141 करोड़ की योजना: टंकी बनी, पाइपलाइन बिछी, फिर भी 104 गांवों तक नहीं पहुंचा पानी
अधूरा पड़ा योजना का निर्माण कार्य | Prabhat Khabar Network
पाटन प्रखंड में करोड़ों की लागत से बनी नल-जल योजना ठप पड़ी है. 141 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद 104 गांवों में साफ पानी नहीं पहुंचा है. ग्रामीणों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है.
पाटन से रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट
पाटन. पलामू जिले के पाटन प्रखंड में केंद्र और राज्य सरकार ग्रामीण इलाकों में साफ पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये की बड़ी-बड़ी योजनाएं चला रही है. योजनाओं को मंजूरी मिलने और पैसे मिलने के बाद, काम पूरा कराने की जिम्मेदारी भी तय की जाती है. लेकिन पाटन प्रखंड में घर-घर नल-जल योजना की हालत व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. करीब 141 करोड़ रुपये से 104 गांवों तक साफ पानी पहुंचाने की योजना सालों से अटकी पड़ी है. कई जगहों पर काम शुरू हुआ तो पिछले चार-पांच सालों से बंद है. ऐसे में, गांव वाले आज भी योजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं.
141 करोड़ की योजना: 104 गांव प्यासे, काम अधर में
पाटन प्रखंड के लोगों को साफ पानी मिले, इसी सोच से यह बड़ी योजना शुरू की गई थी. योजना के तहत, प्रखंड के 10 गांवों में पानी की टंकियां बननी थीं और पाइपलाइन के जरिए 104 गांवों तक पानी पहुंचाना था. इसके लिए करीब 141 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे और इसका टेंडर भी हुआ था. काम एकेजी कंस्ट्रक्शन को मिला था.
शुरुआत में उताकी, सतौवा और दीपौवा जैसी कुछ जगहों पर काम शुरू हुआ और थोड़ा-बहुत काम भी हुआ, लेकिन बाद में यह बंद हो गया. पिछले चार-पांच सालों से काम रुका रहने के कारण ग्रामीणों को योजना का फायदा नहीं मिल पा रहा है. उताकी गांव की रहने वाली राधा देवी ने बताया, 'हमें आज भी दूर से पानी लाना पड़ता है, और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है.'
कोयल नदी से पाटन तक पानी: योजना का अधूरा सफर
योजना के मुताबिक, पड़वा प्रखंड के कजरी में कोयल नदी से पानी लाकर पाटन प्रखंड तक पहुंचाने की व्यवस्था की जानी थी. बताया जाता है कि उताकी में मुख्य पानी टंकी और पानी साफ करने का इंतजाम किया जाना था, ताकि पानी को फिल्टर करके दूसरी टंकियों तक भेजा जा सके. वहां से पाइपलाइन के जरिए प्रखंड के 104 गांवों में साफ पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था.
10 गांवों में बननी हैं पानी टंकियां, पर काम अधर में
योजना के हिसाब से मायापुर खुर्द, उताकी, इमली खास, कालापहाड़, पांडेयपुरा, सतौवा, कराने, दीपौवा, चुरादोहर, शोले और मेराल भोंगा इलाकों में पानी टंकियों का निर्माण करके पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जानी है. हालांकि, अधूरा निर्माण कार्य होने की वजह से पूरी योजना बीच में ही लटक गई है.
गांव वालों का कहना है कि करोड़ों रुपये की इस योजना का काम क्यों रुका हुआ है और इसे कब पूरा किया जाएगा, इसकी कोई साफ जानकारी किसी भी तरफ से नहीं मिल रही है.
निर्माण की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
गांव वालों ने पहले कराए गए निर्माण कार्य की क्वालिटी पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि ठेकेदार ने काम में कमजोर पाइप जैसे घटिया सामान का इस्तेमाल किया और निर्माण के दौरान बिना परीक्षण के जोड़ लगाने जैसे क्वालिटी के नियमों का ठीक से पालन नहीं किया गया.
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जिला परिषद सदस्य बोले- हो उच्चस्तरीय जांच
ग्रामीणों की इस चिंता को जिला परिषद सदस्य ने भी उठाया है. पाटन पश्चिमी के जिला परिषद सदस्य जयशंकर सिंह ने कहा कि योजना के तहत पहले कराए गए निर्माण में घटिया सामान के इस्तेमाल और तय काम के अनुसार काम न होने की शिकायतें मिली हैं. इसकी ऊंचे स्तर पर जांच होनी चाहिए. साथ ही, प्रशासन को तुरंत कोई ठोस कदम उठाकर रुकी हुई नल-जल योजना को पूरा कराना चाहिए, ताकि पाटन प्रखंड के 104 गांवों के लोगों को साफ पानी मिल सके और योजना का मकसद पूरा हो सके.
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