विश्वविद्यालय को कई बार पत्राचार किया गया है. लेकिन कमरे की व्यवस्था नहीं की गयी है. उन्होंने कहा कि इसके लिए जेएस कॉलेज के प्राचार्य को भी पत्र भेजा गया है. लेकिन अभी तक कमरा नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि क्लास लेने के लिए एमबीए के कार्यालय में ही बैठा कर छात्रों की पढ़ाई की जाती है.

वीसी ने कहा- जो उत्तरदायी हैं, उनपर होगी कार्रवाई

मामले को लेकर एनपीयू के वीसी डॉ दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि जेएस कॉलेज में चल रहे एमबीए कोर्स का निरीक्षण किया जायेगा. इसके लिए जो भी उत्तरदाई होंगे. उन पर कार्रवाई की जायेगी.

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Rupali Das

लेखक के बारे में

By Rupali Das

नमस्कार! मैं रुपाली दास, एक समर्पित पत्रकार हूं. एक साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं. यहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पहले दूरदर्शन, हिंदुस्तान, द फॉलोअप सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी काम करने का अनुभव है.

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